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कैसे सुधरेगी रैंकिंग: बाहरी कॉलोनियों में स्वच्छता को ग्रहण
Updated Sat, 09 Dec 2017 12:46 AM IST
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बाहरी कॉलोनियों में कचरे का अंबार, कैसे रैंकिंग में होगा सुधार
भिवानी। दो साल पहले सर्वे में देश का चौथा सबसे गंदा शहर का कलंक क्या इस बार हट पाएगा? इस बार रैंकिंग में सुधार के लिए जिला प्रशासन ने इस दफा निश्चित रूप से अपना होमवर्क शुरू कर दिया, लेकिन शहर की बाहरी बस्तियों की साफ-सफाई के लिए बहुत मेहनत करनी होगी, तब कहीं जाकर रैंकिंग में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
चार जनवरी 2018 से आरंभ होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां आरंभ कर दी हैं। शहर की अंदरूनी कॉलोनियों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना आरंभ होने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर आई है। लेकिन शहर से सटी इन कॉलोनियों में अब स्वच्छता को ग्रहण लगा है। लगभग आधा दर्जन इन कॉलोनियों की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इनमें न तो डस्टबिन हैं और न ही नियमित रूप से कचरे का उठान हो पा रहा है। यदि इन कॉलोनियों की सफाई व्यवस्था पर फौरन ध्यान नहीं दिया तो रैंकिंग सुधार की आस धूमिल हो सकती है। अमर उजाला ने इन कॉलोनियों की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया।
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ये कॉलोनियों तोड़ सकती हैं रैंकिंग सुधार का ख्वाब
अंबेडकर कॉलोनी: 15 से 20 हजार की आबादी वाली इस कॉलोनी में डस्टबिन तो कहीं दिखे नहीं, लेकिन कूड़े-कचरे के ढेर हर जगह मिले। गंदगी के पड़े ढेर नियमित सफाई की पोल खोल रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि डस्टबिन हों तो कम से कम कूड़ा इधर-उधर तो नहीं बिखरेगा। इस बारे में कई बार प्रशासन से अनुरोध किया जा चुका है, लेकिन कोई हल नहीं निकला। नगर पार्षद प्रवीण मास्टर का कहना है कि इलाके की गलियां कच्ची हैं और ऊपर से सफाई नहीं हो रही है। इसलिए, हालात खराब हैं। नाला अवरुद्ध होने की वजह से गंदे पानी की निकासी भी नहीं हो पाती।
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आजाद नगर : बंसीलाल पार्क से सटा है आजाद नगर। सफाई व्यवस्था देखकर लगता नहीं कि आजाद नगर शहर का हिस्सा है। करीब 50 मीटर लंबी पक्की सड़क कूड़ेघर में तबदील हो गई है। लोग बताते हैं कि यह सड़क हुडा विभाग की है। नियमित सफाई और डस्टबिन के अभाव में लोगों ने इस पूरी सड़क पर कूड़ा डालना शुरू किया। अब इस पर कूड़े का अंबार लगा है। बिजली विभाग से रिटायर्ड कर्मचारी सज्जन कुमार व कमल बापोडिया ने बताया कि कूड़े के ढेर से उठने वाली दुर्गंध ने आसपास के बाशिंदों के अलावा पार्क में आने वाले लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया। पार्क की दूसरी ओर बसी कॉलोनी में एक डस्टबीन नजर आया, लेकिन वह उठान न होने से कूड़े से ओवरफ्लो मिला।
वार्ड नंबर 14 में भी सफाई व्यवस्था बेपटरी है। यहां भी न तो नियमित कचरे के उठान का कोई इंतजाम है और न ही डस्टबिन हैं। वार्ड की पिपली वाली जोहड़ी इलाके में बसी है महाराज दक्ष कॉलोनी के लोगों ने खाली पड़े प्लाट को डस्टबिन बना लिया। आसपास बसने वाले इस जमीन पर आकर कूड़ा डालते हैं। गंदगी की दुर्गंध कालोनी के लोगों के साथ-साथ आने-जाने वालों को परेशान करती है।
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बाहरी कॉलोनियों की सफाई व्यवस्था जल्द पटरी पर नजर आएगी। परिषद ने बाहरी कॉलोनियों में घर-घर कूड़ा उठान के लिए टेंडर अलॉट कर दिया है। बहुत जल्द काम शुरू हो जाएगा। परिषद का प्रयास रहेगा कि इस बार देश के सौ साफ सुथरे शहरों की सूची में भिवानी का नाम आए।
