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दफ्तर रहे खाली, कच्चे कर्मचारियों ने संभाला कामकाज
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला कैंट।
Updated Thu, 30 Jun 2016 12:04 AM IST
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बिजली
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अंबाला कैंट। बिजली विभाग की 23 सब यूनिटों का निजीकरण करने के विरोध में हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर की गई हड़ताल के चलते जहां करीब 80 प्रतिशत नियमित स्टाफ हड़ताल पर रहा, वहीं कच्चे कर्मचारियों ने इस दौरान कामकाज संभाला। अधिकतर बिजली दफ्तर खाली रहे, जबकि कच्चे कर्मचारियों ने कामकाज संभाला। बिजली उपभोक्ता भी समस्या लेकर आए, लेकिन उनको भी शिकायत केंद्र पर तैनात कर्मचारियों ने आश्वासन देकर भेजा। जिलेभर में छिटपुट फाल्ट आते रहे, लेकिन उनको निपटाया गया, जबकि अघोषित कटों के बाद आपूर्ति बहाल होती रही। इस दौरान सभी बिजली कार्यालयों पर पुलिस कर्मचारी भी तैनात रहे।
अंबाला कैंट और अंबाला सिटी में बिजली विभाग के कार्यालयों में अधिकतर कुर्सियां खाली रहीं। इस दौरान विभाग में अपने कार्य से आने वाले अधिकतर लोगों की शिकायत सुनीं गई और उनको कच्चे कर्मचारियों ने ही हैंडल किया। ऑल हरियाणा पावर वर्कर्स कॉरपोरेशन का दावा है कि जिले में बिजली विभाग के 80 प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर रहे। बुधवार को सुबह से लेकर शाम तक हालांकि बिजली कट तो लगे, लेकिन कुछ समय के अंतराल के बाद बिजली आपूर्ति बहाल होती रही। कैंट के क्वालिटी सब स्टेशन, बारह क्रॉस रोड स्थित सब स्टेशन, सिटी के धूलकोट स्टेशन, जगाधरी गेट सब स्टेशन, बादशाही बाग सब स्टेशन, पुरानी घास मंडी सब स्टेशन पर कुर्सियां खाली रहीं, जबकि उपभोक्ताओं को परेशानी हुई।
उधर, नारायणगढ़ में हड़ताल का असर देखने को मिला। कर्मचारी नेता अमीर चंद, सतदेव शर्मा और सुभाष धीमान के अनुसार नारायणगढ़ सब यूनिट में कुल 149 में से 140 कर्मचारी हड़ताल पर रहे तथा शहजादपुर सब यूनिट में 104 में से 99 कर्मचारी पूर्ण रूप से हड़ताल पर रहे। बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को सीआईटीयू, सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा, मिड-डे-मील वर्कर यूनियन, हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ तथा हेमसा के कर्मचारी नेताओं ने समर्थन दिया। सर्वकर्मचारी संघ के राज्य ऑडिटर सतीश सेठी ने बताया कि सरकार द्वारा जो हड़ताल के आंकड़े दिए जा रहे हैं वह सरासर गलत हैं। प्रदेशभर में 80 प्रतिशत से ज्यादा बिजली कर्मी हड़ताल पर रहे।
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उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि हड़ताल की असल वजह के बारे में भी आम जनता को अवगत कराएं, ताकि आमजन को भी उनकी इस मूलभूत जरुरत को लेकर होने जा रहे कुठाराघात बारे पता लगे। कर्मचारी नेता ने बताया कि सरकारी थर्मल प्लांट में एक यूनिट बिजली के उत्पादन में 4.46 रुपये खर्च होते हैं। बिजली की मैनेजमेंट सरकार व निजी कंपनियों की मिलीभगत के चलते थर्मल प्लांट में बिजली का उत्पादन बंद किया जा रहा है और प्राइवेट कंपनियों से 11.54 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदी जा रही है।
कर्मचारी नेताओं सिंह राम, विजय वालिया, सचिन, रोशन लाल, एस कुमार, रवि कुमार के अनुसार कर्मचारियों ने हड़ताल के पहले दिन शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन किया और किसी भी प्रकार की बिजली में बाधा उत्पन्न नहीं की।
