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Ambala News: मतदान कम होने के कई कारण, अपडेट वोटर लिस्ट नहीं लेने पर लगाएंगे याचिका
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सिटी में राजकीय आईटीआई में खाली पड़ा मतदान केंद्र। संवाद
अंबाला सिटी। शहर में नगर निगम के मेयर पद पर उपचुनाव में मतदान प्रतिशत 32 फीसद रहा। इतने कम प्रतिशत रहने से सभी हैरान हैं। शहर के लोग इसके कई कारण बता रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी के पति और अधिवक्ता संदीप सचदेवा ने इस मामले को कोर्ट ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग को विधानसभा में बनी नई अपडेटेड मतदाता सूची लेनी चाहिए थी। मगर उन्होंने जो सूची ली उसमें विधानसभा चुनाव के दौरान बने नए वोटरों की जिक्र ही नहीं था। ऐसे में कई नए मतदाताओं को वोटिंग का अधिकार नहीं मिला। इसी काे लेकर उन्होंने बताया कि चुनाव संपन्न होने के बाद वह काेर्ट में राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका दायर करेंगे। हैरानी की बात तो यह है कि वर्ष 2013 और 2020 के चुनाव भी अवकाश के दिन हुए थे तब भी शहर में इतना कम मतदान प्रतिशत कभी नहीं रहा।
कम कार्यकाल और क्रिकेट मैच रहा कारण
समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े राकेश मक्कड़ बताते हैं कि शहर में इतना मत प्रतिशत पहले कभी नहीं देखा। इसके प्रमुख कारणों में 10 महीने का कार्यकाल भी हो सकता है। इस कारण से लोगों ने रुचि नहीं दिखाई। इसके अलावा प्रशासन की तरफ से मतदाताओं को जागरूक करने का अभियान चलाना चाहिए था वह भी नहीं चल सका। कई लोगों को तो पता ही नहीं था कि मतदान कब हैं। इसके साथ ही रविवार को अवकाश का दिन था तो वहीं क्रिकेट मैच का प्रसारण भी हो रहा था इसने भी मतदान को प्रभावित किया।
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परिवार सहित किया मतदान का बहिष्कार
अंबाला सिटी के निवासी और अधिवक्ता हेमंत कुमार ने बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग व रिटर्निंग अफसर को लिखा था कि उन्हें व शहर के कई मतदाताओं को फोटो युक्त मतदान पर्ची नहीं मिली है। यह पर्चियां बीएलओ के माध्यम से वितरित की जाती हैं। मगर पत्र लिखने पर भी चुनाव आयोग ने संज्ञान नहीं लिया। ऐसे में मैंने परिवार सहित चुनाव से बहिष्कार किया। चुनाव आयोग को गंभीरता से नियमों का पालन कराना चाहिए था। 10 महीने के कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए थे। इसमें सरकारी धन जाया ही हुआ।
कपड़ा मार्केट के कर्मचारी रहे असमंजस में
प्रशासन ने मतदान के दिन यानी रविवार को सभी व्यापारिक और अन्य प्रतिष्ठानों के अवकाश रखने के निर्देश दिए थे। मगर इसके बावजूद शहर में कपड़ा मार्केट में सुबह से कई दुकानें खोल दीं। कर्मचारियों को बुला लिया गया। इसके बाद पुलिस ने दोपहर को दुकानों को बंद करना शुरू किया तो कर्मचारी अपने घर चले गए। शहर की कपड़ा मार्केट में कम से कम 10 हजार कर्मचारी कार्य करते हैं। ऐसे में उनके सामने असमंजस के हालात रहे।
मतदान से दूर रहे 1.31 लाख मतदाता
शहर में मेयर पद पर उपचुनाव में हुए मतदान ने सभी को चौंका दिया। निगम के अंतर्गत आने वाले 20 वार्ड में 193260 मतदाताओं में से 61 801 ने ही मतदान दिया, जबकि 131459 मतदाताओं ने मतदान ही नहीं किया। शहर में सुबह आठ से शाम छह बजे तक 32.0 प्रतिशत ही मतदान हुआ।
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उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग को विधानसभा में बनी नई अपडेटेड मतदाता सूची लेनी चाहिए थी। मगर उन्होंने जो सूची ली उसमें विधानसभा चुनाव के दौरान बने नए वोटरों की जिक्र ही नहीं था। ऐसे में कई नए मतदाताओं को वोटिंग का अधिकार नहीं मिला। इसी काे लेकर उन्होंने बताया कि चुनाव संपन्न होने के बाद वह काेर्ट में राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका दायर करेंगे। हैरानी की बात तो यह है कि वर्ष 2013 और 2020 के चुनाव भी अवकाश के दिन हुए थे तब भी शहर में इतना कम मतदान प्रतिशत कभी नहीं रहा।
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कम कार्यकाल और क्रिकेट मैच रहा कारण
समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े राकेश मक्कड़ बताते हैं कि शहर में इतना मत प्रतिशत पहले कभी नहीं देखा। इसके प्रमुख कारणों में 10 महीने का कार्यकाल भी हो सकता है। इस कारण से लोगों ने रुचि नहीं दिखाई। इसके अलावा प्रशासन की तरफ से मतदाताओं को जागरूक करने का अभियान चलाना चाहिए था वह भी नहीं चल सका। कई लोगों को तो पता ही नहीं था कि मतदान कब हैं। इसके साथ ही रविवार को अवकाश का दिन था तो वहीं क्रिकेट मैच का प्रसारण भी हो रहा था इसने भी मतदान को प्रभावित किया।
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परिवार सहित किया मतदान का बहिष्कार
अंबाला सिटी के निवासी और अधिवक्ता हेमंत कुमार ने बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग व रिटर्निंग अफसर को लिखा था कि उन्हें व शहर के कई मतदाताओं को फोटो युक्त मतदान पर्ची नहीं मिली है। यह पर्चियां बीएलओ के माध्यम से वितरित की जाती हैं। मगर पत्र लिखने पर भी चुनाव आयोग ने संज्ञान नहीं लिया। ऐसे में मैंने परिवार सहित चुनाव से बहिष्कार किया। चुनाव आयोग को गंभीरता से नियमों का पालन कराना चाहिए था। 10 महीने के कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए थे। इसमें सरकारी धन जाया ही हुआ।
कपड़ा मार्केट के कर्मचारी रहे असमंजस में
प्रशासन ने मतदान के दिन यानी रविवार को सभी व्यापारिक और अन्य प्रतिष्ठानों के अवकाश रखने के निर्देश दिए थे। मगर इसके बावजूद शहर में कपड़ा मार्केट में सुबह से कई दुकानें खोल दीं। कर्मचारियों को बुला लिया गया। इसके बाद पुलिस ने दोपहर को दुकानों को बंद करना शुरू किया तो कर्मचारी अपने घर चले गए। शहर की कपड़ा मार्केट में कम से कम 10 हजार कर्मचारी कार्य करते हैं। ऐसे में उनके सामने असमंजस के हालात रहे।
मतदान से दूर रहे 1.31 लाख मतदाता
शहर में मेयर पद पर उपचुनाव में हुए मतदान ने सभी को चौंका दिया। निगम के अंतर्गत आने वाले 20 वार्ड में 193260 मतदाताओं में से 61 801 ने ही मतदान दिया, जबकि 131459 मतदाताओं ने मतदान ही नहीं किया। शहर में सुबह आठ से शाम छह बजे तक 32.0 प्रतिशत ही मतदान हुआ।