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Haryana: एक दिल से जन्मी दो दुर्लभ बच्चियों ने घर पर बिताई पहली रात, पढ़ें परिवार की मुफलिसी की कहानी...

Sun, 14 Jul 2024 10:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 14 Jul 2024 10:16 AM IST
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The girls, who were joined at the chest, spent the night at home, the family members stayed awake
जुड़वा बच्चियां। - फोटो : अमर उजाला

एक दिल से जन्मी छाती से जुड़ी बच्चियों ने शुक्रवार पहली रात अपने घर पर बिताई। बिना किसी डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ के मां-पिता और परिजनों ने खुद ही बच्चियों की देखभाल की। मां की ममता इस कद्र है कि बच्चियों को कलेजे से लगाकर रखा है।

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परिजनों का कहना है कि भले ही यह दुर्लभ मामला हो, लेकिन वह बच्चियों की लंबी आयु की कामना कर रही हैं, वो स्वस्थ रहें। अभी तक बच्चियों ने महज ड्रॉपर के जरिये दूध का ही सेवन किया। रात को भले ही बच्चियों ने दो-दो घंटे की नींद ली हो लेकिन बच्चियों की चिंता ने परिजनों को सोने नहीं दिया।
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इस तरह का बच्चियां पहली बार देखी तो पूरी रात मां की नजर बच्चियों की हरकतों पर ही थी कि कब वह सो रही है और सोते समय कोई दिक्कत तो नहीं आ रही। परिजन बोले कि हर पल डर सता रहा था कि कोई अनहोनी न हो जाए। भगवान की कृपा से दोनों स्वस्थ है।

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मुफलिसी में दुर्लभ बच्चियों का परिवार

भले ही शकुंतला के घर लाखों में एक होने वाली जुड़ी बच्चियां हुई हों लेकिन यह परिवार मुफलिसी में जीवन यापन कर रहा है। हुड्डा सेक्टर-34 में एक किराये में शकुंतला अपने पति चुनचुन व दो बच्चों के साथ रहती है। पति शटरिंग का काम कर परिवार का गुजर बसर कर रहा है।

अब दो जुड़वा और छाती से जुड़ी बच्चियों का जिम्मा भी परिवार पर है। सोने को बैड न ही खाना बनाने के लिए गैस सिलिंडर है। कमरे में दरवाजे और खिड़कियों पर पल्ले भी नहीं है। चादर व चुन्नी बांधकर परिवार गुजर बसर कर रहा है। यहां तक कि रात को भी कभी-कभी कई-कई घंटे लाइट नहीं आती।

मदद के लिए उमड़ रहे लोग

स्वास्थ्य विभाग ने भले ही यह कहकर हाथ खड़े कर दिए हो कि इसका कोई उपचार नहीं है लेकिन बच्चियों के परिजनों की ममता को देखते हुए अब समाजसेवी भी आगे आ रहे हैं। जो परिवार से मिलकर उनकी मदद करने का आश्वासन दे रहे हैं। वहीं, बच्चियों को देखने के लिए घर पर आसपास के लोगों का तांता लगा रहा।

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