इसी प्रकार मुलाना में भी बिजली बोर्ड के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस कारण कार्यालय का कामकाज प्रभावित रहा है। लेकिन डीसी रेट पर काम करने वाले कर्मचारी काम पर रहे, जिन्होंने बिजली की सप्लाई व उपकरणों के रिपेयर करने का काम किया। अधोया, उगाला मुलाना विद्युत सेंअर में कामकाज प्रभावित रहा है। उपभोक्तों के बिल भरने व अन्य काम नहीं हो सके। कई उपभोक्ता बिना काम करवाए वापस लौटे।
उधर, बराड़ा में प्रदेशभर में ज्वांइट एक्शन पावर कमेटी के आह्वान पर बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का कोई असर नहीं दिखा। कर्मचारी यूनियन के प्रधान रूलदा राम ने बताया कि हड़ताल के दौरान सब कुछ शांतिपूर्वक रहा। कर्मचारियों ने कहीं पर कोई बिजली को बाधा नहीं पहुंचाई। बिजली निगम बराड़ा के एसडीओ विकास बंसल ने बताया कि नियमित कर्मचारी हड़ताल पर रहे लेकिन किसी भी प्रकार की कोई नारेबाजी, धरना-प्रर्दशन नहीं हुआ। शेड्यूल के मुताबिक बिजली सप्लाई चलाई गई। कहीं भी कोई शिकायत आई, उसे ठीक किया गया। कच्चे कर्मचारियों ने इस दौरान उपभोक्ताओं की कंपलेंट अटेंड की।
पुलिसकर्मी रहे तैनात
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने भी अपनी तैयारी की थी। बिजली विभाग के कार्यालय व सब यूनिटों के बाहर पुलिसकर्मी तैनात रहे। हालांकि इस दौरान कोई भी अप्रिय घटना नहीं रही, जबकि पुलिस ने हर स्थिति से निपटने की तैयारी कर रखी थी। सरकार द्वारा लगाए गए एस्मा का असर भी दिखा, जबकि अंबाला में इस दौरान प्रदर्शन से भी कर्मचारियों ने परहेज रखा।
बिजली कर्मचारी लंबे समय से निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत हैं। प्रदेश सरकार द्वारा 23 सब डिविजनों को निजी हाथों में दिया जा रहा है, जिसका फायदा सीधा पूंजीपतियों को होगा। यह सरकार निजीकरण को आगे बढ़ा रही है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की एक आगामी बैठक रोहतक में 2 जुलाई को होगी, जिसमें आगामी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
- राम गोपाल, प्रधान सर्व कर्मचारी संघ
अंबाला में करीब अस्सी प्रतिशत नियमित कर्मचारी हड़ताल पर रहे। बिजली कर्मचारी सरकार को जो संदेश देना चाहते थे, वह दिया गया। यूनियनों ने किसी भी तरह से बिजली आपूर्ति को बाधित नहीं किया। वीरवार को भी कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहेगी। सरकार द्वारा विभाग का किया जा रहा निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा, ताकि जनता को इसका नुकसान हो।
- महेश गोयल, सर्कल सचिव, ऑल हरियाणा पावर वर्कर्स कॉरपोरेशन
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अंबाला कैंट और अंबाला सिटी में बिजली विभाग के कार्यालयों में अधिकतर कुर्सियां खाली रहीं। इस दौरान विभाग में अपने कार्य से आने वाले अधिकतर लोगों की शिकायत सुनीं गई और उनको कच्चे कर्मचारियों ने ही हैंडल किया। ऑल हरियाणा पावर वर्कर्स कॉरपोरेशन का दावा है कि जिले में बिजली विभाग के 80 प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर रहे। बुधवार को सुबह से लेकर शाम तक हालांकि बिजली कट तो लगे, लेकिन कुछ समय के अंतराल के बाद बिजली आपूर्ति बहाल होती रही। कैंट के क्वालिटी सब स्टेशन, बारह क्रॉस रोड स्थित सब स्टेशन, सिटी के धूलकोट स्टेशन, जगाधरी गेट सब स्टेशन, बादशाही बाग सब स्टेशन, पुरानी घास मंडी सब स्टेशन पर कुर्सियां खाली रहीं, जबकि उपभोक्ताओं को परेशानी हुई।
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उधर, नारायणगढ़ में हड़ताल का असर देखने को मिला। कर्मचारी नेता अमीर चंद, सतदेव शर्मा और सुभाष धीमान के अनुसार नारायणगढ़ सब यूनिट में कुल 149 में से 140 कर्मचारी हड़ताल पर रहे तथा शहजादपुर सब यूनिट में 104 में से 99 कर्मचारी पूर्ण रूप से हड़ताल पर रहे। बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को सीआईटीयू, सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा, मिड-डे-मील वर्कर यूनियन, हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ तथा हेमसा के कर्मचारी नेताओं ने समर्थन दिया। सर्वकर्मचारी संघ के राज्य ऑडिटर सतीश सेठी ने बताया कि सरकार द्वारा जो हड़ताल के आंकड़े दिए जा रहे हैं वह सरासर गलत हैं। प्रदेशभर में 80 प्रतिशत से ज्यादा बिजली कर्मी हड़ताल पर रहे।
