{"_id":"67fc1d9a7f45b5db100fd2dd","slug":"writers-and-teachers-should-oppose-wrong-things-prof-vikas-ambala-news-c-36-1-amb1003-140831-2025-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"साहित्यकार और शिक्षक गलत बात का करें विरोध : प्रो. विकास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साहित्यकार और शिक्षक गलत बात का करें विरोध : प्रो. विकास
विज्ञापन
शिक्षाविद् प्रोफेसर विकास शर्मा।
- फोटो : पुलिस
अंबाला। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें अंग्रेजी के प्रख्यात उपन्यासकार कवि और शिक्षाविद् प्रोफेसर विकास शर्मा पहुंचे। प्रो. विकास प्रख्यात कवि कुमार विश्वास के बड़े भाई हैं।
उन्होंने कहा कि साहित्यकारों और शिक्षकों का दायित्व है कि वह सत्ता प्रतिष्ठानों की राष्ट्र हित विरोधी बातों को लोकतांत्रिक व सकारात्मक ढंग से प्रस्तुत करें। अगर बुद्धिजीवी भी व्यवस्था का दास हो जाएगा तो राष्ट्र की अस्मिता व अखंडता खतरे में पड़ सकती है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रो. विकास इस बात से व्यथित दिखे कि इतने बड़े लोकतांत्रिक देश में विपक्ष मृतप्राय व कमजोर है। उन्होंने कहा कि सरकारों की राष्ट्र हित की योजनाओं की सराहना करना ठीक है, लेकिन राजनेताओं की हर गलत बात को महाभारत के भीष्म पितामह है व द्रोणाचार्य की तरह मौन होकर देखना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए खतरा है। प्रो. विकास ने अब तक विभिन्न मुद्दों पर 12 से अधिक अंग्रेजी उपन्यास लिखे हैं। उनके उपन्यासों पर 50 से अधिक शोधार्थी पीएचडी का शोध कर रहे हैं। जातिगत जनगणना पर बात करते हुए प्रो. विकास ने कहा कि ऐसा होने से सामाजिक समरसता व सद्भावना को खतरा पैदा होगा और आपसी भाईचारा दाव पर लग जाएगा।
विज्ञापन
फूट डालो वह राज करो की राजनीति को देश के लिए संकट बताते हुए प्रोफेसर विकास ने कहा कि देश में कोई भी राजनेता ऐसा नहीं है कि जिसे युवा पीढ़ी आदर्श मानकर कुछ सीख सके। राजनेता मेज थपथपा कर खुद की सैलरी दोगुना कर लेते हैं लेकिन कर्मचारियों से उनका पुरानी पेंशन तक का हक छीन लेते हैं। विश्वविद्यालय में व्यापक भ्रष्टाचार पर भी प्रो. विकास खुलकर बोले।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि साहित्यकारों और शिक्षकों का दायित्व है कि वह सत्ता प्रतिष्ठानों की राष्ट्र हित विरोधी बातों को लोकतांत्रिक व सकारात्मक ढंग से प्रस्तुत करें। अगर बुद्धिजीवी भी व्यवस्था का दास हो जाएगा तो राष्ट्र की अस्मिता व अखंडता खतरे में पड़ सकती है।
विज्ञापन
पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रो. विकास इस बात से व्यथित दिखे कि इतने बड़े लोकतांत्रिक देश में विपक्ष मृतप्राय व कमजोर है। उन्होंने कहा कि सरकारों की राष्ट्र हित की योजनाओं की सराहना करना ठीक है, लेकिन राजनेताओं की हर गलत बात को महाभारत के भीष्म पितामह है व द्रोणाचार्य की तरह मौन होकर देखना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए खतरा है। प्रो. विकास ने अब तक विभिन्न मुद्दों पर 12 से अधिक अंग्रेजी उपन्यास लिखे हैं। उनके उपन्यासों पर 50 से अधिक शोधार्थी पीएचडी का शोध कर रहे हैं। जातिगत जनगणना पर बात करते हुए प्रो. विकास ने कहा कि ऐसा होने से सामाजिक समरसता व सद्भावना को खतरा पैदा होगा और आपसी भाईचारा दाव पर लग जाएगा।
विज्ञापन
फूट डालो वह राज करो की राजनीति को देश के लिए संकट बताते हुए प्रोफेसर विकास ने कहा कि देश में कोई भी राजनेता ऐसा नहीं है कि जिसे युवा पीढ़ी आदर्श मानकर कुछ सीख सके। राजनेता मेज थपथपा कर खुद की सैलरी दोगुना कर लेते हैं लेकिन कर्मचारियों से उनका पुरानी पेंशन तक का हक छीन लेते हैं। विश्वविद्यालय में व्यापक भ्रष्टाचार पर भी प्रो. विकास खुलकर बोले।