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Ambala News: वन्य जीव इंस्पेक्टर राकेश व ड्राइवर भरत को 30 हजार रुपये रिश्वत लेते दबोचा
Fri, 27 Feb 2026 03:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 27 Feb 2026 03:59 AM IST
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अंबाला सिटी। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने वन्य जीव इंस्पेक्टर राकेश व ड्राइवर भरत को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों काबू कर लिए। एसीबी की टीम ने शिकायतकर्ता सपेहड़ा गांव के भीलपुरा निवासी संदीप कुमार की शिकायत पर ये कार्रवाई की।
संदीप का आरोप था कि राकेश व भरत ने उनके सुअर फार्म पर कच्चा मांस मिलने पर कार्रवाई के लिए धमकाया था। उसकी एवज में आरोपियों ने उनसे 50 हजार रुपये की मांग की थी। टीम ने वीरवार दोपहर में अंबाला सिटी के वन्य विभाग कार्यालय में दस्तक देकर उन्हें काबू कर लिया। शिकायतकर्ता संदीप को आगे करने के बाद एसीबी की टीम अलर्ट हो गई थी। कार्यालय में सबसे पहले भरत ने 30 हजार रुपये की राशि पकड़ी थी। थोड़ी देर इंतजार करने के बाद जैसे ही भरत ने राकेश को पैसे थमाए तो दोनों को काबू कर लिया। नोटों पर लगे केमिकल में हाथ धुलवाए तो दोनों के हाथ रंग गए। एसीबी की टीम दोनों आरोपियों को शुक्रवार कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजी।
एससीबी इंस्पेक्टर संदीप ने बताया कि शिकायतकर्ता संदीप का भीलपुरा गांव में सुअर का फार्म हाउस है। फार्म में सुअरों की खुराक के लिए कच्चे मांस की आवश्यकता होती है, जिसके चलते संदीप ने मांस स्टॉक कर रखा था। आरोप है कि वन्य जीव निरीक्षक राकेश व भरत ने इस पर कानूनी कार्रवाई करने और केस दर्ज करने की धमकी दी। मामले को रफा-दफा करने के बदले में आरोपियों ने 50 हजार की मांग की थी।
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एक दिन पहले ले चुके थे 10 हजार रुपये की राशि
एसीबी इंस्पेक्टर संदीप ने बताया कि बातचीत के दौरान सौदा 40 हजार रुपये में तय हुआ था। पहले तो आरोपियों ने बुधवार को ही शिकायतकर्ता संदीप को कार्यालय में बुलाकर 10 हजार रुपये की राशि ले ली थी। जबकि 30 हजार रुपये की राशि के साथ वीरवार अपने कार्यालय में बुलाया था। तभी टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों आरोपियों को काबू किया। इंस्पेक्टर संदीप ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
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24 फरवरी को आंगनबाड़ी सुपरवाइजर पर कसा था शिकंजा
एसीबी टीम की एक सप्ताह में यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। 24 फरवरी को टीम ने 2 हजार रुपये रिश्वत लेते आंगनबाड़ी सुपरवाइजर मीनू को काबू कर जेल भेजा था। मीनू ने शिकायतकर्ता सुभाष चंद की पत्नी उषा से पैसों की डिमांड की थी। यह पैसे उषा से उनकी केवाईसी न होने के कारण आईडीबीआई बैंक मुलाना में खाता बंद होने के कारण तीन माह का वेतन लंबित को निकालने के लिए मांगे थे।
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संदीप का आरोप था कि राकेश व भरत ने उनके सुअर फार्म पर कच्चा मांस मिलने पर कार्रवाई के लिए धमकाया था। उसकी एवज में आरोपियों ने उनसे 50 हजार रुपये की मांग की थी। टीम ने वीरवार दोपहर में अंबाला सिटी के वन्य विभाग कार्यालय में दस्तक देकर उन्हें काबू कर लिया। शिकायतकर्ता संदीप को आगे करने के बाद एसीबी की टीम अलर्ट हो गई थी। कार्यालय में सबसे पहले भरत ने 30 हजार रुपये की राशि पकड़ी थी। थोड़ी देर इंतजार करने के बाद जैसे ही भरत ने राकेश को पैसे थमाए तो दोनों को काबू कर लिया। नोटों पर लगे केमिकल में हाथ धुलवाए तो दोनों के हाथ रंग गए। एसीबी की टीम दोनों आरोपियों को शुक्रवार कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजी।
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एससीबी इंस्पेक्टर संदीप ने बताया कि शिकायतकर्ता संदीप का भीलपुरा गांव में सुअर का फार्म हाउस है। फार्म में सुअरों की खुराक के लिए कच्चे मांस की आवश्यकता होती है, जिसके चलते संदीप ने मांस स्टॉक कर रखा था। आरोप है कि वन्य जीव निरीक्षक राकेश व भरत ने इस पर कानूनी कार्रवाई करने और केस दर्ज करने की धमकी दी। मामले को रफा-दफा करने के बदले में आरोपियों ने 50 हजार की मांग की थी।
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एक दिन पहले ले चुके थे 10 हजार रुपये की राशि
एसीबी इंस्पेक्टर संदीप ने बताया कि बातचीत के दौरान सौदा 40 हजार रुपये में तय हुआ था। पहले तो आरोपियों ने बुधवार को ही शिकायतकर्ता संदीप को कार्यालय में बुलाकर 10 हजार रुपये की राशि ले ली थी। जबकि 30 हजार रुपये की राशि के साथ वीरवार अपने कार्यालय में बुलाया था। तभी टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों आरोपियों को काबू किया। इंस्पेक्टर संदीप ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
24 फरवरी को आंगनबाड़ी सुपरवाइजर पर कसा था शिकंजा
एसीबी टीम की एक सप्ताह में यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। 24 फरवरी को टीम ने 2 हजार रुपये रिश्वत लेते आंगनबाड़ी सुपरवाइजर मीनू को काबू कर जेल भेजा था। मीनू ने शिकायतकर्ता सुभाष चंद की पत्नी उषा से पैसों की डिमांड की थी। यह पैसे उषा से उनकी केवाईसी न होने के कारण आईडीबीआई बैंक मुलाना में खाता बंद होने के कारण तीन माह का वेतन लंबित को निकालने के लिए मांगे थे।