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कोरोना ने फिर ली दो महिलाओं की जान, 106 नए मामलों से फूली सांसे
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जिले में कोरोना का कहर रफ्तार पकड़ता ही जा रहा है। मंगलवार को कोरोना ने दो बुजुर्ग महिलाओं की जान ले ली। अप्रैल के पहले सप्ताह में ही कोरोना अब तक कोरोना कुल पांच लोगों की जान ले चुका है। इतना ही नहीं इससे पहले मार्च में 14 लोगों की जान गई थी। दूसरी तरफ जिले में मंगलवार को 106 नए केस भी सामने आए। इस तरह जिले में अब तक 14 हजार 886 लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। हालांकि इनमें से अब तक 13377 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। जिले में इस समय 343 मरीज एक्टिव हैं, जबकि 166 की जान कोरोना अब तक चले चुका है। 15 फरवरी से छह अप्रैल तक करीब 520 स्कूली छात्र कोरोना संक्रमित आ चुके हैं।
130 मरीज चल रहे ऑक्सीजन सपोर्ट पर
जिले में इस समय 130 कोरोना संक्रमित मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रहे हैं। इनमें से 10 बाइपेप और वेंटिलेटर के सहारे सांसें ले रहे हैं, जबकि करीब 10 को हाईफ्लो ऑक्सीजन दी जा रही है। 50 मरीजों को बीच-बीच में ऑक्सीजन देनी पड़ रही है। करीब 60 मरीज ऐसे हैं, जिन्हें साधारण ऑक्सीजन सपोर्ट जरूरत के अनुसार दी जा रही है। यह सभी अलग-अलग जगह भर्ती हैं।
देरी से आने के कारण हो रही मौत
जिन मरीजों की कोरोना से जान जा रही है वह बहुत देरी से स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचते हैं। यह उस समय सैंपल करवाते हैं, जबकि हालत बिगड़ चुकी होती है। जब तक यह पता चलता है कि व्यक्ति कोरोना संक्रमित है उसकी मौत हो चुकी होती है।
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गत वर्ष होम आईसोलेशन से पांच हजार मरीजों को मिली थी संजीवनी
जिले में कोरोना पॉजिटिव मरीजों को सुविधा के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से गत वर्ष होम आईसोलेशन एप लांच किया गया था। इसके लिए टीमों का गठन किया गया था। यह टीमें मरीज के पॉजिटिव आने के बाद मरीज को एक दिन छोड़कर उसे चेक करने घर जाती हैं। मरीज की बीपी, प्लस, ऑक्सीजन, बुखारा इत्यादि मात्रा देखती थी। इसके बाद जिओ टैग के जरिए मरीज की तमाम स्थिति एप पर डाउनलोड करनी होती थी। यदि मरीज का ऑक्सीजन लेवल, प्लस रेट, बीपी इत्यादि खतरनाक स्थिति में होता तो एप मरीज को निर्धारित अस्पताल में खुद ही रेफर का अलर्ट जारी कर देती था। इस तरह गत वर्ष करीब पांच हजार लोगों की जान स्वास्थ्य विभाग ने बचाई। इसके बाद मरीजों की संख्या कम हो गई थी। इस सुविधा को भी बंद कर दिया गया था। अब एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग ने होम आईसोलेट किए गए मरीजों के लिए यह सुविधा शुरू कर दी है। इस सुविधा के चलते जिले में गत वर्ष एक भी मरीज की होम आईसोलेशन में मौत नहीं हुई थी।
ऑक्सीजन सपोर्ट पर थी दोनों महिलाएं
जिन दो महिलाओं की मौत हुई है उनमें गांव पंजलासा की 68 वर्षीय महिला भी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के अनुसार महिला को शुगर और उच्च रक्तचाप की समस्या थी और वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रही थी। दूसरी महिला 76 वर्षीय थी और गांव जंधेड़ी की रहने वाली थी। इन्हें भी शुगर और उच्च रक्तचाप की समस्या थी और ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रही थी।
2 लाख 73339 लिए जा चुके सैंपल
