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Ambala News: मोहड़ा गांव में 41 लोगों में मिले डायरिया के लक्षण
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अंबाला। मोहड़ा गांव की रविदास बस्ती में 15 दिन से दूषित पानी की सप्लाई के बाद वीरवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची। उन्होंने यहां पर शिविर लगाकर 64 लोगों की जांच की। इनमें से 41 लोगों में डायरिया के लक्षण मिले हैं। इनमें आठ बच्चे शामिल हैं। वहीं दो मरीज गंभीर स्थिति में मिले जिन्हें चौड़मस्तपुर स्वास्थ्य सामुदायिक केंद्र में भर्ती करा दिया गया।
इस दौरान स्वास्थ्य विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग की टीमों ने वीरवार को पानी के सैंपल भी भरे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में दो बुजुर्गों की मौत भी हुई है। उन्हें भी उल्टी दस्त हुए थे। दूषित पेयजल से जब लोग बीमार पड़ने लगे तो उन्होंने जनस्वास्थ्य विभाग के पास शिकायत की पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जनस्वास्थ्य विभाग को दूषित पेयजल की समस्या को पहले ही दूर करना चाहिए था। उन्हें पहले तो समस्या नहीं दिखी। इसके बाद जब दबाव पड़ा तो पूरी गली ही खोद डाली। अब लोगों का गली से निकलना मुश्किल हो गया है। वह अपना कोई वाहन भी नहीं निकाल सकते हैं।
रविदास बस्ती निवासी देशराज और हरमेश कुमार ने 23 मई को दूषित पेयजल आपूर्ति होने की ऑनलाइन शिकायत की थी। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी आए तो उन्हें कमी नहीं दिखी और वह शिकायत वापस लेने की बात कहते रहे।
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जब गांव में लोगों की मौत होने लगी और कई लोग बीमार पड़ने लगे तो 31 मई को उन्होंने दूसरी शिकायत सांसद वरुण मुलाना, सिटी विधायक निर्मल सिंह, उपायुक्त सहित विभागीय अधिकारियों से की। इसके बाद सांसद ने फोन पर अधिकारियों को जानकारी दी तो उन्होंने इस संबंध में कार्रवाई शुरू की।स्वास्थ्य विभाग के आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी डॉ सुनील हरी ने बताया कि मोहड़ा गांव में जिन लोगों को डायरिया के लक्षण मिले हैं उन्हें ओआरएस और जिंक की गोलियां दी गईं। स्वास्थ्य विभाग यहां पर शिविर लगाकर लगातार 10 दिन तक जांच करेगा। ब्यूरो
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इस दौरान स्वास्थ्य विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग की टीमों ने वीरवार को पानी के सैंपल भी भरे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में दो बुजुर्गों की मौत भी हुई है। उन्हें भी उल्टी दस्त हुए थे। दूषित पेयजल से जब लोग बीमार पड़ने लगे तो उन्होंने जनस्वास्थ्य विभाग के पास शिकायत की पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जनस्वास्थ्य विभाग को दूषित पेयजल की समस्या को पहले ही दूर करना चाहिए था। उन्हें पहले तो समस्या नहीं दिखी। इसके बाद जब दबाव पड़ा तो पूरी गली ही खोद डाली। अब लोगों का गली से निकलना मुश्किल हो गया है। वह अपना कोई वाहन भी नहीं निकाल सकते हैं।
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रविदास बस्ती निवासी देशराज और हरमेश कुमार ने 23 मई को दूषित पेयजल आपूर्ति होने की ऑनलाइन शिकायत की थी। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी आए तो उन्हें कमी नहीं दिखी और वह शिकायत वापस लेने की बात कहते रहे।
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जब गांव में लोगों की मौत होने लगी और कई लोग बीमार पड़ने लगे तो 31 मई को उन्होंने दूसरी शिकायत सांसद वरुण मुलाना, सिटी विधायक निर्मल सिंह, उपायुक्त सहित विभागीय अधिकारियों से की। इसके बाद सांसद ने फोन पर अधिकारियों को जानकारी दी तो उन्होंने इस संबंध में कार्रवाई शुरू की।स्वास्थ्य विभाग के आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी डॉ सुनील हरी ने बताया कि मोहड़ा गांव में जिन लोगों को डायरिया के लक्षण मिले हैं उन्हें ओआरएस और जिंक की गोलियां दी गईं। स्वास्थ्य विभाग यहां पर शिविर लगाकर लगातार 10 दिन तक जांच करेगा। ब्यूरो