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सामान्य अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को रेफर करने की जांच के लिए चिकित्सकों की कमेटी गठित
Updated Fri, 06 Jul 2018 01:40 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। सामान्य अस्पताल में पांच महिला विशेषज्ञ, चार अनेस्थेसिया एक्सपर्ट, ब्लड बैंक, फिर भी गर्भवती महिलाओं को पीजीआई रेफर किया जा रहा है। यह हो रहा है सामान्य अस्पताल में। परिजन पीजीआई ले जाने की बजाए शहर के ही निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। जहां ऑपरेशन से डिलीवरी हो जाती हैं। ऐसे में मरीजों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सामान्य अस्पताल के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली भी शक के दायरे में है। कयास यहां तक लगाए जा रहे हैं कि कुछ कर्मचारियों की निजी अस्पताल संचालकों के साथ साठ-गांठ हो सकती है। इन सबको रोकने के लिए अब सिविल सर्जन ने दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। जो रेफर होने वाले प्रत्येक केस की पूरी जानकारी लेगी ताकि कोई भी गलत तरीके से रेफर ना किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग के प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा डिलीवरी सरकारी अस्पतालों, सीएचसी या डिलीवरी हट में हों। इसके लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के साथ-साथ जागरूकता अभियान, सरकारी केंद्रों पर डिलीवरी कराने पर आर्थिक सहयोग का भी प्रावधान है। मगर सामान्य अस्पताल में ही मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देर शाम या रात के केसों में से ज्यादा को रेफर कर दिया जाता है। स्टाफ सदस्य भले ही पीजीआई रोहतक रेफर करें, मगर ऐसी हालत में परिजन प्राइवेट अस्पतालों में ले जाना बेहतर समझते हैं। प्राइवेट अस्पतालों में तुरंत मरीज का ऑपरेशन कर देते हैं। ऐसे में मरीज के परिजनों को काफी आर्थिक बोझ झेलना पड़ता है जबकि सामान्य अस्पताल में ये सभी सुविधा नि:शुल्क होती है।
अब व्यवस्था की बात की जाए तो सामान्य अस्पताल में पांच महिला रोग विशेषज्ञ हैं। अनेस्थेसिया के चार डॉक्टर हैं। दो डॉक्टर नियमित और दो प्राइवेट के साथ अनुबंधित हैं। इसके अलावा रक्त की जरूरत को पूरा करने के लिए ब्लड बैंक है। इसके बावजूद केस रेफर किया जाना स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को भी समझ नहीं आ रहा है। इस पर रोक के लिए अब रेफर किए जाने वाले केसों की जांच करवाई जाएगी। इसके लिए दो सदस्यीय चिकित्सक कमेटी का गठन किया है जिसमें डीएमएस डॉ. विवेक गैरा और एनआरसी इंचार्ज डॉ. अदिती शामिल हैं। ये दो सदस्यीय टीम प्रत्येक सप्ताह रेफर होने वाले केसों की रिपोर्ट सिविल सर्जन को देगी। सामान्य अस्पताल में वैसे तो डिलीवरी भी खूब हो रही है। औसतन हर माह करीब 300 डिलीवरी हो रही हैं। जून माह में 77 सिजेरियन केस रहे। इसके बावजूद मरीजों का रेफर किया जाना सभी को खटक रहा है।
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कब कितने केस हुए रेफर
माह रेफर केस
मई 22
जून 23
वर्जन
हमारा प्रयास है कि सुरक्षित डिलीवरी हो और ज्यादा से ज्यादा डिलीवरी सामान्य अस्पताल में हों। महिलाओं को रेफर किए जाने का मामला उनके संज्ञान में है। इसके लिए एक निगरानी कमेटी बनाई गई है, जो रेफर केसों की जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी। हमारे पास महिला रोग विशेषज्ञ है, अनेस्थेटिया विशेषज्ञ है। ब्लड बैंक भी है। इन सबके बावजूद किसी ठोस कारण के बिना अगर मरीज को रेफर किया जाता है तो वह गलत है। ऐसा करने पर कर्मचारी पर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
