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Ambala News: पंख लगने से पहले दम तोड़ रही योजना, प्रशिक्षण के बाद घर बैठीं ड्रोन दीदी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Feb 2026 01:51 AM IST
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The plan is dying before it can take off, Drone Didi is back home after training.
जिले की दो दीदीयों को दिया गया ड्रोन। संवाद
- ड्रोन के भारी भरकम वजन से खेत में ले जाना मुश्किल, बैटरी रिचार्ज के लिए आना पड़ता गांव
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धर्म सिंह

जलबेड़ा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नमो ड्रोन दीदी योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। ड्रोन दीदी बनकर तैयार हुईं जिले की दो महिला ड्राेन पायलट घर बैठी हैं जबकि इस योजना से महिलाओं को तकनीकी रूप से सशक्त कर कृषि क्षेत्र में क्रांति लाना था। ड्रोन दीदी के अनुसार, सबसे बड़ी समस्या ड्रोन के भारी भरकम वजन और बैटरी बैकअप की है। उसे खेत में ले जाना बड़ी चुनौती है। वहीं किसान भी ड्रोन से स्प्रे करवाने में आनाकानी कर रहे हैं।
योजना के दम तोड़ने का प्रमुख कारण जागरूकता की कमी, तकनीकी खामियां और प्रशासनिक अनदेखी है। मार्च 2024 में बड़े उत्साह के साथ शुरू हुई इस योजना के तहत जिले की दो महिलाओं का चयन स्वयं सहायता समूह के माध्यम से किया गया था, जिन्हें कृभको कंपनी की ओर से ड्रोन सौंपे गए थे। आज स्थिति यह है कि ड्रोन दीदी काम छोड़ने को मजबूर हैं।
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एक एकड़ में स्प्रे करने के बाद बैटरी हो जाती है खत्म



कलेरां गांव निवासी ड्रोन दीदी गुरजीत कौर ने बताया कि शुरुआती जोश जल्द निराशा में बदल गया। सबसे बड़ी समस्या ड्रोन के भारी भरकम वजन और बैटरी बैकअप की है। उनके अनुसार, ड्रोन इतना वजनी है कि उसे खेत तक ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं है। वहीं बैटरी का बैकअप इतना कम है कि एक एकड़ में स्प्रे करने के बाद बैटरी खत्म हो जाती है। रिचार्ज करने के लिए उन्हें बार-बार वापस गांव आना पड़ता है, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी होती है।
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दो साल तक खराब पड़े रहे ड्रोन, नहीं मिला मैकेनिक



जिले में ड्रोन रिपेयर सेंटर न होने के कारण मामूली खराबी भी काम में हफ्तों का रोड़ा अटका देती है। जनसुई निवासी ड्रोन दीदी दलजीत कौर ने बताया कि उनके ड्रोन खराब होने के बाद करीब दो साल तक उन्हें ठीक करने कोई नहीं आया। बार-बार कंपनी को ईमेल और रिमाइंडर भेजने के बाद अब जाकर ड्रोन ठीक हुए हैं और बैटरी का नया सेट उपलब्ध कराया गया है। योजना के ठप होने का एक बड़ा कारण किसानों की पारंपरिक सोच भी है। किसान जागरूकता के अभाव में ड्रोन से स्प्रे करवाने में आनाकानी कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि एक एकड़ फसल के लिए मात्र 10 लीटर पानी पर्याप्त नहीं है। वह अभी भी पुराने तरीके से अधिक पानी के साथ स्प्रे करने पर भरोसा करते हैं। ड्रोन दीदी का कहना है कि विभाग को गांवों में शिविर लगाकर किसानों को ड्रोन तकनीक के फायदों के बारे में समझाना चाहिए।


देखभाल ऋण का किया जाएगा प्रावधान



जिला परिषद के सीईओ गगनदीप ने बताया कि शुरुआती दौर में ड्रोन रिपेयरिंग को लेकर समस्याएं आई थीं, जिनके बारे में कंपनी को अवगत करा दिया गया था। अब ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए हम मेंटेनेंस लोन का प्रावधान शुरू करने जा रहे हैं, ताकि ड्रोन दीदियां स्वयं ही समय पर मरम्मत करवा सकें। इसके अलावा, योजना को मजबूती देने के लिए नए स्वयं सहायता समूह तैयार किए जा रहे हैं। उन्हें सब्सिडी पर ड्रोन दिलवाने और ट्रेनिंग के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा गया है।

जिले की दो दीदीयों को दिया गया ड्रोन। संवाद

जिले की दो दीदीयों को दिया गया ड्रोन। संवाद

जिले की दो दीदीयों को दिया गया ड्रोन। संवाद

जिले की दो दीदीयों को दिया गया ड्रोन। संवाद

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