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Ambala News: तीन आरोपी एक दिन के रिमांड पर, वकीलों ने नहीं लिया केस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2024 04:04 AM IST
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Three accused on one day remand, lawyers did not take the case
अंबाला। नारायणगढ़-रायपुरानी सीमा स्थित रतौर गांव में अपने ही परिवार की बर्बरता से छह हत्याओं के मामले में पकड़े गए चारों आरोपियों को पुलिस ने मंगलवार कोर्ट में पेश किया। सीनियर डिविजन ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट गीतांजलि गोयल की कोर्ट में इस मामले में करीब 15 मिनट तक सुनवाई हुई।
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आरोपियों की तरफ से किसी भी वकील ने वकालतनामा पेश नहीं किया। पुलिस की ओर से सरकारी वकील ने हत्या में शामिल गंड़ासी और कुल्हाड़ी आदि हथियार की बरामदगी और अन्य की संलिप्तता पर पूछताछ करने के लिए दो दिन का रिमांड मांगा था। इस पर कोर्ट ने एक दिन का रिमांड मंजूर किया। कोर्ट ने आरोपी महिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जबकि तीनों आरोपी भूषण, साला मनीष उर्फ जॉनी, अमल उर्फ टोनी का एक दिन की रिमांड मंजूर की। अब पुलिस आरोपियों को हत्या के बाद छिपाए हथियारों की बरामदगी के लिए लेकर जाएगी। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि यह हथियार रतौर और पास के किसी गांव में छिपाए हैं।
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यह है पूरा मामला
दरअसल, दो एकड़ जमीन के लिए मुख्य आरोपी भूषण ने अन्य के साथ मिलकर अपने छोटे भाई हरीश सहित उसकी पत्नी सोनिया, दो भतीजी पांच वर्षीय यशिका, आठ वर्षीय परी और एक छह माह के भतीजे मयंक सहित मां सुरोपी की गला रेतकर हत्या कर दी थी। बाप ओमप्रकाश भी जानलेवा हमला किया था लेकिन वह जान बचाकर भाग गया था। सुराग मिटाने के लिए शव की घर में ही शटरिंग की बल्लियों पर चिता बनाकर डीजल से आग लगा दी थी। समय रहते पिता ओमप्रकाश मदद लेकर आया तो अधजले शवों को बाहर निकाला।
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प्रस्ताव पास होने के बाद कोई नहीं लड़ रहा केस

उधर, जघन्य अपराध को देखते हुए नारायणगढ़ बार एसोसिएशन ने आरोपियों की पैरवी करने से हाथ खड़े कर दिए थे। बाकायदा एसोसिएशन के प्रधान की तरफ से एक प्रस्ताव भी पास किया गया था। सभी वकीलों ने सहमति जताई थी। यहीं कारण था कि आरोपियों की तरफ से सुनवाई के दौरान कोई भी वकील पेश नहीं हुआ।

वर्जन

इस तरह का जघन्य अपराध करने वाले हत्यारे की पैरवी न करने के लिए एक प्रस्ताव डाला गया था। किसी भी वकील ने आरोपी की तरफ से वकालत नामा पेश नहीं किया। नारायणगढ़ कोर्ट में छह हत्याओं का यह पहला मामला था जब सगे भाई ने अपने ही खून को खत्म कर दिया। छह माह के बच्चे को भी नहीं बक्शा। आगे भी कोई जघन्य अपराध का मामला आता है तो यह प्रस्ताव डाला जाएगा।
पंकज बिंदल, प्रधान, नारायणगढ़ बार एसोसिएशन प्रधान
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