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Ambala News: बीमार एंबुलेंस के सहारे उपचार
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अंबाला सिटी। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सेवा भी बीमार है। इन एंबुलेंसों में मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचाया जा रहा है। वर्तमान में विभाग के पास कुल 27 एंबुलेंस हैं। इनमें से आठ तीन लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। जो एंबुलेंस नई हैं, उनमें गंभीर मरीजों के लिए उपकरण नहीं है। ऐसे में बीएलएस एंबुलेंस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) को उपकरण लगाकर एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
हाल ही में दो एंबुलेंस को कंडम घोषित किया है। वहीं, ग्रामीण स्तर पर जहां दो-दो एंबुलेंस होनी थी वहां पर एक- एक एंबुलेंस की है। ऐसे में मरीजों को किराये के वाहनों में ही मरीजों को लेकर आना पड़ता है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों से रेफर मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। लंबे समय से एंबुलेंस को रिपेयर करवाकर ही काम चल रहा है। जिसके लिए विभाग को हजारों रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।
कई बार पत्र लिखने के बाद भी अभी तक विभाग के मुख्यालय की ओर से नई एंबुलेंस नहीं मिल सकी हैं। विभाग स्थानीय स्तर पर पत्राचार कर रहा है मगर कोई जवाब देने वाला ही नहीं है। इधर पुरानी एंबुलेंस के रखरखाव के लिए विभाग प्रति माह हजारों रुपए खर्चा हो रहा है। पुरानी होने के कारण मरीजों को पीटीए एंबुलेंस में ही ट्रांसफर किया जाता है। इस एंबुलेंस में सिर्फ आक्सीजन की सुविधा ही मिल पाती है। जबकि गंभीर मरीजों के लिए वेंटीलेटर व अन्य उपकरण भी जरूरी होते हैं।
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रोजाना आती हैं 50 से 60 कॉल
एंबुलेंस के लिए रोजाना जिला अंबाला में 50 से 60 कॉल आती हैं, जबकि इन्हें संभालने के लिए पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती है। पीटीए एंबुलेंस में कई बार दो- दो मरीजों को रेफर करना पड़ता है। अंबाला में सबसे अधिक कॉल अंबाला छावनी और नारायणगढ़ से आती हैं। हाल ही में नारायणगढ़ और अंबाला छावनी अस्पताल में तैनात बीएलएस एंबुलेंस को कंडम घोषित किया गया है। सबसे अधिक मरीज यहीं से रेफर होते हैं।
एक भी एएलएस नहीं
जिले में 27 एंबुलेंस हैं, इनमें से चार अंबाला सिटी, चार अंबाला छावनी और तीन नारायणगढ़ को दी गई है। इसके अलावा और सभी पीएचसी पर भी एक- एक एबुलेंस दी हुई हैं। किसान आंदोलन के चलते चार एंबुलेंस शंभू के लिए लगाई गई है। इधर वीआईपी कॉल के लिए दो बीएलएस एंबुलेंस में ही वेंटिलेटर लगाकर एएलएल का कार्य लिया जा रहा है। इसके अलावा विभाग के पास एक किलकारी और एक न्यूनेटन, दो वैन लैब शिविर के लिए मौजूद हैं। इनमें मरीजों को लेकर नहीं जाया जा सकता।
वर्जन
निदेशालय को एंबुलेंस की कमी को लेकर लिखा हुआ है। फिलहाल बीएलएस में ही सभी उपकरण लगाकर उनसे एएलएस की सुविधा ली जा रही है। निदेशालय की ओर से जल्द ही नई एएलएस एंबुलेंस मिलने की उम्मीद है।
डॉ हितार्थ, नोडल अधिकारी, एंबुलेंस सेवा
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हाल ही में दो एंबुलेंस को कंडम घोषित किया है। वहीं, ग्रामीण स्तर पर जहां दो-दो एंबुलेंस होनी थी वहां पर एक- एक एंबुलेंस की है। ऐसे में मरीजों को किराये के वाहनों में ही मरीजों को लेकर आना पड़ता है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों से रेफर मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। लंबे समय से एंबुलेंस को रिपेयर करवाकर ही काम चल रहा है। जिसके लिए विभाग को हजारों रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।
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कई बार पत्र लिखने के बाद भी अभी तक विभाग के मुख्यालय की ओर से नई एंबुलेंस नहीं मिल सकी हैं। विभाग स्थानीय स्तर पर पत्राचार कर रहा है मगर कोई जवाब देने वाला ही नहीं है। इधर पुरानी एंबुलेंस के रखरखाव के लिए विभाग प्रति माह हजारों रुपए खर्चा हो रहा है। पुरानी होने के कारण मरीजों को पीटीए एंबुलेंस में ही ट्रांसफर किया जाता है। इस एंबुलेंस में सिर्फ आक्सीजन की सुविधा ही मिल पाती है। जबकि गंभीर मरीजों के लिए वेंटीलेटर व अन्य उपकरण भी जरूरी होते हैं।
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रोजाना आती हैं 50 से 60 कॉल
एंबुलेंस के लिए रोजाना जिला अंबाला में 50 से 60 कॉल आती हैं, जबकि इन्हें संभालने के लिए पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती है। पीटीए एंबुलेंस में कई बार दो- दो मरीजों को रेफर करना पड़ता है। अंबाला में सबसे अधिक कॉल अंबाला छावनी और नारायणगढ़ से आती हैं। हाल ही में नारायणगढ़ और अंबाला छावनी अस्पताल में तैनात बीएलएस एंबुलेंस को कंडम घोषित किया गया है। सबसे अधिक मरीज यहीं से रेफर होते हैं।
एक भी एएलएस नहीं
जिले में 27 एंबुलेंस हैं, इनमें से चार अंबाला सिटी, चार अंबाला छावनी और तीन नारायणगढ़ को दी गई है। इसके अलावा और सभी पीएचसी पर भी एक- एक एबुलेंस दी हुई हैं। किसान आंदोलन के चलते चार एंबुलेंस शंभू के लिए लगाई गई है। इधर वीआईपी कॉल के लिए दो बीएलएस एंबुलेंस में ही वेंटिलेटर लगाकर एएलएल का कार्य लिया जा रहा है। इसके अलावा विभाग के पास एक किलकारी और एक न्यूनेटन, दो वैन लैब शिविर के लिए मौजूद हैं। इनमें मरीजों को लेकर नहीं जाया जा सकता।
वर्जन
निदेशालय को एंबुलेंस की कमी को लेकर लिखा हुआ है। फिलहाल बीएलएस में ही सभी उपकरण लगाकर उनसे एएलएस की सुविधा ली जा रही है। निदेशालय की ओर से जल्द ही नई एएलएस एंबुलेंस मिलने की उम्मीद है।
डॉ हितार्थ, नोडल अधिकारी, एंबुलेंस सेवा