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Ambala News: एक करोड़ के रैन बसेरे में नहीं चैन, जवाब तलब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 19 Sep 2023 01:56 AM IST
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There is no peace in the night shelter worth one crore, answers sought
अंबाला। छावनी में बने रैन बसेरे में कई गड़बड़ियां देखने को मिलीं। करीब एक करोड़ रुपये से बने इस बसेरे में अधिकारिक रूप से 184 बेड का प्रावधान है। इसमें से 92 बेड महिलाओं के लिए और 92 पुरुषों के लिए हैं। यहां हैरानी की बात यह है कि मौके पर केवल 72 बेड ही मिले। इतना ही नहीं रैन बसेरा होने के बावजूद लोग सड़कों पर सोते मिले।
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इस मामले में कुछ समय पहले जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सौरभ गुप्ता ने संज्ञान लेते हुए प्राधिकरण के अधिवक्ताओं से इसकी जांच कराई थी। इसके बाद प्रशासन के अधिकारियों को पत्र लिखा था, मगर इसमें अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इधर, इस मामले की जब रिपोर्ट शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय को दी तो इस पर स्टेट अर्बन डिवेलपमेंट अथॉरिटी ने नगर निगम कमिश्नर से जवाब मांगा है।
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वकीलों को मिलीं ये कमियां
-रैन बसेरा में 184 बेड का प्रावधान है, मगर मौके पर 72 मिले।

-रैन बसेरा का गेट पूूरी तरह से टूटा है।
-पेयजल के लिए आरओ मशीन संचालित नहीं थी।
-गीजर और बिजली की फिटिंग बुरी हालत में मिली।
-सोलर सिस्टम पूरी तरह से टूटा था और खराब हो रहा है।

-अग्निशमन यंत्रों की एक्सपायरी तिथि निकल चुकी है।
-शौचालय में यूरिनल के पाइप टूटे थे, गंदगी विद्यमान थी।
-सेप्टिक टैंक का सीमेंट से बना ढक्कन भी टूटा हुआ मिला।

अर्से बाद भी बरकरार हैं कमियां

हैरानी की बात है कि अंबाला छावनी में लाखों रुपये से बना स्थायी रैन बसेरा की जब कमियां प्रशासन के संज्ञान में लाई गई तो सभी सोते रहे। मामले में जब अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो ये कमियां ठीक होने के स्थान पर बढ़ी मिली। यहां पर महिला वार्ड का मुख्य दरवाजा और पुरुष सेक्शन में डोरमेटरी का दरवाजा टूटा था। महिलाओं के भवन में इन्वर्टर भी खराब थे। पुरुषों के लिए बनाए भवन में शौचालय बुरी अवस्था में थे। यहां दो आरओ लगे हैं और दोनों खराब।
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इस विभाग की है जिम्मेदारी
रैन बसेरे में व्यवस्थाओं को सुनिश्चित कराने की नगर निगम की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद नगर निगम दूसरे कार्यों की तरह लाखों रुपये की लागत से बने रैन बसेरे को भी अनदेखा कर रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संज्ञान लेने के बावजूद नगर निगम का ध्यान इस पर नहीं गया। अभी तक अव्यवस्थाएं जस की तस हैं।
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