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Ambala News: बाल विवाह पर रोक के लिए रहेगी विभाग की पैनी नजर
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अंबाला सिटी। अंबाला शहर के बाल विवाह निषेध विभाग बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए जुटा हुआ है। जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी अरविंद्रजीत कौर ने बताया कि उन्होंने अभी तक 150 बाल विवाह को रुकवाया है। अक्षय तृतीय के दिन बाल विवाह के कई मामले देखने को मिलते है। इस संबंध में विभाग की ओर से समय समय पर जांच के साथ लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जिन मामलों में लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष हो जाती है। उनमें फॉलोअप बंद कर दिया जाता है। विभाग की ओर से बाल विवाह करने वाले ओर करवाने वालों पर कानूनी कार्रवाई भी की जाती है। इसके साथ ही सभी धार्मिक संस्थाओं और धर्म स्थानों के संचालकों व धर्म गुरुओं को भी उनकी ओर से करवाए गए विवाह का पूरा ब्योरा रखने के निर्देश दिए है। अगर कोई भी संस्थान या धार्मिक स्थल संचालक विवाह का ब्योरा नहीं रखता तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। बाल विवाह के चलते अगर नाबालिग गर्भवती हो जाती है तो ऐसे मामलों में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाता है। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत एमडीडी ऑफ इंडिया के सहयोग से भी बाल विवाह पर रोक लगाने का काम किया जा रहा है। अभी तक एमडीडी द्वारा 84 बाल विवाह पर रोक लगाई जा चुकी है। इसके साथ ही दो बार फाॅलोअप भी किया जा चुका है। सहायक पीड़ित सहायता समन्वयक अजय तिवारी ने बताया कि बीते वर्ष से ही बाल विवाह मुक्त अभियान जब भी उन्हें बाल विवाह की सूचना मिलती है तो वे निषेधाज्ञा आदेश के लिए जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी को इस बारे में सूचित करते है और इसके बाद बाल मौके पर पहुंच कर बाल विवाह को रुकवाया जाता है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह के कारण नाबालिगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।
वर्जन
बाल विवाह को लेकर जिला भर में धार्मिक स्थानों, धर्म गुरुओं और सामाजिक संस्थानों के संचालकों को निर्देश दिए गए है कि सामूहिक या एकल विवाह करने से पहले लड़का व लड़की की उम्र की जांच के लिए पूरे दस्तावेज जांचे उसके बाद ही विवाह करवाएं। बाल विवाह करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कि जाएगी।
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- अरविंद्रजीत कौर, जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी, अंबाला
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उन्होंने कहा कि जिन मामलों में लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष हो जाती है। उनमें फॉलोअप बंद कर दिया जाता है। विभाग की ओर से बाल विवाह करने वाले ओर करवाने वालों पर कानूनी कार्रवाई भी की जाती है। इसके साथ ही सभी धार्मिक संस्थाओं और धर्म स्थानों के संचालकों व धर्म गुरुओं को भी उनकी ओर से करवाए गए विवाह का पूरा ब्योरा रखने के निर्देश दिए है। अगर कोई भी संस्थान या धार्मिक स्थल संचालक विवाह का ब्योरा नहीं रखता तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। बाल विवाह के चलते अगर नाबालिग गर्भवती हो जाती है तो ऐसे मामलों में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाता है। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत एमडीडी ऑफ इंडिया के सहयोग से भी बाल विवाह पर रोक लगाने का काम किया जा रहा है। अभी तक एमडीडी द्वारा 84 बाल विवाह पर रोक लगाई जा चुकी है। इसके साथ ही दो बार फाॅलोअप भी किया जा चुका है। सहायक पीड़ित सहायता समन्वयक अजय तिवारी ने बताया कि बीते वर्ष से ही बाल विवाह मुक्त अभियान जब भी उन्हें बाल विवाह की सूचना मिलती है तो वे निषेधाज्ञा आदेश के लिए जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी को इस बारे में सूचित करते है और इसके बाद बाल मौके पर पहुंच कर बाल विवाह को रुकवाया जाता है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह के कारण नाबालिगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।
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बाल विवाह को लेकर जिला भर में धार्मिक स्थानों, धर्म गुरुओं और सामाजिक संस्थानों के संचालकों को निर्देश दिए गए है कि सामूहिक या एकल विवाह करने से पहले लड़का व लड़की की उम्र की जांच के लिए पूरे दस्तावेज जांचे उसके बाद ही विवाह करवाएं। बाल विवाह करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कि जाएगी।
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- अरविंद्रजीत कौर, जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी, अंबाला