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बहल में ओलावृष्टि, आधा दर्जन गांवों में फसली नुकसान
Updated Wed, 24 Jan 2018 12:44 AM IST
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बहल। किसानों को आखिर जिस बात का डर था, वो सच साबित हुई। बहल क्षेत्र के दर्जनभर गांवों में मंगलवार शाम को ओलावृष्टि ने जमकर कहर ढाया। ओलों की मार से खेतों में खड़ी फसलें बिछ गई तथा जिन फसलों में फलियां लगी थी, वो टूट कर बिखर गई।
क्षेत्र के गांव चैहड़ कलां, खुर्द, सिरसी, बिधनोई, सेरला, नूनसर, ओबरा सहित अन्य गांवों में मंगलवार शाम को जमकर ओलावृष्टि हुई। दो से तीन मिनट की ओलावृष्टि में फसलों में भारी नुकसान हुआ है। खासकर सरसों, चना एवं गेहूं की फसल ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है। इसके अलावा मेथी तथा अन्य फसलों के अलावा सब्जियों में भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि के बाद जहां कुछ समय पहले हरियाली नजर आ रही थी, वहां ओलों की सफेद चादर बिछ गई। गेहूं की बालियां टूट कर गिर गई तथा सरसों की फसल की फलियां बिखर गई। इसके अलावा प्याज, टमाटर, तरबूज, ककड़ी समेत अन्य सब्जियों की फसल तबाह हो गई है।
मंगलवार सुबह से मौसम का मिजाज बदल गया था। सुबह करीब सात बजे आसमान में घने बादल छा गए तथा घनघोर गर्जना शुरू हो गई थी। पूर्वानुमान के अनुसार, किसानों का दिल बैठे जा रहा था। लेकिन, दिन भर मौसम साफ रहा और धूप खिलने से कुछ राहत महसूस हुई। पर, शाम के करीब साढ़े छह बजे आसमान के फिर बादल छा गए। शुरूआत में तेज हवाओं के साथ बारिश आई लेकिन इसके बाद जमकर ओलावृष्टि हुई। किसानों के अरमानों पर पानी फेरते हुए ओलावृष्टि से अच्छी फसल की उम्मीद धराशायी हो गई। किसान दलबीर चैहड़ कलां ने बताया कि जिस समय ओलावृष्टि हुई उस समय वह अपने खेत में था। देखते ही देखते ओलावृष्टि ने फसलों को बर्बाद कर दिया।
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किसान सभा ने कहा कि तत्काल हो प्रभावित फसलों की गिरदावरी
जिन क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई है वहां किसान परिवारों का चूल्हा भी नहीं जल सका है। भारी ओलावृष्टि से पकने के कगार पर खड़ी फसलों में उत्पादन गिरने की आशंका बन गई है। अखिल भारतीय किसान सभा ने क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि पर गहरी चिंता जताई तथा प्रशासन से किसानों को तुरंत प्रभाव से रिलीफ देने की मांग की। सभा के प्रदेश सचिव दयानंद पूनिया ने कहा कि सरकार अविलंब गिरदावरी कराने के आदेश जारी करें तथा प्रभावित किसानों को मुआवजा दें।
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क्षेत्र के गांव चैहड़ कलां, खुर्द, सिरसी, बिधनोई, सेरला, नूनसर, ओबरा सहित अन्य गांवों में मंगलवार शाम को जमकर ओलावृष्टि हुई। दो से तीन मिनट की ओलावृष्टि में फसलों में भारी नुकसान हुआ है। खासकर सरसों, चना एवं गेहूं की फसल ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है। इसके अलावा मेथी तथा अन्य फसलों के अलावा सब्जियों में भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि के बाद जहां कुछ समय पहले हरियाली नजर आ रही थी, वहां ओलों की सफेद चादर बिछ गई। गेहूं की बालियां टूट कर गिर गई तथा सरसों की फसल की फलियां बिखर गई। इसके अलावा प्याज, टमाटर, तरबूज, ककड़ी समेत अन्य सब्जियों की फसल तबाह हो गई है।
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मंगलवार सुबह से मौसम का मिजाज बदल गया था। सुबह करीब सात बजे आसमान में घने बादल छा गए तथा घनघोर गर्जना शुरू हो गई थी। पूर्वानुमान के अनुसार, किसानों का दिल बैठे जा रहा था। लेकिन, दिन भर मौसम साफ रहा और धूप खिलने से कुछ राहत महसूस हुई। पर, शाम के करीब साढ़े छह बजे आसमान के फिर बादल छा गए। शुरूआत में तेज हवाओं के साथ बारिश आई लेकिन इसके बाद जमकर ओलावृष्टि हुई। किसानों के अरमानों पर पानी फेरते हुए ओलावृष्टि से अच्छी फसल की उम्मीद धराशायी हो गई। किसान दलबीर चैहड़ कलां ने बताया कि जिस समय ओलावृष्टि हुई उस समय वह अपने खेत में था। देखते ही देखते ओलावृष्टि ने फसलों को बर्बाद कर दिया।
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किसान सभा ने कहा कि तत्काल हो प्रभावित फसलों की गिरदावरी
जिन क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई है वहां किसान परिवारों का चूल्हा भी नहीं जल सका है। भारी ओलावृष्टि से पकने के कगार पर खड़ी फसलों में उत्पादन गिरने की आशंका बन गई है। अखिल भारतीय किसान सभा ने क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि पर गहरी चिंता जताई तथा प्रशासन से किसानों को तुरंत प्रभाव से रिलीफ देने की मांग की। सभा के प्रदेश सचिव दयानंद पूनिया ने कहा कि सरकार अविलंब गिरदावरी कराने के आदेश जारी करें तथा प्रभावित किसानों को मुआवजा दें।