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Ambala News: नागरिक अस्पताल में बढ़ आवारा कुत्तों का आतंक
Fri, 13 Dec 2024 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 13 Dec 2024 01:54 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। आवारा कुत्तों की बढ़ती तादाद के कारण आए दिन रेबिज का टीका लगवाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं शहर के साथ- साथ अस्पताल परिसर में भी कुत्ते बैठे रहते हैं। इससे मरीजों को भी खतरा बना रहता है।
रात के समय कुत्ते मरीजों के पीछे पड़ जाते हैं। अस्पताल में करीब 25 आवारा कुत्ते हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इस पर संज्ञान लेते हुए नगर निगम को कुत्तों के प्रबंधन को लेकर पत्र लिखा है। यहां तक की नई बिल्डिंग में भी कई कुत्तों की भरमार हो रही है।
इधर अस्पताल में भी रोजाना करीब 20 मरीज कुत्ते के काटने के बाद टीका लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। रेबिज का टीका बहुत महंगा आता है। इससे हजारों रुपए का अतिरिक्त बोझ नागरिक अस्पताल पर पड़ रहा है। अस्पताल प्रत्येक माह करीब एक लाख रुपए के टीके कुत्ते के काटे हुए मरीजों को
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लगाता है।
वार्ड तक भी बढ़ा खतरा: आवारा कुत्ते कई बार पहली मंजिल में बने वार्ड में भी पहुंच जाते हैं। इससे मरीजों को संक्रमण का भी खतरा बना रहता है। अस्पताल में पड़े मेडिकल कचरे से कुत्ते कई बार सेनेटरी पैड को निकाल कर पूरे परिसर में फैला देते हैं। इससे भी बीमारियां फैलने का डर बना रहता है।
नसबंदी के बाद उसी स्थान पर छोड़ना बना मुसीबत: नियम के अनुसार अगर निगम द्वारा किसी कुत्ते को पकड़ा भी जाता है तो उसकी नसबंदी के बाद उसे वहीं छोड़ने का नियम है। ऐसे में कुत्तों की संख्या लंबे समय तक नियंत्रण से बाहर हो जाती है।
इसी कारण मामलों में कमी नहीं आती। जबकि कुत्तों के लिए अलग से शेल्टर होम बनाया जाना चाहिए, लेकिन इस बारे में अभी तक कोई योजना नहीं बनी है।
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अंबाला सिटी। आवारा कुत्तों की बढ़ती तादाद के कारण आए दिन रेबिज का टीका लगवाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं शहर के साथ- साथ अस्पताल परिसर में भी कुत्ते बैठे रहते हैं। इससे मरीजों को भी खतरा बना रहता है।
रात के समय कुत्ते मरीजों के पीछे पड़ जाते हैं। अस्पताल में करीब 25 आवारा कुत्ते हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इस पर संज्ञान लेते हुए नगर निगम को कुत्तों के प्रबंधन को लेकर पत्र लिखा है। यहां तक की नई बिल्डिंग में भी कई कुत्तों की भरमार हो रही है।
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इधर अस्पताल में भी रोजाना करीब 20 मरीज कुत्ते के काटने के बाद टीका लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। रेबिज का टीका बहुत महंगा आता है। इससे हजारों रुपए का अतिरिक्त बोझ नागरिक अस्पताल पर पड़ रहा है। अस्पताल प्रत्येक माह करीब एक लाख रुपए के टीके कुत्ते के काटे हुए मरीजों को
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लगाता है।
वार्ड तक भी बढ़ा खतरा: आवारा कुत्ते कई बार पहली मंजिल में बने वार्ड में भी पहुंच जाते हैं। इससे मरीजों को संक्रमण का भी खतरा बना रहता है। अस्पताल में पड़े मेडिकल कचरे से कुत्ते कई बार सेनेटरी पैड को निकाल कर पूरे परिसर में फैला देते हैं। इससे भी बीमारियां फैलने का डर बना रहता है।
नसबंदी के बाद उसी स्थान पर छोड़ना बना मुसीबत: नियम के अनुसार अगर निगम द्वारा किसी कुत्ते को पकड़ा भी जाता है तो उसकी नसबंदी के बाद उसे वहीं छोड़ने का नियम है। ऐसे में कुत्तों की संख्या लंबे समय तक नियंत्रण से बाहर हो जाती है।
इसी कारण मामलों में कमी नहीं आती। जबकि कुत्तों के लिए अलग से शेल्टर होम बनाया जाना चाहिए, लेकिन इस बारे में अभी तक कोई योजना नहीं बनी है।