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सनातन धर्म के मूल में चार वेद है : चैतन्य महाराज
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श्री कबीर जन कल्याण सेवाश्रम नगर खेड़ा मोती नगर में शिव महापुराण व कलश यात्रा निकाली।
अंबाला सिटी। श्री कबीर जन कल्याण सेवाश्रम नगर खेड़ा मोती नगर में श्री राधे श्याम ठाकुर परिवार सेवा समिति व भक्तों के सहयोग से श्री शिवमहापुराण सप्ताह अमर कथा के प्रथम दिवस का आयोजन किया गया।
प्रथम दिन शिव महापुराण व कलश यात्रा निकाली गई। इस मौके पर ढोल नगाड़े व हर-हर महादेव की जयकारों से वातावरण गूंज उठा। कथा स्थल पर पंडित रविंद्रनाथ तिवारी ने मंत्रोच्चारण पाठ करते हुए कलश स्थापना कराई। कथा यजमान आयुश, बीना, शिवशंकर चौरसिया, सोनिया चौरसिया व भगवान दास ने मंच पर पोथी पूजन कर कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य महाराज का तिलक टीका व पुष्प माला पहना कर स्वागत किया।
शिव कथा के प्रथम दिवस आचार्य चैतन्य महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की पहचान वेद से है। वेद सनातन हैं। चारों वेदों में एक लाख मंत्र है। वेदों के ज्ञान को सरलीकृत करने के लिए भगवान वेदव्यास ने प्रस्थानत्रय ग्रंथ ब्रम्सूत्र, उपनिषद व श्रीमद्भगवत गीता ग्रंथ की रचना की। ऋषि ने भविष्य को देखते हुए पुराणों की रचना की। पुराण 18 हैं। शिवपुराण का क्रम चौथा है। इसमें सात संहिता चौबीस हजार श्लोक व इसमें कुल चार सौ चौसठ अध्याय है।
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स्कंध पुराण के अंतर्गत सात अध्याय में शिवमहापुराण की महात्म्य कथा है। आचार्य चैतन्य महाराज ने देवराज, बिंदुक व चंचुला की कथा श्रवण करवाए। इस अवसर पर स्वामी ज्ञानदेव महाराज भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी भक्तों को संबोधित कर कथा श्रवण की महिमा बताई। कथा में मास्टर मदन गोपाल शर्मा, नरेश कुमार, वेद प्रकाश, नीलकमल शर्मा, ऊषा गोयल, रूबी शर्मा, रीना पौसवाल, पूजा गर्ग, यशोदा, कांता, कविता गुप्ता, नीतू गुप्ता, राजरानी जोशी आदि उपस्थित रहे।
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प्रथम दिन शिव महापुराण व कलश यात्रा निकाली गई। इस मौके पर ढोल नगाड़े व हर-हर महादेव की जयकारों से वातावरण गूंज उठा। कथा स्थल पर पंडित रविंद्रनाथ तिवारी ने मंत्रोच्चारण पाठ करते हुए कलश स्थापना कराई। कथा यजमान आयुश, बीना, शिवशंकर चौरसिया, सोनिया चौरसिया व भगवान दास ने मंच पर पोथी पूजन कर कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य महाराज का तिलक टीका व पुष्प माला पहना कर स्वागत किया।
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शिव कथा के प्रथम दिवस आचार्य चैतन्य महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की पहचान वेद से है। वेद सनातन हैं। चारों वेदों में एक लाख मंत्र है। वेदों के ज्ञान को सरलीकृत करने के लिए भगवान वेदव्यास ने प्रस्थानत्रय ग्रंथ ब्रम्सूत्र, उपनिषद व श्रीमद्भगवत गीता ग्रंथ की रचना की। ऋषि ने भविष्य को देखते हुए पुराणों की रचना की। पुराण 18 हैं। शिवपुराण का क्रम चौथा है। इसमें सात संहिता चौबीस हजार श्लोक व इसमें कुल चार सौ चौसठ अध्याय है।
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स्कंध पुराण के अंतर्गत सात अध्याय में शिवमहापुराण की महात्म्य कथा है। आचार्य चैतन्य महाराज ने देवराज, बिंदुक व चंचुला की कथा श्रवण करवाए। इस अवसर पर स्वामी ज्ञानदेव महाराज भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी भक्तों को संबोधित कर कथा श्रवण की महिमा बताई। कथा में मास्टर मदन गोपाल शर्मा, नरेश कुमार, वेद प्रकाश, नीलकमल शर्मा, ऊषा गोयल, रूबी शर्मा, रीना पौसवाल, पूजा गर्ग, यशोदा, कांता, कविता गुप्ता, नीतू गुप्ता, राजरानी जोशी आदि उपस्थित रहे।