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डेयरी कांप्लेक्स की कहानी, उठा गोबर, न निकला पानी
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अंबाला सिटी। खतौली डेयरी कांप्लेक्स के संचालकों की समस्या का समाधान उपायुक्त भी नहीं निकाल पा रहे हैं। डेयरी कांप्लेक्स के संचालक उन्हें समस्याओं को लेकर शिकायत दे चुके हैं। इसके बावजूद न तो डेयरी कांप्लेक्स से गोबर उठान का हल हुआ और न ही पानी निकासी की समस्या का समाधान अभी तक हो सका है। यहां लोग कई-कई फीट जमा गोबर में से निकलकर जाने के लिए मजबूर हैं।
हालात यह हैं कि अधिकतर समय लोग नंगे पांव ही घरों से निकलते हैं फिर साफ रास्ते पर आकर पैर धोकर जूते पहनते हैं। यह स्थिति अभी की नहीं बल्कि जब से डेयरी कांप्लेक्स शुरू हुआ है, तभी से जारी है। इस कारण 105 डेयरी संचालक परेशानी झेल रहे हैं। डेयरी संचालकों का कहना है कि अभी तक हालात जस के तस बने हुए हैं। वहीं इस संबंध में उपायुक्त से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनकी ओर से कोई भी जवाब नहीं आया। दूसरी ओर, खतौली में रह रही दसवीं कक्षा की छात्रा नैना ने उस समय गंदगी में खड़े होकर वीडियो वायरल किया था। उसके बाद प्रशासन कुछ हरकत में आया, परंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।
जानिए कब क्या हुआ
2001 में करवाए गए सर्वे के मुताबिक सिटी में उस वक्त 217 डेयरियां थी। वर्ष 2003 में इन्हें सिटी से बाहर ले जाने की योजना तैयार हुई। 2004 में सिटी एमसीए कार्यालय में पार्षदों की मौजूदगी में प्लॉटों का ड्रा किया गया। गांव खतौली में डेयरी के लिए 148 प्लॉट और कांवली में 69 प्लाट काटे गए। आज खतौली में 105 डेयरी चल रही हैं और कांवली में मात्र 20 ही शिफ्ट हो सकी हैं।
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बड़े वादे किए थे
खतौली में पानी निकासी और गोबर की समस्या का हल नहीं हो रहा है। जब यहां से शिफ्ट किया गया था तब लुभावने वादे किए गए थे। अब स्थिति ऐसी है कि यह जगह हमारे लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
- कुलदीप सिंह गुल्लू।
प्रशासन ले निर्णय
कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत दे चुके हैं, परंतु अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। हम तो इस गंदगी से परेशान हो चुके हैं। विभाग को इसके समाधान के लिए कोई निर्णय लेना चाहिए।
- नीतिन।
आखिर करें क्या
हर संभव प्रयास कर लिया है। गोबर और गंदगी के कारण हमारी कई गाड़ियां खराब हो चुकी हैं। रात के समय तो और अधिक परेशानी आती है। समझ नहीं आ रहा है कि आखिर क्या करें। कोई तो हल निकाले।
- जगमोहन सिंह।
आम बात हो गई
गोबर और गंदगी अब हमारे लिए आम बात हो गई है। प्रशासन इसको लेकर कोई भी समाधान नहीं निकाल सकता। शिकायतें दी गई और कई बार गुहार भी लगाई, परंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।
- लक्की बतरा।
हमारी ओर से पंप भेजे गए हैं जिससे पानी की निकासी करवाई जा सके। हमारी ओर से हर संभव प्रयास किया जा रहा है, ताकि डेयरी संचालकों को परेशानी न हो।
- महिपाल सिंह, मुख्य कार्यकारी अभियंता, नगर निगम।
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हालात यह हैं कि अधिकतर समय लोग नंगे पांव ही घरों से निकलते हैं फिर साफ रास्ते पर आकर पैर धोकर जूते पहनते हैं। यह स्थिति अभी की नहीं बल्कि जब से डेयरी कांप्लेक्स शुरू हुआ है, तभी से जारी है। इस कारण 105 डेयरी संचालक परेशानी झेल रहे हैं। डेयरी संचालकों का कहना है कि अभी तक हालात जस के तस बने हुए हैं। वहीं इस संबंध में उपायुक्त से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनकी ओर से कोई भी जवाब नहीं आया। दूसरी ओर, खतौली में रह रही दसवीं कक्षा की छात्रा नैना ने उस समय गंदगी में खड़े होकर वीडियो वायरल किया था। उसके बाद प्रशासन कुछ हरकत में आया, परंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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जानिए कब क्या हुआ
2001 में करवाए गए सर्वे के मुताबिक सिटी में उस वक्त 217 डेयरियां थी। वर्ष 2003 में इन्हें सिटी से बाहर ले जाने की योजना तैयार हुई। 2004 में सिटी एमसीए कार्यालय में पार्षदों की मौजूदगी में प्लॉटों का ड्रा किया गया। गांव खतौली में डेयरी के लिए 148 प्लॉट और कांवली में 69 प्लाट काटे गए। आज खतौली में 105 डेयरी चल रही हैं और कांवली में मात्र 20 ही शिफ्ट हो सकी हैं।
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बड़े वादे किए थे
खतौली में पानी निकासी और गोबर की समस्या का हल नहीं हो रहा है। जब यहां से शिफ्ट किया गया था तब लुभावने वादे किए गए थे। अब स्थिति ऐसी है कि यह जगह हमारे लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
- कुलदीप सिंह गुल्लू।
प्रशासन ले निर्णय
कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत दे चुके हैं, परंतु अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। हम तो इस गंदगी से परेशान हो चुके हैं। विभाग को इसके समाधान के लिए कोई निर्णय लेना चाहिए।
- नीतिन।
आखिर करें क्या
हर संभव प्रयास कर लिया है। गोबर और गंदगी के कारण हमारी कई गाड़ियां खराब हो चुकी हैं। रात के समय तो और अधिक परेशानी आती है। समझ नहीं आ रहा है कि आखिर क्या करें। कोई तो हल निकाले।
- जगमोहन सिंह।
आम बात हो गई
गोबर और गंदगी अब हमारे लिए आम बात हो गई है। प्रशासन इसको लेकर कोई भी समाधान नहीं निकाल सकता। शिकायतें दी गई और कई बार गुहार भी लगाई, परंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।
- लक्की बतरा।
हमारी ओर से पंप भेजे गए हैं जिससे पानी की निकासी करवाई जा सके। हमारी ओर से हर संभव प्रयास किया जा रहा है, ताकि डेयरी संचालकों को परेशानी न हो।
- महिपाल सिंह, मुख्य कार्यकारी अभियंता, नगर निगम।