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Ambala News: पति की हत्या के आरोप से पत्नी समेत दो बरी
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अंबाला। पति की हत्या के आरोप में कोर्ट ने पत्नी और उसके साथी को बुधवार को बरी कर दिया। एडवोकेट सरिता जरोरा ने बताया कि मामला अंबाला के गांव तर का वर्ष 2020 का है। चौड़मस्तपुर के अधीन आने वाले डेरा तर निवासी अमरीक मजदूरी करता था।
कोरोना काल के दौरान 12 जून 2020 को वह अंबाला से मजदूरी करने के बाद अपने घर के आंगन में खड़े नलके पास गिर गया। इस पर उसकी पत्नी उसे पड़ोसियों के साथ चौड़मस्तपुर स्थित सीएचसी में ले गई। जहां डॉक्टरों ने उसे अंबाला के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। अगले दिन 13 जूून को अमरीक सिंह की मौत हो गई। पोस्टमार्टम में आया कि अमरीक सिंह ने जहरीला पदार्थ खाया था। इसके बाद अमरीक सिंह के बड़े भाई सोमनाथ ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि अमरीक की पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसके भाई को जहर देकर मार डाला।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया था और यह मामला कोर्ट में तभी से विचाराधीन था। आरोपी पक्ष की तरफ एडवोकेट सरिता जरोरा और एडवोकेट विजय कुमार पेश हुए। दोनों ने मजबूत दलीलें प्रस्तुत की। वहीं दूसरे आरोपी की तरफ से एडवोकेट विक्रम ने पैरवी की। एडवोकेट सरिता ने बताया कि मृतक के पेट में जहरीला पदार्थ तो मिला लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि यह जहर मामले में आरोपियों ने दिया था।
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आरोपियों के खिलाफ कोई मजबूत सबूत पेश नहीं हो सका। करीब चार वर्ष तक चले इस केस के बाद बुधवार को एडिशन सेशन जज राजन वालिया की कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी करने के आदेश दिए।
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कोरोना काल के दौरान 12 जून 2020 को वह अंबाला से मजदूरी करने के बाद अपने घर के आंगन में खड़े नलके पास गिर गया। इस पर उसकी पत्नी उसे पड़ोसियों के साथ चौड़मस्तपुर स्थित सीएचसी में ले गई। जहां डॉक्टरों ने उसे अंबाला के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। अगले दिन 13 जूून को अमरीक सिंह की मौत हो गई। पोस्टमार्टम में आया कि अमरीक सिंह ने जहरीला पदार्थ खाया था। इसके बाद अमरीक सिंह के बड़े भाई सोमनाथ ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि अमरीक की पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसके भाई को जहर देकर मार डाला।
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पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया था और यह मामला कोर्ट में तभी से विचाराधीन था। आरोपी पक्ष की तरफ एडवोकेट सरिता जरोरा और एडवोकेट विजय कुमार पेश हुए। दोनों ने मजबूत दलीलें प्रस्तुत की। वहीं दूसरे आरोपी की तरफ से एडवोकेट विक्रम ने पैरवी की। एडवोकेट सरिता ने बताया कि मृतक के पेट में जहरीला पदार्थ तो मिला लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि यह जहर मामले में आरोपियों ने दिया था।
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आरोपियों के खिलाफ कोई मजबूत सबूत पेश नहीं हो सका। करीब चार वर्ष तक चले इस केस के बाद बुधवार को एडिशन सेशन जज राजन वालिया की कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी करने के आदेश दिए।