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फसल अवशेष प्रबंधन में बनाई पहचान, पूरे गांव में पराली का खात्मा कर पाया कृषि रत्न अवार्ड

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Jan 2021 01:50 AM IST
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sukhvindra singh get Krishi Ratna Award
सम्मान प्राप्त करते सुखमिन्द्र सिंह - फोटो : Ambala
हरिंद्रपाल सिंह
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अंबाला। शिक्षा के बाद हर किसी को जीवन में कुछ कर दिखाने की चाह होती है, ताकि लोग उसको पहचाने। ऐसा ही जज्बा लिए अंबाला के एक युवक ने अपनी विशेष पहचान के लिए कुछ ऐसा ही करने की ठानी। अंबाला के सपहेड़ा गांव के सुखमिंद्र सिंह के मन में जगी इसी ललक की बदौलत आज वह न केवल युवाओं के लिए आदर्श बन चुके हैं, बल्कि वर्ष 2019 में कृषि रत्न अवार्ड लेकर उसने अन्य युवाओं को राह दिखाने का काम किया है।
अब सुखविंद्र कृषि मेलों और अन्य कार्यक्रमों में मास्टर ट्रेनर की भूमिका भी अदा कर रहे हैं। सुखविंद्र के कार्यों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तीन वर्षों तक नियमित कृषि मशीनों का प्रयोग करते हुए सुखमिंद्र सिंह एवं उनके साथियों घोला सिंह, हरविन्द्र सिंह ने मिलकर सीएचसी किसान क्लब सपहेड़ा के नाम से कस्टम हायरिंग सेंटर खोला। 1200 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से हैप्पी सीडर का 250 एकड़ पर खेती करवाई। इतना ही नहीं केवीके तेपलां के प्रदर्शनों, मेलों, रैलियों, स्कूल और कालेज में जागरूकता कार्यक्रम, रेडियो इत्यादि के प्रभाव से, सरपंच और प्रगतिशील किसानों के अथक प्रयास से गांव सपहेड़ा में पराली जलाने का काम बिल्कुल खत्म कर दिया गया है। सुखमिंद्र सिंह के इसी प्रयास के बदौलत 2019 को पराली प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय किसान सम्मेलन जोकि गन्नौर सोनीपत में सुखमिंद्र सिंह को कृषि रत्न अवार्ड से नवाजा गया।
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दरअसल सुखमिंद्र सिंह ने फसल अवशेष प्रबंधन अपनाकर अंबाला जिले में अपनी विशेष पहचान बनाई है। सपहेड़ा गांव निवासी सुखमिंद्र सिंह ने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की। उसने 15 एकड़ कृषि भूमि को नए रूप में संवारने की ठानी। किसान मेलों इत्यादि का भ्रमण किया। गांव से 5-6 किलोमीटर दूरी पर स्थित जिले के कृषि विज्ञान केंद्र तेपलां के कृषि वैज्ञानिकों की मदद ली। इन सभी ने उसे नई राह दिखाने का काम किया। उसने गेहूं एवं धान के साथ-साथ उन्होंने तिलहनी एवं दलहनी फसलों को भी अपनाया। इसमें मूंग, चना, मसरी एवं सरसों का उत्पादन किया। साथ ही अंत:फसलीकरण में गन्ने के साथ प्याज की खेती की। खरबूजा, टमाटर, प्याज इत्यादि की भी उत्पादन किया। -संवाद
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अवशेष प्रबंधन से बचाए 3 हजार रुपये प्रति एकड़
वर्ष 2018 में इन-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के अंतर्गत सपहेड़ा गांव को अंगीकृत किया गया। इसमें सुखमिंद्र सिंह ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सबसे पहले धान की पराली को बिना हटाए हैप्पी सीडर का प्रदर्शन अपने खेत पर किया और 3 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन तैयार करने का खर्च बचाया। साथ ही कम खरपतवार नाशकों का प्रयोग किया और अन्य किसानों की अपेक्षा 11 प्रतिशत अधिक उत्पादन किया। इससे लगभग 9500 प्रति हेक्टेयर शुद्ध मुनाफा कमाया और मृदा की उर्वरा शक्ति को बनाए रखा।

उपलब्धियों का सफरनामा
- 2019 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय किसान सम्मेलन में फसल प्रबंधन के लिए सराहनीय कार्यों पर सम्मनित किया गया।
- 2019 में में सोनीपत के गन्नौर में कृषि रत्न अवार्ड मिला
- 2018 में तेपला केवीके में सराहनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
- डीडी किसान चर्चा में लगातार कई वर्ष अंबाला की ओर से भागीदारी कर चुके हैं।
हमारे संस्थान के इंजी. गुरुप्रेम की मार्गदर्शन में सुखमिंद्र सिंह ने शानदार कार्य किए। फसल प्रबंधन में अंबाला से विशेष पहचान बनाई और अब वह मास्टर ट्रेनर भी हैं। सुखमिंद्र कृषि रत्न अवार्ड से सम्मानित हो चुका है। इतना ही नहीं नई दिल्ली में भी उसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रूपाला द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
-डॉ. उपासना, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान, केविके तेपलां
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