जिले में अभी तक कोरोना के 2 लाख 73 हजार 339 सैंपल लिए जा चुके हैं। इसमें से 41 हजार 01 सैंपल एंटीजन किट से लिए गए हैं, जबकि शेष सभी आरटीपीसीआर से लिए गए हैं। मंगलवार को जो कुल मरीज पाए गए हैं। उनमें सबसे ज्यादा 52 अंबाला शहर के थे, 10 अंबाला कैंट, 14 शहजादपुर, 5-5 बराड़ा और मुलाना, 8 नारायणगढ़ व 12 मरीज चौड़मस्तपुर एरिया से हैं।
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130 मरीज चल रहे ऑक्सीजन सपोर्ट पर
जिले में इस समय 130 कोरोना संक्रमित मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रहे हैं। इनमें से 10 बाइपेप और वेंटिलेटर के सहारे सांसें ले रहे हैं, जबकि करीब 10 को हाईफ्लो ऑक्सीजन दी जा रही है। 50 मरीजों को बीच-बीच में ऑक्सीजन देनी पड़ रही है। करीब 60 मरीज ऐसे हैं, जिन्हें साधारण ऑक्सीजन सपोर्ट जरूरत के अनुसार दी जा रही है। यह सभी अलग-अलग जगह भर्ती हैं।
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देरी से आने के कारण हो रही मौत
जिन मरीजों की कोरोना से जान जा रही है वह बहुत देरी से स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचते हैं। यह उस समय सैंपल करवाते हैं, जबकि हालत बिगड़ चुकी होती है। जब तक यह पता चलता है कि व्यक्ति कोरोना संक्रमित है उसकी मौत हो चुकी होती है।
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गत वर्ष होम आईसोलेशन से पांच हजार मरीजों को मिली थी संजीवनी
जिले में कोरोना पॉजिटिव मरीजों को सुविधा के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से गत वर्ष होम आईसोलेशन एप लांच किया गया था। इसके लिए टीमों का गठन किया गया था। यह टीमें मरीज के पॉजिटिव आने के बाद मरीज को एक दिन छोड़कर उसे चेक करने घर जाती हैं। मरीज की बीपी, प्लस, ऑक्सीजन, बुखारा इत्यादि मात्रा देखती थी। इसके बाद जिओ टैग के जरिए मरीज की तमाम स्थिति एप पर डाउनलोड करनी होती थी। यदि मरीज का ऑक्सीजन लेवल, प्लस रेट, बीपी इत्यादि खतरनाक स्थिति में होता तो एप मरीज को निर्धारित अस्पताल में खुद ही रेफर का अलर्ट जारी कर देती था। इस तरह गत वर्ष करीब पांच हजार लोगों की जान स्वास्थ्य विभाग ने बचाई। इसके बाद मरीजों की संख्या कम हो गई थी। इस सुविधा को भी बंद कर दिया गया था। अब एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग ने होम आईसोलेट किए गए मरीजों के लिए यह सुविधा शुरू कर दी है। इस सुविधा के चलते जिले में गत वर्ष एक भी मरीज की होम आईसोलेशन में मौत नहीं हुई थी।
ऑक्सीजन सपोर्ट पर थी दोनों महिलाएं
जिन दो महिलाओं की मौत हुई है उनमें गांव पंजलासा की 68 वर्षीय महिला भी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के अनुसार महिला को शुगर और उच्च रक्तचाप की समस्या थी और वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रही थी। दूसरी महिला 76 वर्षीय थी और गांव जंधेड़ी की रहने वाली थी। इन्हें भी शुगर और उच्च रक्तचाप की समस्या थी और ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रही थी।
2 लाख 73339 लिए जा चुके सैंपल
जिले में अभी तक कोरोना के 2 लाख 73 हजार 339 सैंपल लिए जा चुके हैं। इसमें से 41 हजार 01 सैंपल एंटीजन किट से लिए गए हैं, जबकि शेष सभी आरटीपीसीआर से लिए गए हैं। मंगलवार को जो कुल मरीज पाए गए हैं। उनमें सबसे ज्यादा 52 अंबाला शहर के थे, 10 अंबाला कैंट, 14 शहजादपुर, 5-5 बराड़ा और मुलाना, 8 नारायणगढ़ व 12 मरीज चौड़मस्तपुर एरिया से हैं।