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भिवानी। सामान्य अस्पताल में पांच महिला विशेषज्ञ, चार अनेस्थेसिया एक्सपर्ट, ब्लड बैंक, फिर भी गर्भवती महिलाओं को पीजीआई रेफर किया जा रहा है। यह हो रहा है सामान्य अस्पताल में। परिजन पीजीआई ले जाने की बजाए शहर के ही निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। जहां ऑपरेशन से डिलीवरी हो जाती हैं। ऐसे में मरीजों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सामान्य अस्पताल के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली भी शक के दायरे में है। कयास यहां तक लगाए जा रहे हैं कि कुछ कर्मचारियों की निजी अस्पताल संचालकों के साथ साठ-गांठ हो सकती है। इन सबको रोकने के लिए अब सिविल सर्जन ने दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। जो रेफर होने वाले प्रत्येक केस की पूरी जानकारी लेगी ताकि कोई भी गलत तरीके से रेफर ना किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग के प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा डिलीवरी सरकारी अस्पतालों, सीएचसी या डिलीवरी हट में हों। इसके लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के साथ-साथ जागरूकता अभियान, सरकारी केंद्रों पर डिलीवरी कराने पर आर्थिक सहयोग का भी प्रावधान है। मगर सामान्य अस्पताल में ही मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देर शाम या रात के केसों में से ज्यादा को रेफर कर दिया जाता है। स्टाफ सदस्य भले ही पीजीआई रोहतक रेफर करें, मगर ऐसी हालत में परिजन प्राइवेट अस्पतालों में ले जाना बेहतर समझते हैं। प्राइवेट अस्पतालों में तुरंत मरीज का ऑपरेशन कर देते हैं। ऐसे में मरीज के परिजनों को काफी आर्थिक बोझ झेलना पड़ता है जबकि सामान्य अस्पताल में ये सभी सुविधा नि:शुल्क होती है।
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अब व्यवस्था की बात की जाए तो सामान्य अस्पताल में पांच महिला रोग विशेषज्ञ हैं। अनेस्थेसिया के चार डॉक्टर हैं। दो डॉक्टर नियमित और दो प्राइवेट के साथ अनुबंधित हैं। इसके अलावा रक्त की जरूरत को पूरा करने के लिए ब्लड बैंक है। इसके बावजूद केस रेफर किया जाना स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को भी समझ नहीं आ रहा है। इस पर रोक के लिए अब रेफर किए जाने वाले केसों की जांच करवाई जाएगी। इसके लिए दो सदस्यीय चिकित्सक कमेटी का गठन किया है जिसमें डीएमएस डॉ. विवेक गैरा और एनआरसी इंचार्ज डॉ. अदिती शामिल हैं। ये दो सदस्यीय टीम प्रत्येक सप्ताह रेफर होने वाले केसों की रिपोर्ट सिविल सर्जन को देगी। सामान्य अस्पताल में वैसे तो डिलीवरी भी खूब हो रही है। औसतन हर माह करीब 300 डिलीवरी हो रही हैं। जून माह में 77 सिजेरियन केस रहे। इसके बावजूद मरीजों का रेफर किया जाना सभी को खटक रहा है।
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कब कितने केस हुए रेफर
माह रेफर केस
मई 22
जून 23
वर्जन
हमारा प्रयास है कि सुरक्षित डिलीवरी हो और ज्यादा से ज्यादा डिलीवरी सामान्य अस्पताल में हों। महिलाओं को रेफर किए जाने का मामला उनके संज्ञान में है। इसके लिए एक निगरानी कमेटी बनाई गई है, जो रेफर केसों की जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी। हमारे पास महिला रोग विशेषज्ञ है, अनेस्थेटिया विशेषज्ञ है। ब्लड बैंक भी है। इन सबके बावजूद किसी ठोस कारण के बिना अगर मरीज को रेफर किया जाता है तो वह गलत है। ऐसा करने पर कर्मचारी पर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन