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Ambala News: पर्यटकों को लुभाएगा शहीद स्मारक और याद दिलाएगा 1857 की क्रांति
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वैभव शर्मा
अंबाला। नवनिर्मित शहीद स्मारक प्रदेश ही नहीं देश में अलग छाप छोड़ेगा। दूरदराज से आने वाले पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगा। यह लोगों को 1857 की क्रांति की भी याद दिलाएगा। प्रशासन की मानें तो सिविल वर्क का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। यहां पार्किंग को छोड़कर भवन निर्माण से जुड़े सभी कार्यों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। पार्किंग में अभी दो महीने का समय लग सकता है, क्योंकि यहां लोगों की आवक को देखते हुए दो फ्लोर की पार्किंग की व्यवस्था बाद में की गई है। यहां फर्श ग्रेनाइट पत्थर का है जिसे बंगलुरू से तो भवन के बाहर का लाल पत्थर राजस्थान से मंगाया गया है। वहीं कई अन्य सामान जर्मनी से मंगाए हैं, जिसमें विशेष प्रकार के झरोखे, वॉर मैमोरियल टॉवर पर लगने वाली पिंक शीट शामिल है। लोक निर्माण विभाग की ओर से इसके आर्ट वर्क को पूरा करने का जनवरी तक का समय है। इसके बाद गृहमंत्री अनिल विज की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय लेकर इसके शुभारंभ की संभावना जताई जा रही है।
पार्किंग:
यहां पर पार्किंग में करीब 400 वाहन एक साथ खड़े किए जा सकेंगे। दो मंजिला पार्किंग का बेस तैयार है इसका ऊपर के फ्लोर का लेंटर डालना बाकी है, जिस पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। निर्माता कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि पार्किंग को विस्तारित करने के बारे में बाद में निर्णय लिया गया था, इस कारण से सिर्फ यही कार्य शेष बचा है।
म्यूजियम:
शहीद स्मारक में आईसी भवन के पास म्यूजियम बनाया गया है, जो पूरा बनकर तैयार हो चुका है। यहां रंगरोगन का कार्य शेष है। रंगरोगन के कार्य को भी इसलिए रोका गया है क्योंकि आर्ट वर्क में यहां पर कलाकर अपने हिसाब से इसे डिजायन करेंगे। इसके साथ ही यह पूरा भवन वातानुकूलित सुविधाओं से लैस होगा।
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आईसी भवन:
आईसी भवन को कुछ इस प्रकार बनाया गया है कि यह 1857 के समय की याद दिलाता है। इसमें दो गुंबद भी बने हुए हैं जो किले के रूप में इसे दर्शाते हैं। इसके साथ ही इसमें महलों की तर्ज पर बीच में एक छोटा पार्कनुमा स्ट्रक्चर बनाया गया है, जिसके चारों तरफ की दीवारों पर नक्काशीनुमा झरोखे बनाए गए हैं। इसके साथ ही यहां पर फाउंटेन भी लगाया जाएगा।
फूड कोर्ट और दुकानें :
इस शहीद स्मारक को जो देखने आएगा उसे सिर्फ शहीदों के बारे में ही नहीं बल्कि खाने पीने के लिए फूड कोर्ट की भी सुविधा मिलेगी, जिससे लोग आराम से वातानुकूलित परिसर में बैठकर जायके का लुत्फ भी ले सकेंगे। यहां दुकानों का निर्माण भी पूरा हो चुका है।
वीआईपी और बच्चों का खेल कक्ष :
स्मारक में वीवीआईपी लोगों के लिए भी अलग से जगह दी गई है ताकि वह बिना किसी परेशानी के आसानी से यहां आ जा सकें। इसके साथ ही जो लोग इस स्मारक को देखने आएंगे उनके बच्चों के लिए बच्चों के खेलने का कक्ष भी बनाया गया है, जहां पर बच्चे खेल भी सकेंगे।
