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Ambala News: लखनौर साहिब में संगत ने टेका माथा,बच्चों की हुई दस्तारबंदी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Oct 2025 01:40 AM IST
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The Sangat bowed their heads at Lakhnaur Sahib, children were turbaned.
गुरुद्वारा लखनौर साहिब में समागम में कीर्तन करते हुए ढाडी जत्था। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला सिटी। ऐतिहासिक गुरुद्वारा पातशाही दसवीं श्री लखनौर साहिब में गुरुवार को दशहरा पर्व पर वार्षिक जोड़ मेला आयोजित किया गया। इस मौके पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के दस्तारबंदी दिवस के रूप में दस्तारबंदी समागम भी आयोजित किया गया।
सुबह 9 बजे श्री अखंड पाठ साहिब का भोग डाला गया। गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के लिए संगत की भीड़ जमा रही। संगत ने गुरुद्वारा साहिब में पहुंचकर सरोवर में स्नान किया और बच्चों की दस्तारबंदी भी की गई। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के मामा श्री कृपाल चंद ने बाल अवस्था में गुरु साहिब की दस्तारबंदी की रस्म भी इसी ऐतिहासिक स्थान पर की थी। इसी उपलक्ष्य में दशहरे वाले दिन को दस्तारबंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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प्रसिद्ध रागियों ने संगत को किया निहाल : समागम में पंथ के प्रसिद्ध रागी, ढाडी व कथावाचक संगत को गुरुबाणी कीर्तन से निहाल किया, जिसमें श्री अमृतसर साहिब से ज्ञानी परविंद्रपाल सिंह, ढाडी जत्था बीबी जसबीर कौर जस, ढाडी जत्था सुखचैन सिंह शीतल, ज्ञानी सतनाम सिंह बल, ज्ञानी सिमरनजीत सिंह प्रचार एचएसजीएम कमेटी, मनप्रीत सिंह जनसुआ, हजूरी रागी जत्था अमृतपाल सिंह संगत को गुरुबाणी से निहाल किया।
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गुरुद्वारा साहिब में रक्तदान शिविर भी लगाया गया, जिसमें संगत ने रक्तदान किया। दशहरे के उपलक्ष्य में मेला भी लगा। यहां पुलिसकर्मी भी तैनात रहे।
संगत ने गुरुद्वारा साहिब में पहुंचकर गुरु जी की निशानियों के किए दर्शन : गुरुद्वारा साहिब में हरियाणा-पंजाब सहित आसपास की जगहों से संगत ने पहुंचकर माथा टेककर आशीर्वाद लिया।

संगत ने श्री माता गुजरी कौर और गुरुगोबिंद सिंह जी की यहां रखी हुई निशानियों के भी दर्शन किए। गुरुद्वारा लखनौर साहिब में श्री गुरु गोबिंद सिंह व माता गुजरी का पलंग भी रखा गया है। गुरु गोबिंद सिंह का पलंग ऐसा है, जोकि फोल्ड हो जाता है। गुरु गोबिंद सिंह अपनी यात्रा के दौरान पलंग को फोल्ड कर लेकर जाते थे, इसके अलावा गुरुद्वारा साहिब में गुरु गोबिंद सिंह के दो तीर, एक कटार, एक जमदाड़, एक ढाल, माता गुजरी जी की दो परांत व हुकुमनामा सहेजकर रखा हुआ है। यहां बेबे नानकी जी के पलंग के पावे भी रखे हुए हैं।

गुरुद्वारा लखनौर साहिब में समागम में कीर्तन करते हुए ढाडी जत्था। संवाद

गुरुद्वारा लखनौर साहिब में समागम में कीर्तन करते हुए ढाडी जत्था। संवाद

गुरुद्वारा लखनौर साहिब में समागम में कीर्तन करते हुए ढाडी जत्था। संवाद

गुरुद्वारा लखनौर साहिब में समागम में कीर्तन करते हुए ढाडी जत्था। संवाद

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