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उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि हड़ताल की असल वजह के बारे में भी आम जनता को अवगत कराएं, ताकि आमजन को भी उनकी इस मूलभूत जरुरत को लेकर होने जा रहे कुठाराघात बारे पता लगे। कर्मचारी नेता ने बताया कि सरकारी थर्मल प्लांट में एक यूनिट बिजली के उत्पादन में 4.46 रुपये खर्च होते हैं। बिजली की मैनेजमेंट सरकार व निजी कंपनियों की मिलीभगत के चलते थर्मल प्लांट में बिजली का उत्पादन बंद किया जा रहा है और प्राइवेट कंपनियों से 11.54 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदी जा रही है।
कर्मचारी नेताओं सिंह राम, विजय वालिया, सचिन, रोशन लाल, एस कुमार, रवि कुमार के अनुसार कर्मचारियों ने हड़ताल के पहले दिन शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन किया और किसी भी प्रकार की बिजली में बाधा उत्पन्न नहीं की।
इसी प्रकार मुलाना में भी बिजली बोर्ड के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस कारण कार्यालय का कामकाज प्रभावित रहा है। लेकिन डीसी रेट पर काम करने वाले कर्मचारी काम पर रहे, जिन्होंने बिजली की सप्लाई व उपकरणों के रिपेयर करने का काम किया। अधोया, उगाला मुलाना विद्युत सेंअर में कामकाज प्रभावित रहा है। उपभोक्तों के बिल भरने व अन्य काम नहीं हो सके। कई उपभोक्ता बिना काम करवाए वापस लौटे।
उधर, बराड़ा में प्रदेशभर में ज्वांइट एक्शन पावर कमेटी के आह्वान पर बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का कोई असर नहीं दिखा। कर्मचारी यूनियन के प्रधान रूलदा राम ने बताया कि हड़ताल के दौरान सब कुछ शांतिपूर्वक रहा। कर्मचारियों ने कहीं पर कोई बिजली को बाधा नहीं पहुंचाई। बिजली निगम बराड़ा के एसडीओ विकास बंसल ने बताया कि नियमित कर्मचारी हड़ताल पर रहे लेकिन किसी भी प्रकार की कोई नारेबाजी, धरना-प्रर्दशन नहीं हुआ। शेड्यूल के मुताबिक बिजली सप्लाई चलाई गई। कहीं भी कोई शिकायत आई, उसे ठीक किया गया। कच्चे कर्मचारियों ने इस दौरान उपभोक्ताओं की कंपलेंट अटेंड की।
पुलिसकर्मी रहे तैनात
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने भी अपनी तैयारी की थी। बिजली विभाग के कार्यालय व सब यूनिटों के बाहर पुलिसकर्मी तैनात रहे। हालांकि इस दौरान कोई भी अप्रिय घटना नहीं रही, जबकि पुलिस ने हर स्थिति से निपटने की तैयारी कर रखी थी। सरकार द्वारा लगाए गए एस्मा का असर भी दिखा, जबकि अंबाला में इस दौरान प्रदर्शन से भी कर्मचारियों ने परहेज रखा।
बिजली कर्मचारी लंबे समय से निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत हैं। प्रदेश सरकार द्वारा 23 सब डिविजनों को निजी हाथों में दिया जा रहा है, जिसका फायदा सीधा पूंजीपतियों को होगा। यह सरकार निजीकरण को आगे बढ़ा रही है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की एक आगामी बैठक रोहतक में 2 जुलाई को होगी, जिसमें आगामी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
- राम गोपाल, प्रधान सर्व कर्मचारी संघ
अंबाला में करीब अस्सी प्रतिशत नियमित कर्मचारी हड़ताल पर रहे। बिजली कर्मचारी सरकार को जो संदेश देना चाहते थे, वह दिया गया। यूनियनों ने किसी भी तरह से बिजली आपूर्ति को बाधित नहीं किया। वीरवार को भी कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहेगी। सरकार द्वारा विभाग का किया जा रहा निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा, ताकि जनता को इसका नुकसान हो।
- महेश गोयल, सर्कल सचिव, ऑल हरियाणा पावर वर्कर्स कॉरपोरेशन