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Ambala News: पूरन सिंह ढाबा मालिक पर 58,000 रुपये जुर्माने का आदेश रद्द
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- ट्रिब्यूनल ने नए सिरे से सुनवाई के दिए आदेश
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। छावनी स्थित मेसर्स पूरन सिंह का पुराना पंजाबी ढाबा के संचालक और मैनेजर को फूड सेफ्टी मामले में बड़ी राहत मिली है। फूड सेफ्टी अपीलेट ट्रिब्यूनल सह सेशन जज वीरेंद्र मलिक की अदालत ने एडजुडिकेटिंग ऑफिसर-सह-अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) द्वारा ढाबा मालिकों पर लगाए गए 58,000 रुपये के जुर्माने के आदेश को रद्द कर दिया है।
ट्रिब्यूनल ने पाया कि प्रशासनिक अधिकारी ने नियम-कानून को दरकिनार कर एक ही दिन में फैसला सुना दिया और ढाबा पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए 30 दिन का अनिवार्य समय भी नहीं दिया। ट्रिब्यूनल ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए एडीसी के पास वापस भेज दिया है।
मामला 25 मई 2022 का है, जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी की टीम ने अंबाला कैंट स्थित पूरन सिंह के पुराने पंजाबी ढाबे पर दबिश दी थी। निरीक्षण के दौरान ढाबे पर बिक्री के लिए रखा 2 किलो खुला पनीर मिला, जिसके नमूने लेकर जांच के लिए सरकारी लैब फूड एनालिस्ट, करनाल भेजे गए। लैब रिपोर्ट में पनीर घटिया गुणवत्ता का पाया गया। इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने शिकायत दर्ज कराई और एडीसी ने 7 सितंबर 2022 को ढाबे के मैनेजर सुरेश कुमार और मालिक कुणाल पर 58,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया।
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नहीं मिला सफाई का मौका
एडीसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ ढाबा प्रबंधन ने सेशन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। ढाबा संचालकों के वकील ने अदालत में दलील दी कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स नियम के तहत आरोपी पक्ष को नोटिस जारी कर कम से कम 30 दिन का समय अपनी बात रखने के लिए दिया जाना अनिवार्य है। खाद्य विभाग ने 27 जुलाई 2022 को शिकायत दर्ज की, 1 अगस्त 2022 को नोटिस भेजा और उसी दिन (1 अगस्त को ही) उपस्थिति के तुरंत बाद 58,000 रुपये का जुर्माना सुना दिया। 1 अगस्त को जुर्माना लगाने के बाद विस्तृत लिखित आदेश 7 सितंबर 2022 को जारी किया गया, जो प्रक्रियात्मक खामी को दर्शाता है।
इसके अलावा ढाबा संचालकों को लैब रिपोर्ट की प्रति भी समय पर नहीं दी गई। वहीं, राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील ने दलील दी कि सैंपल सब-स्टैंडर्ड पाया गया था और सभी कानूनी नियमों का पालन करते हुए एडीसी कोर्ट ने जुर्माना लगाया था, इसलिए अपील खारिज की जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सेशन जज वीरेंद्र मलिक की अदालत ने माना कि एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी (एडीसी) ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के नियम 3.1.1(6) का सीधा उल्लंघन किया है।
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। छावनी स्थित मेसर्स पूरन सिंह का पुराना पंजाबी ढाबा के संचालक और मैनेजर को फूड सेफ्टी मामले में बड़ी राहत मिली है। फूड सेफ्टी अपीलेट ट्रिब्यूनल सह सेशन जज वीरेंद्र मलिक की अदालत ने एडजुडिकेटिंग ऑफिसर-सह-अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) द्वारा ढाबा मालिकों पर लगाए गए 58,000 रुपये के जुर्माने के आदेश को रद्द कर दिया है।
ट्रिब्यूनल ने पाया कि प्रशासनिक अधिकारी ने नियम-कानून को दरकिनार कर एक ही दिन में फैसला सुना दिया और ढाबा पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए 30 दिन का अनिवार्य समय भी नहीं दिया। ट्रिब्यूनल ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए एडीसी के पास वापस भेज दिया है।
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मामला 25 मई 2022 का है, जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी की टीम ने अंबाला कैंट स्थित पूरन सिंह के पुराने पंजाबी ढाबे पर दबिश दी थी। निरीक्षण के दौरान ढाबे पर बिक्री के लिए रखा 2 किलो खुला पनीर मिला, जिसके नमूने लेकर जांच के लिए सरकारी लैब फूड एनालिस्ट, करनाल भेजे गए। लैब रिपोर्ट में पनीर घटिया गुणवत्ता का पाया गया। इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने शिकायत दर्ज कराई और एडीसी ने 7 सितंबर 2022 को ढाबे के मैनेजर सुरेश कुमार और मालिक कुणाल पर 58,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया।
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नहीं मिला सफाई का मौका
एडीसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ ढाबा प्रबंधन ने सेशन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। ढाबा संचालकों के वकील ने अदालत में दलील दी कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स नियम के तहत आरोपी पक्ष को नोटिस जारी कर कम से कम 30 दिन का समय अपनी बात रखने के लिए दिया जाना अनिवार्य है। खाद्य विभाग ने 27 जुलाई 2022 को शिकायत दर्ज की, 1 अगस्त 2022 को नोटिस भेजा और उसी दिन (1 अगस्त को ही) उपस्थिति के तुरंत बाद 58,000 रुपये का जुर्माना सुना दिया। 1 अगस्त को जुर्माना लगाने के बाद विस्तृत लिखित आदेश 7 सितंबर 2022 को जारी किया गया, जो प्रक्रियात्मक खामी को दर्शाता है।
इसके अलावा ढाबा संचालकों को लैब रिपोर्ट की प्रति भी समय पर नहीं दी गई। वहीं, राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील ने दलील दी कि सैंपल सब-स्टैंडर्ड पाया गया था और सभी कानूनी नियमों का पालन करते हुए एडीसी कोर्ट ने जुर्माना लगाया था, इसलिए अपील खारिज की जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सेशन जज वीरेंद्र मलिक की अदालत ने माना कि एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी (एडीसी) ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के नियम 3.1.1(6) का सीधा उल्लंघन किया है।