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कान्हा के मुख में ब्रह्मांड देख बेहोश हुई यशोदा : आचार्य
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बराड़ा। गांव सीवन माजरा स्थित शिवमंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य रामनारायण शास्त्री ने पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का किया। उन्होंने कहा कि एक बार भगवान श्री कृष्ण ब्रज की माटी को मुंह में डालते हैं। यह देख बलराम ने मां यशोदा से कहा मां कान्हा ने माटी खाई है। यह सुनते ही मां यशोदा भगवान श्रीकृष्ण को मुंह खोलने को कहती हैं।
जैसे ही श्रीकृष्ण ने अपना मुंह खोला, तो मां यशोदा ने क्या देखती हैं, मुख में सारा ब्रह्मांड जिसमें पर्वत, पहाड़, नदी ,हिमालय, ब्रज की भूमि, स्वयं मां यशोदा और लाला को देख कर मां मूर्छित हो जाती है। इसी तरह से एक बार भगवान अपने सखाओं के साथ वन में भोजन कर रहे थे। तब ब्रह्मा ने कहा कि अगर यह भगवान है तो ग्वाल वालों के साथ ऐसा साधारण बनकर भोजन नहीं कर सकते, नारायण है तो उनकी परीक्षा लेनी चाहिए।
तभी सभी ग्वालों के गाय के बछडों को ब्रह्मा जी अपने ब्रह्मलोक ले गए, उधर भगवान ने भी ऐसी लीला रची की स्वयं गाय के बछड़े ग्वाल के बाल का रूप धारण कर लिया। यह लीला एक वर्ष तक चलती रही। दोबारा ब्रह्मा जी देखने के लिए आए तो देखा वही ग्वाल ,वही सखा, वही बछ़डे़ ब्रह्मलोक में भी हैं और ब्रजमंडल पर भी विचरण कर रहे हैं ।
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ब्रह्मा जी समझ गए की साक्षात परम परमात्मा नारायण ही हो सकते हैं, ऐसी लीला करने वाले भगवान के चरणों में गिर पड़े। भगवान से अपने अपराध की क्षमा याचना की।
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जैसे ही श्रीकृष्ण ने अपना मुंह खोला, तो मां यशोदा ने क्या देखती हैं, मुख में सारा ब्रह्मांड जिसमें पर्वत, पहाड़, नदी ,हिमालय, ब्रज की भूमि, स्वयं मां यशोदा और लाला को देख कर मां मूर्छित हो जाती है। इसी तरह से एक बार भगवान अपने सखाओं के साथ वन में भोजन कर रहे थे। तब ब्रह्मा ने कहा कि अगर यह भगवान है तो ग्वाल वालों के साथ ऐसा साधारण बनकर भोजन नहीं कर सकते, नारायण है तो उनकी परीक्षा लेनी चाहिए।
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तभी सभी ग्वालों के गाय के बछडों को ब्रह्मा जी अपने ब्रह्मलोक ले गए, उधर भगवान ने भी ऐसी लीला रची की स्वयं गाय के बछड़े ग्वाल के बाल का रूप धारण कर लिया। यह लीला एक वर्ष तक चलती रही। दोबारा ब्रह्मा जी देखने के लिए आए तो देखा वही ग्वाल ,वही सखा, वही बछ़डे़ ब्रह्मलोक में भी हैं और ब्रजमंडल पर भी विचरण कर रहे हैं ।
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ब्रह्मा जी समझ गए की साक्षात परम परमात्मा नारायण ही हो सकते हैं, ऐसी लीला करने वाले भगवान के चरणों में गिर पड़े। भगवान से अपने अपराध की क्षमा याचना की।