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Ambala News: वन्य प्राणी विभाग के पास खुद का पिंजड़ा नहीं, कुरुक्षेत्र से मंगाया
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वन्य प्राणी विभाग का कार्यालय। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। धूलकोट में बीते सात दिन से वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी तेंदुए जैसे जानवर की तलाश में भटक रहे हैं पर अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है। विभागीय दावे के अनुसार इन सात दिनों में न तो किसी जानवर का शिकार हुआ है और न ही कोई जानवर पिंजड़े में फंसा है।
इन परिस्थितियों के बावजूद रोजाना टीम हर्बल पार्क में लगाए अपने पिंजरे को देखने जाती है। विभाग द्वारा चारे के रूप में रखे मुर्गे सही सलामत मिलते हैं, ऐसे में इस घटना ने वन्य प्राणी विभाग को परेशान कर दिया।
सबसे हैरानी की बात तो यह है कि जिस टीम के कंधों पर जानवर को पकड़ने की जिम्मेदारी है उस टीम में सिर्फ एक इंस्पेक्टर ही हैं। उनके पास न तो गार्ड है और न ही सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम। यहां तक कि तेंदुआ जैसा जानवर पकड़ने के लिए वन्य प्राणी विभाग के पास पिंजरा तक नहीं है। अंबाला के अधिकारियों को पिंजरा भी कुरुक्षेत्र के पिपली से मंगाना पड़ा। यहां तक कि रात्रि को कोई जानवर विभागीय अधिकारी बचा भी लें तो उनके पास उसे रखने के लिए बाड़ा तक नहीं है। लिहाजा अपने कार्यालय में जानवर को छोड़ते हैं। अगले दिन दोबारा से उसे पकड़कर जंगल में छोड़ने जाते हैं। ऐसे में दो बार टीम को जानवर पकड़ना पड़ जाता है।
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अंबाला सिटी। धूलकोट में बीते सात दिन से वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी तेंदुए जैसे जानवर की तलाश में भटक रहे हैं पर अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है। विभागीय दावे के अनुसार इन सात दिनों में न तो किसी जानवर का शिकार हुआ है और न ही कोई जानवर पिंजड़े में फंसा है।
इन परिस्थितियों के बावजूद रोजाना टीम हर्बल पार्क में लगाए अपने पिंजरे को देखने जाती है। विभाग द्वारा चारे के रूप में रखे मुर्गे सही सलामत मिलते हैं, ऐसे में इस घटना ने वन्य प्राणी विभाग को परेशान कर दिया।
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सबसे हैरानी की बात तो यह है कि जिस टीम के कंधों पर जानवर को पकड़ने की जिम्मेदारी है उस टीम में सिर्फ एक इंस्पेक्टर ही हैं। उनके पास न तो गार्ड है और न ही सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम। यहां तक कि तेंदुआ जैसा जानवर पकड़ने के लिए वन्य प्राणी विभाग के पास पिंजरा तक नहीं है। अंबाला के अधिकारियों को पिंजरा भी कुरुक्षेत्र के पिपली से मंगाना पड़ा। यहां तक कि रात्रि को कोई जानवर विभागीय अधिकारी बचा भी लें तो उनके पास उसे रखने के लिए बाड़ा तक नहीं है। लिहाजा अपने कार्यालय में जानवर को छोड़ते हैं। अगले दिन दोबारा से उसे पकड़कर जंगल में छोड़ने जाते हैं। ऐसे में दो बार टीम को जानवर पकड़ना पड़ जाता है।
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