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बरसात से खिले किसानों के मुरझाए चेहरे
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बराड़ा। बारिश से किसानों के मुरझाए चेहरे पर रौनक लौट आई है। पिछले दस दिनों तक उमस और गर्मी के साथ-साथ धूप से जनजीवन बेहाल हो गया था। वहीं, बारिश के अभाव में किसानों की फसल और नर्सरी सूखने के कगार पर पहुंच गई थी। वीरवार सुबह बरसात होने से इलाके के किसान धान रोपाई में लग गए हैं।
किसान राजेंद्र सिंह, राजकुमार सिंह, नारायण सिंह व जगदीश सिंह आदि ने बताया कि किसान ट्यूबवेल के सहारे सिंचाई कर फसल को सूखने से बचाने की जुगत में लगे हुए थे। इसके अलावा कुछ किसान धान रोपाई के लिए बरसात का इंतजार कर रहे थे। वीरवार को बरसात होते ही धान रोपाई के कार्य में भी तेजी आई है। साथ ही अन्य फसलों में भी हरियाली छा गई है। उन्होंने बताया कि किसान का जीवन मौसम पर ही निर्भर करता है। किसान के पास पर्याप्त सिंचाई के साधन हो या न हो, बरसात का इंतजार सभी किसानों को रहता है। बरसात के बिना अच्छी फसल की उम्मीद नहीं की जा सकती।
धान रोपाई के दौरान यदि मौसम ने साथ दिया और बरसात हुई तो अच्छी फसल की उम्मीद बढ़ जाती है। यदि मानसून धोखा दे जाए तो किसानों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। बरसात न होने से अत्यधिक खर्च बढ़ जाता है। इस कारण खेती में फायदे की जगह घाटा हो जाता है।
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किसान राजेंद्र सिंह, राजकुमार सिंह, नारायण सिंह व जगदीश सिंह आदि ने बताया कि किसान ट्यूबवेल के सहारे सिंचाई कर फसल को सूखने से बचाने की जुगत में लगे हुए थे। इसके अलावा कुछ किसान धान रोपाई के लिए बरसात का इंतजार कर रहे थे। वीरवार को बरसात होते ही धान रोपाई के कार्य में भी तेजी आई है। साथ ही अन्य फसलों में भी हरियाली छा गई है। उन्होंने बताया कि किसान का जीवन मौसम पर ही निर्भर करता है। किसान के पास पर्याप्त सिंचाई के साधन हो या न हो, बरसात का इंतजार सभी किसानों को रहता है। बरसात के बिना अच्छी फसल की उम्मीद नहीं की जा सकती।
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धान रोपाई के दौरान यदि मौसम ने साथ दिया और बरसात हुई तो अच्छी फसल की उम्मीद बढ़ जाती है। यदि मानसून धोखा दे जाए तो किसानों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। बरसात न होने से अत्यधिक खर्च बढ़ जाता है। इस कारण खेती में फायदे की जगह घाटा हो जाता है।
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