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Ambala News: दूध न मिलने पर पानी में चीनी घोलकर बच्ची को पिला रही मां
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संदीप कुमार
अंबाला। टांगरी नदी का इलाका, तकरीबन तीन से आठ फुट तक का पानी, बाढ़ की विभीषिका ने कई परिवारों को विस्थापना का दंश झेलने के लिए विवश कर दिया। इन्हीं विस्थापितों में एक आठ माह की दूध पीती बच्ची है। बाढ़ का कहर ऐसा कि बच्ची के लिए दूध मिलना मुश्किल हो गया। मां की ममता ने युक्ति निकाली बच्ची को पानी में चीनी घोलकर उसकी भूख शांत की। इस तरह मां की मदद बाढ़ के कहर से जीत गई।
दरअसल टांगरी के न्यू प्रीत नगर निवासी मीनू पिछले तीन महीने से पति अमित कुमार और आठ महीने की बच्ची के साथ किराए पर रह रही थी। टांगरी नदी में बाढ़ आई तो उनके घर में पांच फुट तक पानी भर गया। उन्हें सामान तक उठाने का मौका नहीं मिला। पति व बच्ची के साथ परिवार सकुशल सड़क पर आ गया और एक दुकान में शरण ले ली।
इस परिवार के साथ संसाधन जुटाने के लिए एक भी रुपये नहीं हैं। लिहाजा मां मीनू बच्ची के लिए दूध भी नहीं खरीद सकती थी। ऐसे में बच्ची बार-बार रोती है तो उसे चुप कराने के लिए मां की ममता उमड़ आई। वह बच्ची को पानी में चीनी घोलकर पिता रही है। यह पीने के बाद बच्ची कुछ देर के लिए तो शांत हो जाती है, मगर फिर से वह दूध की इच्छा में रोने लगती है। कई बार सड़क पर समाजसेवी संस्थाओं से लाेग चाय लेकर आते हैं तो वह बच्ची को चाय पिला रही है। फिर भी बच्ची दूध के लिए व्याकुल दिखाई दी। दुखों का पहाड़ सिर्फ यहीं समाप्त नहीं हुआ था बल्कि जब वह अपने घर में बाढ़ का पानी निकलने के बाद कीचड़ साफ करने गई तो मकान मालिक ने किराया मांग लिया। कुछ दिन बाद किराया देने की बात कही तो घर खाली करने को कह दिया। अब यह परिवार मदद की आस संजोए हुए है।
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अंबाला। टांगरी नदी का इलाका, तकरीबन तीन से आठ फुट तक का पानी, बाढ़ की विभीषिका ने कई परिवारों को विस्थापना का दंश झेलने के लिए विवश कर दिया। इन्हीं विस्थापितों में एक आठ माह की दूध पीती बच्ची है। बाढ़ का कहर ऐसा कि बच्ची के लिए दूध मिलना मुश्किल हो गया। मां की ममता ने युक्ति निकाली बच्ची को पानी में चीनी घोलकर उसकी भूख शांत की। इस तरह मां की मदद बाढ़ के कहर से जीत गई।
दरअसल टांगरी के न्यू प्रीत नगर निवासी मीनू पिछले तीन महीने से पति अमित कुमार और आठ महीने की बच्ची के साथ किराए पर रह रही थी। टांगरी नदी में बाढ़ आई तो उनके घर में पांच फुट तक पानी भर गया। उन्हें सामान तक उठाने का मौका नहीं मिला। पति व बच्ची के साथ परिवार सकुशल सड़क पर आ गया और एक दुकान में शरण ले ली।
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इस परिवार के साथ संसाधन जुटाने के लिए एक भी रुपये नहीं हैं। लिहाजा मां मीनू बच्ची के लिए दूध भी नहीं खरीद सकती थी। ऐसे में बच्ची बार-बार रोती है तो उसे चुप कराने के लिए मां की ममता उमड़ आई। वह बच्ची को पानी में चीनी घोलकर पिता रही है। यह पीने के बाद बच्ची कुछ देर के लिए तो शांत हो जाती है, मगर फिर से वह दूध की इच्छा में रोने लगती है। कई बार सड़क पर समाजसेवी संस्थाओं से लाेग चाय लेकर आते हैं तो वह बच्ची को चाय पिला रही है। फिर भी बच्ची दूध के लिए व्याकुल दिखाई दी। दुखों का पहाड़ सिर्फ यहीं समाप्त नहीं हुआ था बल्कि जब वह अपने घर में बाढ़ का पानी निकलने के बाद कीचड़ साफ करने गई तो मकान मालिक ने किराया मांग लिया। कुछ दिन बाद किराया देने की बात कही तो घर खाली करने को कह दिया। अब यह परिवार मदद की आस संजोए हुए है।
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