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Ambala News: नदियों में पानी घटा, लोगों की परेशानी नहीं

Sat, 06 Sep 2025 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Sat, 06 Sep 2025 12:58 AM IST
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The water in the rivers has decreased, people are not facing any problem
टांगरी के पास बनी कॉलोनी में गाद व जलभराव। संवाद - फोटो : mathura
संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला। बाढ़ जैसी आपदा आने के बाद हालांकि अब नदियों का रौद्र रूप शांत होने लगा है, पर अभी लोगों की परेशानियां कम नहीं हुई हैं। टांगरी नदी के भीतर बनी अधिकांश कॉलोनियों में पानी उतर गया है। अब रह गया है तो गाद, जो लोगों की मुसीबतें बढ़ा रही है। शुक्रवार को टांगरी के पास की काॅलोनियों में यही हालात देखने को मिले। टांगरी नदी में बनी कॉलोनियों में जीवन पटरी पर आने लगा है। यहां पर लोग घरों से गाद निकालते दिखे। कुछ घरों में भी तक दो फुट तक गाद है, जिसे निकालने के लिए लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें। भले ही टांगरी नदी का पानी उतर गया हो मगर लोग अभी भी कॉलोनियों के पास बांध की सड़क पर सड़क पर दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि सही मायने मेें प्रशासन को अब अधिक मदद करनी चाहिए, ताकि मिट्टी निकल सके और उनकी जिंदगी पटरी पर आ जाए।



स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से भर रहे पेट

टांगरी के पास बनीं 40 से अधिक कॉलोनियों में जो लोग समृद्ध हैं, उन्हाेंने तो अपने घर में चूल्हा जला लिया है, मगर यहां एक बड़ा तबका गरीबी रेखा में जीवन यापन करने वालों का भी है। यह लोग स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से अपना व अपने परिवार का पेट भर रहे हैं। किसी भी मददगार की गाड़ी भोजन या पानी वितरित करने आती है तो लोग उस ओर दौड़ लगा देते हैं। भीड़ इतनी एकत्रित हो जाती है कि स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े लोगों को हर हाथ तक भोजन के पैकेट या पानी पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। यहां तक कि जीवन रक्षक दवाओं को भी लोग इसी प्रकार ले रहे हैं।
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सड़क से नहीं हटा रहे सामान

आपदा ने लोगों के मन में ऐसा डर बैठाया है कि कुछ लोग अभी भी अपने सामान को सड़क पर ही रखे हुए हैं। वह घर जाना ही नहीं चाह रहे हैं, पूछाे तो कहते हैं कि नदी का पानी फिर से न आ जाए, इसके साथ ही पानी निकलने के बाद कॉलोनियों में अब दुकानें लोग खोल रहे हैं जिससे लोग जरूरत की चीजें खरीद सकें।
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मैं बिहार का रहने वाला हूं। अंबाला में दिहाड़ी मजदूरी करता हूं। घर में पानी भरने के बाद काम पर भी नहीं जा पा रहा हूं। समझ नहीं आ रहा कि अब परिवार का कैसे पेट पालूंगा। किराये के मकान में काफी सामान भी खराब हो गया है।
-जमशेद



काम की तलाश में अंबाला आया था। यहां बाढ़ जैसे हालात ने झकझोर दिया है। अब काम तलाशने की जद्दोजहद होगी। एक दो दिन से सड़क पर ही रात गुजार रहा हूं। यहां तो नींद भी ढंग से नहीं आती है।

-सोमित

टांगरी के पास बनी कॉलोनी में गाद व जलभराव। संवाद

टांगरी के पास बनी कॉलोनी में गाद व जलभराव। संवाद- फोटो : mathura

टांगरी के पास बनी कॉलोनी में गाद व जलभराव। संवाद

टांगरी के पास बनी कॉलोनी में गाद व जलभराव। संवाद- फोटो : mathura

टांगरी के पास बनी कॉलोनी में गाद व जलभराव। संवाद

टांगरी के पास बनी कॉलोनी में गाद व जलभराव। संवाद- फोटो : mathura

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