ओपन थिएटर और वाटर बाडी :
शहीद स्मारक में ओपन थिएटर बनाया जा चुका है, जहां पर 2500 लोगों के एक साथ बैठने की क्षमता है। यहां पर भविष्य में अंबाला से शुरू हुई स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति की दास्तान को कलाकार दिखा सकेंगे। इसके साथ ही यहां वाटर बाडी भी बनाई है जिसमें इस स्मारक का प्रतिबिम्ब देखा जा सकेगा। यह कार्य भी पूरा हो चुका है। यहां पर कुछ टाइलें लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है। इसके साथ ही पुस्तकालय, कॉफी शॉप, ऑडिटोरियम भी बनाया गया है। यहां वाटर बाडी में वह अत्याधुनिक फाउंटेन, जेट सिस्टम पर प्रोजेक्शन, डिजिटल साउंड आदि को शामिल किया जाएगा।
कमल की आकृति का होगा वॉर मैमोरियल टॉवर :
शहीद स्मारक में सबसे आकर्षण का केंद्र यहां का विशेष आकृति का वॉर मैमोरियल टॉवर रहेगा। जिसकी डिजाइन कमल की आकृति जैसी है। यहां पर निर्माण और लोहे से टॉवर को खड़ा कर दिया गया है। अब इसके ऊपर विशेष प्रकार की शीटें लगाई जाएंगी जिन्हें विदेश से मंगाया जा रहा है। वॉर मैमोरियल की दीवारों पर भी डिजिटली 1857 की क्रांति और शहीदों के बारे में जानकारी दर्शायी जाएगी।
आर्ट वर्क का टेंडर 150 करोड़ का, 20 जून को खुलेगा
लोक निर्माण विभाग के जेई अश्वनी बताते हैं कि इस भवन में सिविल वर्क 650 करोड़ रुपये का कराया गया है। वहीं आर्ट वर्क पर 150 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसके लिए हाल ही में टेंडर लगाया गया था। इसके आठ कंपनियों ने अपनी रुचि भी दिखाई है। अब 20 जून को बोली खोली जाएगी तो इस कार्य को भी जल्द से जल्द शुरू कराया जाएगा।
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अंबाला। नवनिर्मित शहीद स्मारक प्रदेश ही नहीं देश में अलग छाप छोड़ेगा। दूरदराज से आने वाले पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगा। यह लोगों को 1857 की क्रांति की भी याद दिलाएगा। प्रशासन की मानें तो सिविल वर्क का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। यहां पार्किंग को छोड़कर भवन निर्माण से जुड़े सभी कार्यों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। पार्किंग में अभी दो महीने का समय लग सकता है, क्योंकि यहां लोगों की आवक को देखते हुए दो फ्लोर की पार्किंग की व्यवस्था बाद में की गई है। यहां फर्श ग्रेनाइट पत्थर का है जिसे बंगलुरू से तो भवन के बाहर का लाल पत्थर राजस्थान से मंगाया गया है। वहीं कई अन्य सामान जर्मनी से मंगाए हैं, जिसमें विशेष प्रकार के झरोखे, वॉर मैमोरियल टॉवर पर लगने वाली पिंक शीट शामिल है। लोक निर्माण विभाग की ओर से इसके आर्ट वर्क को पूरा करने का जनवरी तक का समय है। इसके बाद गृहमंत्री अनिल विज की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय लेकर इसके शुभारंभ की संभावना जताई जा रही है।
पार्किंग:
यहां पर पार्किंग में करीब 400 वाहन एक साथ खड़े किए जा सकेंगे। दो मंजिला पार्किंग का बेस तैयार है इसका ऊपर के फ्लोर का लेंटर डालना बाकी है, जिस पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। निर्माता कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि पार्किंग को विस्तारित करने के बारे में बाद में निर्णय लिया गया था, इस कारण से सिर्फ यही कार्य शेष बचा है।
