{"_id":"4e550b15268e071e075f5f47e8a24a37","slug":"another-chargsheet-against-ias-officer-khemka","type":"story","status":"publish","title_hn":"गेहूं बीज की कम बिक्री पर खेमका को चार्जशीट जारी होगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गेहूं बीज की कम बिक्री पर खेमका को चार्जशीट जारी होगी
चंडीगढ़/अमर उजाला
Updated Fri, 18 Oct 2013 01:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आखिरकार मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सीनियर आईएएस अशोक खेमका को 22 करोड़ रुपये की लागत का करीब 87000 क्विंटल गेहूं बीज कम बेचने के कारण चार्जशीट करने की मंजूरी दी है। अमर उजाला ने इस मामले की जानकारी गत 20 सितंबर को दे दी थी।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एसएस ढिल्लों ने वीरवार को बताया कि मुख्य सचिव कार्यालय से खेमका को चार्जशीट करने की सिफारिश मुख्यमंत्री के पास पहुंची थी, जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी। खेमका के खिलाफ बदले की भावना से कोई काम नहीं किया जा रहा है बल्कि यह विशुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई है।
ढिल्लों ने बताया कि मुख्य सचिव की तरफ से यह मामला पहले भी मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा था, तब मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि गेहूं का बीज कम बेचने के तथ्यों की जांच दोबारा की जाए।
विज्ञापन
मुख्य सचिव कार्यालय ने खेमका से दो बार टिप्पणियां मांगी थी जिन पर विभाग ने जांच कराई। कृषि विभाग ने जांच में पाया कि बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक पद पर अशोक खेमका के कार्यकाल में करीब 87000 क्विंटल गेहूं का बीज कम बिका। इससे 22 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
खेमका से पहले तीन साल लगातार गेहूं का बीज लगभग 100 फीसदी बिकता रहा है। सीएम के प्रधान सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय के बीच किसी भी प्रकार का विरोधाभास नहीं है।
मुख्य सचिव कार्यालय ने पूरे तथ्य देखने के बाद चार्जशीट करने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि जो अफसर जिस पद पर रहते हुए गलत काम करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई करना रूटीन का काम है।
खेमका को चकबंदी मामले में अलग से चार्जशीट करने का फैसला हो रखा है।
गत 23 मार्च को लगा था यह आरोप
कृषि विभाग के प्रधान सचिव रोशन लाल सैनी ने गत 23 मार्च को हरियाणा निवास में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि खेमका के कार्यकाल में गेहूं का करीब 87000 क्विंटल उपचारित बीज कम बेचा गया।
बीज बेचने का काम हरियाणा बीज विकास निगम का है जिसके एमडी अशोक खेमका हैं। निगम के निदेशक मंडल ने फैसला किया है कि इतना बीज न बिकने के लिए जिम्मेवारी 15 दिन में तय की जाए। जिसमें खेमका से लेकर नीचे तक सभी मुलाजिम शामिल होते हैं।
जिम्मेवार अफसर या मुलाजिम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बीज की बिक्री न होने से लाखों रुपये का नुकसान निगम को हुआ था। कृषि मंत्री परमवीर सिंह ने भी निगम से स्पष्टीकरण मांगा था।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एसएस ढिल्लों ने वीरवार को बताया कि मुख्य सचिव कार्यालय से खेमका को चार्जशीट करने की सिफारिश मुख्यमंत्री के पास पहुंची थी, जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी। खेमका के खिलाफ बदले की भावना से कोई काम नहीं किया जा रहा है बल्कि यह विशुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई है।
विज्ञापन
ढिल्लों ने बताया कि मुख्य सचिव की तरफ से यह मामला पहले भी मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा था, तब मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि गेहूं का बीज कम बेचने के तथ्यों की जांच दोबारा की जाए।
विज्ञापन
मुख्य सचिव कार्यालय ने खेमका से दो बार टिप्पणियां मांगी थी जिन पर विभाग ने जांच कराई। कृषि विभाग ने जांच में पाया कि बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक पद पर अशोक खेमका के कार्यकाल में करीब 87000 क्विंटल गेहूं का बीज कम बिका। इससे 22 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
खेमका से पहले तीन साल लगातार गेहूं का बीज लगभग 100 फीसदी बिकता रहा है। सीएम के प्रधान सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय के बीच किसी भी प्रकार का विरोधाभास नहीं है।
मुख्य सचिव कार्यालय ने पूरे तथ्य देखने के बाद चार्जशीट करने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि जो अफसर जिस पद पर रहते हुए गलत काम करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई करना रूटीन का काम है।
खेमका को चकबंदी मामले में अलग से चार्जशीट करने का फैसला हो रखा है।
गत 23 मार्च को लगा था यह आरोप
कृषि विभाग के प्रधान सचिव रोशन लाल सैनी ने गत 23 मार्च को हरियाणा निवास में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि खेमका के कार्यकाल में गेहूं का करीब 87000 क्विंटल उपचारित बीज कम बेचा गया।
बीज बेचने का काम हरियाणा बीज विकास निगम का है जिसके एमडी अशोक खेमका हैं। निगम के निदेशक मंडल ने फैसला किया है कि इतना बीज न बिकने के लिए जिम्मेवारी 15 दिन में तय की जाए। जिसमें खेमका से लेकर नीचे तक सभी मुलाजिम शामिल होते हैं।
जिम्मेवार अफसर या मुलाजिम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बीज की बिक्री न होने से लाखों रुपये का नुकसान निगम को हुआ था। कृषि मंत्री परमवीर सिंह ने भी निगम से स्पष्टीकरण मांगा था।