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पशुओं की समस्या से नहीं मिलेगी निजात, नगर निगम के ईओ ने पल्ला झाड़ा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Sep 2021 01:26 AM IST
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There will be no relief from the problem of animals, the EO of the Municipal Corporation overturned
अंबाला में सड़क के किनारे बैठे बेसहारा पशु। - फोटो : Ambala
अंबाला सिटी। शहरवासियों को बेसहारा पशुओं की समस्या से फिलहाल स्थायी निजात नहीं मिलेगी। दरअसल, स्थायी लोक अदालत में शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम के अधिकारी ने पक्ष रखते हुए कहा कि पशुबाड़ा नहीं बनाया जा सकता क्योंकि नगर निगम की यह जिम्मेदारी नहीं है। बेसहारा पशुओं की समस्या के निपटान के लिए याची अधिवक्ता रोहित जैन ने स्थायी लोक अदालत में याचिका दायर कर रखी है।
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शुक्रवार को मामले की सुनवाई सुबह 10 बजे होनी थी लेकिन नगर निगम के मुख्य सफाई निरीक्षक (सीएसआई) मदनलाल दोपहर करीब 12 बजे पहुंचे। इस पर स्थायी लोक अदालत के चेयरमैन एसएल शर्मा ने नाराजगी जताई और भविष्य में समय पर उपस्थित होने की बात कही। उन्होंने सीएसआई से बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए बनाए जाने वाले पशु बाड़े के बारे में सवाल पूछा, लेकिन सीएसआई कोई जवाब नहीं दे पाए, तो चेयरमैन ने नाराजगी जताते हुए उन्हें पूरी तैयारी के साथ आने की बात कही। कहा कि यह मामला 2018 से चल रहा है, लेकिन आपकी अभी भी कोई तैयारी नहीं है। अभी कार्यालय जाओ और पूरी तैयारी करके आओ। यह कह कर उन्होंने दो बजे तक सुनवाई टाल दी और दो बजे ईओ के साथ दोबारा उपस्थित होने के निर्देश जारी किए।
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दोपहर दो बजे दोबारा से अदालत में सुनवाई शुरू हुई लेकिन नगर निगम के अधिशासी अधिकारी (ईओ) 2:25 पर उपस्थित हुए। यह देख स्थायी लोक अदालत के चेयरमैन ने नाराजगी जताई। कहा कि नगर निगम के अधिकारी सुबह भी देरी से पहुंचे थे और फिर देरी से ही आए हैं। इसपर ईओ ने भविष्य में समय पर पहुंचने का आश्वासन दिया।
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स्थायी लोक अदालत के चेयरमैन ने पूछा कि क्या पशु बाड़े के लिए जमीन का चयन कर लिया गया है? ईओ ने जवाब देते हुए कहा कि पशु बाड़ा बनाने का कार्य नगर निगम का नहीं है। नगर निगम केवल पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ने का काम करता है। इसके लिए उन्होंने पुराने टेंडर को दो माह के लिए बढ़ा दिया है। बताया कि इससे पहले जो टेंडर लगाया गया था, उसमें किसी भी कंपनी ने आवेदन नहीं किया है। जिस कारण टेंडर को अब दोबारा से लगाया गया है। इस बार एक नहीं बल्कि तीन से चार कंपनी को टेंडर दिया जाएगा। जिन्हें सीमित क्षेत्र में से ही पशुओं को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
सुअर और कुत्तों की समस्या से निजात दिलाने का दिया आश्वासन
इसके अलावा ईओ ने कोर्ट के समक्ष बताया कि वह सुअरों को पकड़ने का कार्य भी कर रहे हैं और प्रत्येक पकड़े गए सुअर पर पक्की स्याही से नंबर डाले जा रहे हैं। इसके अलावा कुत्तों की नसबंदी को लेकर भी जो पुराना टेंडर था उसे दो माह के लिए बढ़ा दिया गया है और नया टेंडर लगा दिया गया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद नसबंदी का कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा। ईओ की यह सब बात सुनने के बाद स्थायी लोक अदालत के चेयरमैन ने कहा कि आप पशु बाड़ा बनाने को लेकर विचार करें और दो माह में बताएं कि क्या कुछ हो सकता है। अब 30 नवंबर को दोबारा इस मामले में सुनवाई होगी।
ईओ बोले हर कार्य नगर निगम कैसे संभाले
ईओ ने अदालत के समक्ष कहा कि हमारे पास जमीन, विकास, बिजली, सफाई, जन्म मृत्यु, रेंट, प्रॉपर्टी, अतिक्रमण और भी बहुत से काम है। लेकिन इन सभी कार्यों को करने के लिए बदले सिर्फ प्रॉपर्टी टैक्स ही मिलता है जो लोग जमा नहीं करवाते हैं। सरकारी विभागों पर ही करोड़ों रुपये का टैक्स बकाया है। अब जो एनडीसी के माध्यम से आय हो रही है उसी से यह सब कार्य कर रहे हैं। हम पहले ही बहुत सारे कार्य संभाल रहे हैं। हम गोशाला को अपने स्तर पर कुछ सुविधा उपलब्ध करवा सकते हैं, लेकिन पशुबाड़ा बनाने की जिम्मेदारी हमारी नहीं है। हर कार्य नगर निगम कैसे संभाल सकता है।

एक अन्य याचिका भी पहुंची
बेसहारा पशुओं के मामले में स्थायी लोक अदालत में चल रहे मामले की दौरान एक नई याचिका मनदीप चौहान व उनकी साथी की ओर दाखिल की गई। उन्होंने अदालत में कहा कि पशुओं की व्यवस्था बनाने के लिए प्रत्येक गांव में गोचरान जमीन होती है। जो कि राजस्व विभाग के पास होती है, इस जमीन पर पशुओं को रखने की व्यवस्था की जा सकती है। लेकिन स्थायी लोक अदालत ने इस याचिका को स्वीकार नहीं किया।
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