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Ambala News: बीमा क्लेम खारिज करने पर टाटा एआईजी पर 1.13 लाख रुपये का जुर्माना
Mon, 08 Dec 2025 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Mon, 08 Dec 2025 01:11 AM IST
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करनाल। जिला उपभोक्ता आयोग ने स्वास्थ्य बीमा क्लेम को गलत तरीके से खारिज करने पर टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर जुर्माना लगाया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह बजीदा जट्टान निवासी सुमित को बीमा की रकम, ब्याज और मुआवजे के तौर पर एक लाख 13 हजार 464 रुपये का भुगतान करे। फैसला आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने सुनाया।
बजीदा जट्टान निवासी शिकायतकर्ता सुमित कुमार ने बताया कि उन्होंने टाटा एआईजी के फ्लोटर प्लान के तहत 5 लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी, जिसके प्रीमियम के तौर पर 12 हजार 214 रुपये जमा करवाए थे। जो 9 जनवरी 2022 से 8 जनवरी 2023 तक वैध थी। पॉलिसी कैशलैस थी। इसमें शिकायतकर्ता, उनकी पत्नी और बच्चे कवर थे। 23 सितंबर 2022 को शिकायतकर्ता बीमार हो गए। उन्हें अस्पताल में दाखिल करवाया गया और बीमारी पर उनका 82 हजार 464 रुपये खर्च आया। इस दौरान उन्होंने बीमा कंपनी को सूचित किया और कंपनी के कर्मचारी अस्पताल पहुंचे और रिकॉर्ड की भी जांच की।
जब शिकायतकर्ता ने अपना बिल सारे कागजात सहित कंपनी के समक्ष रखा तो कंपनी ने पहले खुद बिल देने की बात कही। शिकायतकर्ता ने अस्पताल में बिल जमा करवा दिया। बाद में कंपनी से बिल पास करवाने के लिए फाइल लगा दी। लेकिन कंपनी ने 30 नवंबर 2022 को क्लेम को खारिज कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज करवाई।
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45 दिन के अंदर करना होगा आदेशों का पालन
आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला दिया कि टाटा एआईजी शिकायतकर्ता सुमित कुमार को इलाज पर खर्च हुए 82 हजार 464 रुपये रुपये का भुगतान क्लेम अस्वीकृति की तारीख 30 नवंबर 2022 से भुगतान होने की तारीख तक नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ देनी होगी। इसके अलावा इस दौरान उपभोक्ता को हुए मानसिक उत्पीड़न के तौर पर 20 हजार रुपये का हर्जाना देना होगा। वहीं 11 हजार रुपये की राशि मुकदमा खर्चा के रूप में देने होंगे। आयोग ने आदेश दिया कि निर्णय की प्रति मिलने की तारीख से 45 दिनों के भीतर इन आदेशों का पालन करना होगा। इस प्रकार बीमा कंपनी शिकायतकर्ता को एक लाख 13 हजार 464 रुपये का वहन करेगी।
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बजीदा जट्टान निवासी शिकायतकर्ता सुमित कुमार ने बताया कि उन्होंने टाटा एआईजी के फ्लोटर प्लान के तहत 5 लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी, जिसके प्रीमियम के तौर पर 12 हजार 214 रुपये जमा करवाए थे। जो 9 जनवरी 2022 से 8 जनवरी 2023 तक वैध थी। पॉलिसी कैशलैस थी। इसमें शिकायतकर्ता, उनकी पत्नी और बच्चे कवर थे। 23 सितंबर 2022 को शिकायतकर्ता बीमार हो गए। उन्हें अस्पताल में दाखिल करवाया गया और बीमारी पर उनका 82 हजार 464 रुपये खर्च आया। इस दौरान उन्होंने बीमा कंपनी को सूचित किया और कंपनी के कर्मचारी अस्पताल पहुंचे और रिकॉर्ड की भी जांच की।
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जब शिकायतकर्ता ने अपना बिल सारे कागजात सहित कंपनी के समक्ष रखा तो कंपनी ने पहले खुद बिल देने की बात कही। शिकायतकर्ता ने अस्पताल में बिल जमा करवा दिया। बाद में कंपनी से बिल पास करवाने के लिए फाइल लगा दी। लेकिन कंपनी ने 30 नवंबर 2022 को क्लेम को खारिज कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज करवाई।
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45 दिन के अंदर करना होगा आदेशों का पालन
आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला दिया कि टाटा एआईजी शिकायतकर्ता सुमित कुमार को इलाज पर खर्च हुए 82 हजार 464 रुपये रुपये का भुगतान क्लेम अस्वीकृति की तारीख 30 नवंबर 2022 से भुगतान होने की तारीख तक नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ देनी होगी। इसके अलावा इस दौरान उपभोक्ता को हुए मानसिक उत्पीड़न के तौर पर 20 हजार रुपये का हर्जाना देना होगा। वहीं 11 हजार रुपये की राशि मुकदमा खर्चा के रूप में देने होंगे। आयोग ने आदेश दिया कि निर्णय की प्रति मिलने की तारीख से 45 दिनों के भीतर इन आदेशों का पालन करना होगा। इस प्रकार बीमा कंपनी शिकायतकर्ता को एक लाख 13 हजार 464 रुपये का वहन करेगी।