{"_id":"3209c6ea68411ebff443bb24ecfe82e8","slug":"the-postman-s-strike-paralyzed-the-function","type":"story","status":"publish","title_hn":"डाकसेवकों की हड़ताल से कामकाज ठप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डाकसेवकों की हड़ताल से कामकाज ठप
अमर उजाला करनाल
Updated Fri, 21 Feb 2014 11:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
असंध। अखिल भारतीय ग्रामीण डाक सेवक यूनियन के आह्वान पर चल रही ग्रामीण डाक सेवकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चौथे दिन शुक्रवार को कर्मचारियों ने रोष जताया। इस दौरान ग्रामीण अंचल में डाक शाखाओं पर कामकाज पूरी तरह ठप रहा। हड़ताल के चलते डाक वितरण एवं डाक के जरिए वित्तीय लेनदेन प्रभावित रहा व लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
नगर स्थित डाकघर के सामने शुक्रवार को एकत्रित ग्रामीण डाक सेवकों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करते हुए मांगें माने जाने तक हड़ताल व संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। डाक सेवक रामबीर शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक को संबोधित करते यूनियन के अजायब सिंह ने कहा कि ग्रामीण इलाके में लगे डाक सेवक तीन दशक से महज चार से पांच हजार रुपये महीना मानदेय पर काम कर रहे हैं, जो कि देश के राज्यों द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। उन्होंने चेताया कि अब यह शोषण व दमन की नीति बंद करवाने के लिए डाक सेवक भी आंदोलन की राह पर उतर आए हैं। इस मौके पर सूबे सिंह, श्यामलाल, राजपाल, कर्ण सिंह, राजबीर व रतन सिंह ने भी विचार रखे।
विज्ञापन
नगर स्थित डाकघर के सामने शुक्रवार को एकत्रित ग्रामीण डाक सेवकों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करते हुए मांगें माने जाने तक हड़ताल व संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। डाक सेवक रामबीर शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक को संबोधित करते यूनियन के अजायब सिंह ने कहा कि ग्रामीण इलाके में लगे डाक सेवक तीन दशक से महज चार से पांच हजार रुपये महीना मानदेय पर काम कर रहे हैं, जो कि देश के राज्यों द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। उन्होंने चेताया कि अब यह शोषण व दमन की नीति बंद करवाने के लिए डाक सेवक भी आंदोलन की राह पर उतर आए हैं। इस मौके पर सूबे सिंह, श्यामलाल, राजपाल, कर्ण सिंह, राजबीर व रतन सिंह ने भी विचार रखे।
विज्ञापन