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Ambala News: कैथोलिक चर्च 119 साल से मनाता है क्रिसमस
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अंबाला छावनी स्थित होली रिडीमर कैथोलिक चर्च में लगाई गई अंग्रेजों के समय की घंटियां। संवाद
- फोटो : संवाद
अंबाला। अंग्रेजों के समय में बनाए होली रिडिमर कैथोलिक चर्च को लगभग 119 साल हो गए हैं। यह चर्च अपने आप में आठवें अजूबे से कम नहीं है। इसमें अंग्रेजों के समय के बेंच, बड़ी घंटियां, पाइप ऑरगन समेत अन्य चीजें हैं। चर्च के फादर पतरस मुंडू बताते हैं कि यह चर्च छावनी के लाॅरेंस रोड पर बना है।
अंग्रेजों ने सबसे पहले गॉथिक स्टाइल में 1843 में इस चर्च का निर्माण कराया था। उस दौरान इसके प्रिस्ट इटली के कैपूसिन फादर विनेंस थे। इसके बाद सन 1902 में इसका पुनर्निर्माण किया गया। यह तीन मंजिला चर्च है। इसमें पहली मंजिल पर भी श्रद्धालु प्रेयर के दौरान मौजूद रहते थे। इसके सबसे ऊपरी मंजिल पर तीन बड़ी घंटियां हैं। प्रेयर के दौरान इनकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती थी। पिछले कई सालों ने इन घंटियों काे बजाना बंद किया हुआ है। इसके साथ ही प्रेयर के दौरान चर्च में अंग्रेज सैनिक अपने साथ बंदूकें भी रखते थे। इन बंदूकों को अंग्रेज बेंच में छिद्र में लगा कर प्रेयर करते थे।
फादर के अनुसार इस जगह पर सबसे पहले 1843 में चर्च बनाया गया जो 1902 में मौजूद रहा। इसके बाद 1902 में दोबारा से चर्च का निर्माण किया गया। अब इस चर्च को 119 साल हो गए हैं। चर्च में दूसरी मंजिल पर मोटी मोटी लकड़ियों का बेस बनाकर लोहे के भारी गार्डर में इन घंटियों को जंजीरों से बांधा हुआ है। इन घंटियों पर कनल फाउंड्री रूड़की 1863 लिखा हुआ है। इसके साथ ही इन घंटियों पर डिजाइनिंग भी की हुई है। इसके साथ ही दूसरी मंजिल पर पुराने समय के पाइप ऑर्गन लगे हुए हैं। प्रेयर के दौरान इन पाइप ऑर्गन से म्युजिक बजाया जाता था।
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अंग्रेजों ने सबसे पहले गॉथिक स्टाइल में 1843 में इस चर्च का निर्माण कराया था। उस दौरान इसके प्रिस्ट इटली के कैपूसिन फादर विनेंस थे। इसके बाद सन 1902 में इसका पुनर्निर्माण किया गया। यह तीन मंजिला चर्च है। इसमें पहली मंजिल पर भी श्रद्धालु प्रेयर के दौरान मौजूद रहते थे। इसके सबसे ऊपरी मंजिल पर तीन बड़ी घंटियां हैं। प्रेयर के दौरान इनकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती थी। पिछले कई सालों ने इन घंटियों काे बजाना बंद किया हुआ है। इसके साथ ही प्रेयर के दौरान चर्च में अंग्रेज सैनिक अपने साथ बंदूकें भी रखते थे। इन बंदूकों को अंग्रेज बेंच में छिद्र में लगा कर प्रेयर करते थे।
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फादर के अनुसार इस जगह पर सबसे पहले 1843 में चर्च बनाया गया जो 1902 में मौजूद रहा। इसके बाद 1902 में दोबारा से चर्च का निर्माण किया गया। अब इस चर्च को 119 साल हो गए हैं। चर्च में दूसरी मंजिल पर मोटी मोटी लकड़ियों का बेस बनाकर लोहे के भारी गार्डर में इन घंटियों को जंजीरों से बांधा हुआ है। इन घंटियों पर कनल फाउंड्री रूड़की 1863 लिखा हुआ है। इसके साथ ही इन घंटियों पर डिजाइनिंग भी की हुई है। इसके साथ ही दूसरी मंजिल पर पुराने समय के पाइप ऑर्गन लगे हुए हैं। प्रेयर के दौरान इन पाइप ऑर्गन से म्युजिक बजाया जाता था।

अंबाला छावनी स्थित होली रिडीमर कैथोलिक चर्च में लगाई गई अंग्रेजों के समय की घंटियां। संवाद- फोटो : संवाद
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