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कैसे सुधरेगी रैंकिंग, सचिवालय के शौचालयों का है बुरा हाल

Wed, 17 Jan 2018 12:38 AM IST
Updated Wed, 17 Jan 2018 12:38 AM IST
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कैसे सुधरेगी रैंकिंग, सचिवालय के शौचालयों का है बुरा हाल
कैसे सुधरेगी रैंकिंग, सचिवालय के शौचालयों का है बुरा हाल
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भिवानी। स्वच्छता रैंकिंग पिछले साल 28 पायदान का सुधार हुआ हो लेकिन अभी भी शौचालयों की सफाई का हाल बुरा है। लघु सचिवालय के 10 शौचालयों में से एक भी हालत ठीक नहीं है। 10 में से 7 शौचालय चालू है तो वहां सफाई के लिए कर्मचारी तक नहीं हैं और तीन पर ताले लटके हैं। इन शौचालयों की चाभी बाबुओं की जेब में होती है, जब खुद इस्तेमाल करना हो तो ताला खोलते हैं।
नगर परिषद पर पूरे शहर की सफाई का जिम्मा है। शहर की सड़कों की सफाई के हालात में पिछले एक साल से काफी सुधार देखने को मिला है। लेकिन सार्वजनिक शौचालयों पर नजर दौड़ाए तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आती है। बात लघु सचिवालय के शौचालयों की करें तो वहां एसडीएम ऑफिस के पीछे एक साल पूर्व ही करीब 15 लाख रुपये की लागत से शौचालय बनाया गया था। यहां बनाए गए महिला शौचालय पर ताला लगा है तो पुरुष शौचालय की सफाई के लिए एक कर्मचारी तक नहीं है। इतना नहीं, शौचालय में पानी तक की व्यवस्था ना होने से नकारा बना हुआ है। एसडीएम ऑफिस के ऊपर प्रथम तल पर बने शौचालय की भी यह हालत है। वहां भी टॉयलेट के लिए लोग बोतल में भरकर पानी ले जाते हैं।
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स्वच्छता अभियान में रैंकिंग सुधारने के लिए नगर परिषद काफी जद्दोजहद कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि शहर की सरकार लाखों रुपये की लागत से बनाए गए खुद के ही शौचालयों की सफाई करना भूल रही है। बेशक शहर के मुख्य मार्गों की सफाई के लिए रात को भी सफाई हो रही हो, लेकिन प्रशासन के अपने घर कहे जाने वाले लघु सचिवालय के शौचालयों को साफ करने के लिए कर्मचारी तक नहीं है।
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कर्मचारी केवल करते हैं दफ्तरों की सफाई
लघु सचिवालय में स्थिति यह है कि यहां पर करीब एक दर्जन सफाई कर्मचारी विभिन्न विभागों के कार्यरत है, लेकिन ये कर्मचारी केवल दफ्तरों की ही सफाई तक सीमित रहते है। शौचालयों की सफाई के लिए कभी कभार ही अभियान चलता है।
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सीटीएम कार्यालय के पास स्थित शौचालय का भी बुरा हाल
सीटीएम कार्यालय के पास बने शौचालय का भी बुरा हाल है। यहां महिला शौचालय तो बंद ही है। जिसकी चाभी कर्मचारी अपनी जेब में रखते हैं, जरूरत पड़ने पर ही खोले जाते है। यूं तो इन शौचालयों को साफ करने का जिम्मा नगर परिषद का ना होकर लघु सचिवालय में तैनात अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों का होता है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है गिने चुने डिपार्टमेंट के ही सफाई कर्मचारी वहां मिलते हैं। अधिकतर डिपार्टमेंट के कर्मचारी पार्ट टाइम है जो सुबह केवल दफ्तर साफ कर वहां से चले जाते हैं।
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शौचालयों की सफाई के इस बार मिलेंगे नंबर
बेशक लघु सचिवालय की सफाई का जिम्मा पूरी तरह से नगर परिषद के पास ना हो, लेकिन इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में सार्वजनिक शौचालयों की सफाई को लेकर नप को नंबर मिलने हैं। इसके आधार पर ही रैंकिंग दी जाएगी।

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ये रही है रैंकिंग की स्थिति
वर्ष --------- रैंकिंग
2016---- 373
2017--- 345
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नगर परिषद सफाई कर्मचारियों की स्थिति
स्थायी सफाई कर्मचारी --- 173
सफाई दरोगा------- 12
अस्थाई कर्मचारी -------- 75
ठेका प्रथा पर कार्यरत ---- 150
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स्वच्छता के लिए अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को सफाई के मामले में जागरूक करने के साथ ही नप द्वारा शहर की सफाई व कूड़ा उठान की व्यवस्था को काफी हद तक सुधार जा चुका है। नप द्वारा शहर को साफ सुथरा बनाने के लिए रात को भी सफाई करवाई जा रही है। रही बात शौचालयों की तो शहर में स्थित तीन सार्वजनिक शौचालय की सफाई के लिए नप ने कर्मचरी लगाए हुए हैं। लघु सचिवालय में स्थित शौचालयों की सफाई के लिए भी विशेष प्रबंध किए जाएंगे।
- आरके महता, सचिव, नगर परिषद
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