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Bhiwani News: नौ माह में जिले में मिले 138 एचआईवी पॉजिटिव, पांच सूई से हुए संक्रमित
Tue, 30 Dec 2025 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 30 Dec 2025 12:09 AM IST
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जिला नागरिक अस्पताल में स्थित ओपीडी ब्लॉक। संवाद
भिवानी। जिले में एचआईवी संक्रमित मरीजों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से दिसंबर तक जिले में 138 एचआईवी पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से पांच मरीज सूई से फैले संक्रमण से प्रभावित पाए गए हैं। एचआईवी संक्रमितों की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि यह संक्रमण असुरक्षित यौन संबंधों के साथ-साथ संक्रमित इंजेक्शन की सूई से भी फैल सकता है।
वहीं शरीर में इसके लक्षण देर से दिखाई देते हैं जिससे समय पर बीमारी की पहचान नहीं हो पाती। मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति के शरीर में एचआईवी के लक्षण सामने आने में पांच साल से अधिक का समय भी लग सकता है। ऐसे में मरीज को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चल पाता कि वह एचआईवी संक्रमित है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि पश्चिमी सभ्यता की अंधाधुंध चकाचौंध में फंसकर युवा पीढ़ी भी एचआईवी की चपेट में आ रही है। आधुनिक जीवनशैली के नाम पर संस्कारों को भुलाकर अनैतिकता की ओर बढ़ना युवाओं को एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी की ओर धकेल रहा है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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एचआईवी विभाग प्रभारी डॉ. विकास ने बताया कि एड्स कई कारणों से फैल सकता है। इनमें मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई का उपयोग और संक्रमित रक्त का आदान-प्रदान शामिल है। उन्होंने कहा कि समय पर जागरूकता, शिक्षा, एचआईवी परीक्षण, स्वच्छ सुई का उपयोग और सुरक्षित यौन संबंध अपनाकर इस बीमारी से बचाव संभव है। उन्होंने बताया कि फिलहाल जिले में 138 संक्रमित मरीज हैं और सभी का नियमित इलाज चल रहा है। जिले में आईसीटीसी केंद्र, एफआईसीटीसी केंद्र और एआरटी केंद्र स्थापित हैं जहां जांच से लेकर उपचार तक की पूरी सुविधा उपलब्ध है।
फोटो : 21
ये हैं एचआईवी के लक्षण
डॉ. विकास ने बताया कि एचआईवी के लक्षण शरीर में दिखाई देने में छह माह से लेकर पांच साल तक का समय भी लग सकता है। मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति में लक्षण देर से उभरते हैं जबकि कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले शरीर में भी लक्षण सामने आने में करीब छह माह का समय लग सकता है। इसी कारण समय पर बीमारी का पता नहीं चल पाता। उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में मरीज के शरीर में सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं, जिन्हें लोग मामूली वायरल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इनमें बुखार, थकान, गले में खराश, नाक बहना, दस्त और वजन कम होना शामिल है। ये लक्षण आम फ्लू जैसे होते हैं और ठीक हो जाने पर लोग जांच नहीं कराते। एचआईवी के दूसरे चरण में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यदि संक्रमण लंबे समय तक शरीर में बना रहे तो यह एड्स का रूप ले लेता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर हो जाती है और व्यक्ति कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति भी संवेदनशील हो जाता है।
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वहीं शरीर में इसके लक्षण देर से दिखाई देते हैं जिससे समय पर बीमारी की पहचान नहीं हो पाती। मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति के शरीर में एचआईवी के लक्षण सामने आने में पांच साल से अधिक का समय भी लग सकता है। ऐसे में मरीज को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चल पाता कि वह एचआईवी संक्रमित है।
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स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि पश्चिमी सभ्यता की अंधाधुंध चकाचौंध में फंसकर युवा पीढ़ी भी एचआईवी की चपेट में आ रही है। आधुनिक जीवनशैली के नाम पर संस्कारों को भुलाकर अनैतिकता की ओर बढ़ना युवाओं को एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी की ओर धकेल रहा है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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एचआईवी विभाग प्रभारी डॉ. विकास ने बताया कि एड्स कई कारणों से फैल सकता है। इनमें मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई का उपयोग और संक्रमित रक्त का आदान-प्रदान शामिल है। उन्होंने कहा कि समय पर जागरूकता, शिक्षा, एचआईवी परीक्षण, स्वच्छ सुई का उपयोग और सुरक्षित यौन संबंध अपनाकर इस बीमारी से बचाव संभव है। उन्होंने बताया कि फिलहाल जिले में 138 संक्रमित मरीज हैं और सभी का नियमित इलाज चल रहा है। जिले में आईसीटीसी केंद्र, एफआईसीटीसी केंद्र और एआरटी केंद्र स्थापित हैं जहां जांच से लेकर उपचार तक की पूरी सुविधा उपलब्ध है।
फोटो : 21
ये हैं एचआईवी के लक्षण
डॉ. विकास ने बताया कि एचआईवी के लक्षण शरीर में दिखाई देने में छह माह से लेकर पांच साल तक का समय भी लग सकता है। मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति में लक्षण देर से उभरते हैं जबकि कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले शरीर में भी लक्षण सामने आने में करीब छह माह का समय लग सकता है। इसी कारण समय पर बीमारी का पता नहीं चल पाता। उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में मरीज के शरीर में सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं, जिन्हें लोग मामूली वायरल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इनमें बुखार, थकान, गले में खराश, नाक बहना, दस्त और वजन कम होना शामिल है। ये लक्षण आम फ्लू जैसे होते हैं और ठीक हो जाने पर लोग जांच नहीं कराते। एचआईवी के दूसरे चरण में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यदि संक्रमण लंबे समय तक शरीर में बना रहे तो यह एड्स का रूप ले लेता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर हो जाती है और व्यक्ति कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति भी संवेदनशील हो जाता है।