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ठेके पर चालक तो भर्ती किए मगर नहीं पता रास्ते, लंबे रूट की बस सेवा ठप
Updated Sun, 28 Oct 2018 01:02 AM IST
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भिवानी। चंडीगढ़ के लिए रवाना हुई रोडवेज बस जींद से ही वापस लौट आई। रोडवेज प्रबंधन ने ठेके पर चालक तो भर्ती कर लिए मगर उन्हें दूसरे राज्यों को जाने वाले रास्तों की जानकारी नहीं है। ऐसे में चालक होने के बावजूद भी बसें दूसरे राज्यों में नहीं भेजी जा रही। इससे यात्री परेशान हैं। शनिवार को 42 और चालक ठेके पर भर्ती किए। अब ठेके के चालकों की संख्या 82 हो गई है। वहीं 15 और कंडक्टर भर्ती किए जाने से इनकी संख्या 80 हो गई। ठेके के चालकों और कंडक्टर के सहारे शनिवार को रोडवेज की 64 बसें चलाई गई।
720 निजी बसों को परमिट दिए जाने के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को 12वें दिन भी चली। रोडवेज कर्मचारी शहर में प्रदर्शन कर रोष जताते रहे और बस स्टैंड पर ठेके पर लगे चालकों और कंडक्टर बने होमगार्ड के जवान के सहारे रोडवेज बसें दौड़ती रही।
वहीं, रोडवेज प्रबंधन के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। यह है नए चालकों को दूसरे राज्यों के रास्ते की जानकारी नहीं होना। इस कारण शनिवार सुबह चंडीगढ़ के लिए रवाना हुई बस जींद से वापस बुलानी पड़ी। पिछले 12 दिनों से लंबे रूट की बस सेवा प्रभावित है। डीआई जयकिशन ने बताया कि अभी लोकल रूटों पर बसें चल रही है, लंबे रूट पर अभी बसें नहीं चलाई जा रही। नए भर्ती हुए चालकों को दूसरे राज्यों के मार्गों की पूरी जानकारी नहीं है। जिस कारण समस्या आ रही है।
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कंडक्टर बन रहा चालक तो चालक बन रहा कंडक्टर, यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़
हांसी गई रोडवेज बस में खुलेआम यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा था। सवारियों से भरी बस में कभी कंडक्टर चालक बन रहा था तो चालक कंडक्टर। यात्रियों के भी समझ नहीं आ रहा था कि इनमें असल चालक कौन है और कंडक्टर कौन। इसके अलावा टिकट नहीं देने के भी आरोप लगे। यात्रियों ने आरोप लगाए कि उनसे रुपये तो लिए गए मगर टिकट नहीं दी गई।
चालक भर्ती के लिए बेरोजगारों की भीड़ उमड़ी। पहले दो दिन रोडवेज वर्कशॉप में भर्ती प्रक्रिया हुई। भीड़ ज्यादा आने और व्यवस्था बिगड़ने पर शनिवार को भर्ती प्रक्रिया पुलिस लाइन में एसडीएम सतीश कुमार, डीएसपी जगत सिंह मोर की देखरेख में करवाई गई। बेरोजगारों की भीड़ टेस्ट के लिए उमड़ी। करीब 89 ने टेस्ट दिया। जिनमें से 42 ही पास हुए। अनेक अभ्यार्थियों ने आरोप लगाए कि सहीं बस चलाकर दिखाई, फिर भी छोटी-छोटी खामियां बताकर बाहर कर दिया गया। कुछ ने सिफारिश भर्ती करने के भी आरोप लगाए।
720 निजी बसों को परमिट दिए जाने के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को 12वें दिन भी चली। रोडवेज कर्मचारी शहर में प्रदर्शन कर रोष जताते रहे और बस स्टैंड पर ठेके पर लगे चालकों और कंडक्टर बने होमगार्ड के जवान के सहारे रोडवेज बसें दौड़ती रही।
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वहीं, रोडवेज प्रबंधन के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। यह है नए चालकों को दूसरे राज्यों के रास्ते की जानकारी नहीं होना। इस कारण शनिवार सुबह चंडीगढ़ के लिए रवाना हुई बस जींद से वापस बुलानी पड़ी। पिछले 12 दिनों से लंबे रूट की बस सेवा प्रभावित है। डीआई जयकिशन ने बताया कि अभी लोकल रूटों पर बसें चल रही है, लंबे रूट पर अभी बसें नहीं चलाई जा रही। नए भर्ती हुए चालकों को दूसरे राज्यों के मार्गों की पूरी जानकारी नहीं है। जिस कारण समस्या आ रही है।
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कंडक्टर बन रहा चालक तो चालक बन रहा कंडक्टर, यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़
हांसी गई रोडवेज बस में खुलेआम यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा था। सवारियों से भरी बस में कभी कंडक्टर चालक बन रहा था तो चालक कंडक्टर। यात्रियों के भी समझ नहीं आ रहा था कि इनमें असल चालक कौन है और कंडक्टर कौन। इसके अलावा टिकट नहीं देने के भी आरोप लगे। यात्रियों ने आरोप लगाए कि उनसे रुपये तो लिए गए मगर टिकट नहीं दी गई।
चालक भर्ती के लिए बेरोजगारों की भीड़ उमड़ी। पहले दो दिन रोडवेज वर्कशॉप में भर्ती प्रक्रिया हुई। भीड़ ज्यादा आने और व्यवस्था बिगड़ने पर शनिवार को भर्ती प्रक्रिया पुलिस लाइन में एसडीएम सतीश कुमार, डीएसपी जगत सिंह मोर की देखरेख में करवाई गई। बेरोजगारों की भीड़ टेस्ट के लिए उमड़ी। करीब 89 ने टेस्ट दिया। जिनमें से 42 ही पास हुए। अनेक अभ्यार्थियों ने आरोप लगाए कि सहीं बस चलाकर दिखाई, फिर भी छोटी-छोटी खामियां बताकर बाहर कर दिया गया। कुछ ने सिफारिश भर्ती करने के भी आरोप लगाए।