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म्यूजियम:
शहीद स्मारक में आईसी भवन के पास म्यूजियम बनाया गया है, जो पूरा बनकर तैयार हो चुका है। यहां रंगरोगन का कार्य शेष है। रंगरोगन के कार्य को भी इसलिए रोका गया है क्योंकि आर्ट वर्क में यहां पर कलाकर अपने हिसाब से इसे डिजायन करेंगे। इसके साथ ही यह पूरा भवन वातानुकूलित सुविधाओं से लैस होगा।
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आईसी भवन:
आईसी भवन को कुछ इस प्रकार बनाया गया है कि यह 1857 के समय की याद दिलाता है। इसमें दो गुंबद भी बने हुए हैं जो किले के रूप में इसे दर्शाते हैं। इसके साथ ही इसमें महलों की तर्ज पर बीच में एक छोटा पार्कनुमा स्ट्रक्चर बनाया गया है, जिसके चारों तरफ की दीवारों पर नक्काशीनुमा झरोखे बनाए गए हैं। इसके साथ ही यहां पर फाउंटेन भी लगाया जाएगा।
फूड कोर्ट और दुकानें :
इस शहीद स्मारक को जो देखने आएगा उसे सिर्फ शहीदों के बारे में ही नहीं बल्कि खाने पीने के लिए फूड कोर्ट की भी सुविधा मिलेगी, जिससे लोग आराम से वातानुकूलित परिसर में बैठकर जायके का लुत्फ भी ले सकेंगे। यहां दुकानों का निर्माण भी पूरा हो चुका है।
वीआईपी और बच्चों का खेल कक्ष :
स्मारक में वीवीआईपी लोगों के लिए भी अलग से जगह दी गई है ताकि वह बिना किसी परेशानी के आसानी से यहां आ जा सकें। इसके साथ ही जो लोग इस स्मारक को देखने आएंगे उनके बच्चों के लिए बच्चों के खेलने का कक्ष भी बनाया गया है, जहां पर बच्चे खेल भी सकेंगे।
ओपन थिएटर और वाटर बाडी :
शहीद स्मारक में ओपन थिएटर बनाया जा चुका है, जहां पर 2500 लोगों के एक साथ बैठने की क्षमता है। यहां पर भविष्य में अंबाला से शुरू हुई स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति की दास्तान को कलाकार दिखा सकेंगे। इसके साथ ही यहां वाटर बाडी भी बनाई है जिसमें इस स्मारक का प्रतिबिम्ब देखा जा सकेगा। यह कार्य भी पूरा हो चुका है। यहां पर कुछ टाइलें लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है। इसके साथ ही पुस्तकालय, कॉफी शॉप, ऑडिटोरियम भी बनाया गया है। यहां वाटर बाडी में वह अत्याधुनिक फाउंटेन, जेट सिस्टम पर प्रोजेक्शन, डिजिटल साउंड आदि को शामिल किया जाएगा।
कमल की आकृति का होगा वॉर मैमोरियल टॉवर :
शहीद स्मारक में सबसे आकर्षण का केंद्र यहां का विशेष आकृति का वॉर मैमोरियल टॉवर रहेगा। जिसकी डिजाइन कमल की आकृति जैसी है। यहां पर निर्माण और लोहे से टॉवर को खड़ा कर दिया गया है। अब इसके ऊपर विशेष प्रकार की शीटें लगाई जाएंगी जिन्हें विदेश से मंगाया जा रहा है। वॉर मैमोरियल की दीवारों पर भी डिजिटली 1857 की क्रांति और शहीदों के बारे में जानकारी दर्शायी जाएगी।
आर्ट वर्क का टेंडर 150 करोड़ का, 20 जून को खुलेगा
लोक निर्माण विभाग के जेई अश्वनी बताते हैं कि इस भवन में सिविल वर्क 650 करोड़ रुपये का कराया गया है। वहीं आर्ट वर्क पर 150 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसके लिए हाल ही में टेंडर लगाया गया था। इसके आठ कंपनियों ने अपनी रुचि भी दिखाई है। अब 20 जून को बोली खोली जाएगी तो इस कार्य को भी जल्द से जल्द शुरू कराया जाएगा।