- रणसिंह यादव, चेयरमैन, नगर परिषद
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भिवानी। दो साल पहले सर्वे में देश का चौथा सबसे गंदा शहर का कलंक क्या इस बार हट पाएगा? इस बार रैंकिंग में सुधार के लिए जिला प्रशासन ने इस दफा निश्चित रूप से अपना होमवर्क शुरू कर दिया, लेकिन शहर की बाहरी बस्तियों की साफ-सफाई के लिए बहुत मेहनत करनी होगी, तब कहीं जाकर रैंकिंग में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
चार जनवरी 2018 से आरंभ होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां आरंभ कर दी हैं। शहर की अंदरूनी कॉलोनियों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना आरंभ होने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर आई है। लेकिन शहर से सटी इन कॉलोनियों में अब स्वच्छता को ग्रहण लगा है। लगभग आधा दर्जन इन कॉलोनियों की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इनमें न तो डस्टबिन हैं और न ही नियमित रूप से कचरे का उठान हो पा रहा है। यदि इन कॉलोनियों की सफाई व्यवस्था पर फौरन ध्यान नहीं दिया तो रैंकिंग सुधार की आस धूमिल हो सकती है। अमर उजाला ने इन कॉलोनियों की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया।
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ये कॉलोनियों तोड़ सकती हैं रैंकिंग सुधार का ख्वाब
अंबेडकर कॉलोनी: 15 से 20 हजार की आबादी वाली इस कॉलोनी में डस्टबिन तो कहीं दिखे नहीं, लेकिन कूड़े-कचरे के ढेर हर जगह मिले। गंदगी के पड़े ढेर नियमित सफाई की पोल खोल रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि डस्टबिन हों तो कम से कम कूड़ा इधर-उधर तो नहीं बिखरेगा। इस बारे में कई बार प्रशासन से अनुरोध किया जा चुका है, लेकिन कोई हल नहीं निकला। नगर पार्षद प्रवीण मास्टर का कहना है कि इलाके की गलियां कच्ची हैं और ऊपर से सफाई नहीं हो रही है। इसलिए, हालात खराब हैं। नाला अवरुद्ध होने की वजह से गंदे पानी की निकासी भी नहीं हो पाती।
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आजाद नगर : बंसीलाल पार्क से सटा है आजाद नगर। सफाई व्यवस्था देखकर लगता नहीं कि आजाद नगर शहर का हिस्सा है। करीब 50 मीटर लंबी पक्की सड़क कूड़ेघर में तबदील हो गई है। लोग बताते हैं कि यह सड़क हुडा विभाग की है। नियमित सफाई और डस्टबिन के अभाव में लोगों ने इस पूरी सड़क पर कूड़ा डालना शुरू किया। अब इस पर कूड़े का अंबार लगा है। बिजली विभाग से रिटायर्ड कर्मचारी सज्जन कुमार व कमल बापोडिया ने बताया कि कूड़े के ढेर से उठने वाली दुर्गंध ने आसपास के बाशिंदों के अलावा पार्क में आने वाले लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया। पार्क की दूसरी ओर बसी कॉलोनी में एक डस्टबीन नजर आया, लेकिन वह उठान न होने से कूड़े से ओवरफ्लो मिला।
वार्ड नंबर 14 में भी सफाई व्यवस्था बेपटरी है। यहां भी न तो नियमित कचरे के उठान का कोई इंतजाम है और न ही डस्टबिन हैं। वार्ड की पिपली वाली जोहड़ी इलाके में बसी है महाराज दक्ष कॉलोनी के लोगों ने खाली पड़े प्लाट को डस्टबिन बना लिया। आसपास बसने वाले इस जमीन पर आकर कूड़ा डालते हैं। गंदगी की दुर्गंध कालोनी के लोगों के साथ-साथ आने-जाने वालों को परेशान करती है।
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बाहरी कॉलोनियों की सफाई व्यवस्था जल्द पटरी पर नजर आएगी। परिषद ने बाहरी कॉलोनियों में घर-घर कूड़ा उठान के लिए टेंडर अलॉट कर दिया है। बहुत जल्द काम शुरू हो जाएगा। परिषद का प्रयास रहेगा कि इस बार देश के सौ साफ सुथरे शहरों की सूची में भिवानी का नाम आए।
- रणसिंह यादव, चेयरमैन, नगर परिषद