{"_id":"5d828d758ebc3e93be633a87","slug":"sucide-ambala-news-knl5560622","type":"story","status":"publish","title_hn":"ससुराल में घुसने से रोकने पर महिला ने खुद को जलाया था जिंदा, पति को 4 साल कैद और जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ससुराल में घुसने से रोकने पर महिला ने खुद को जलाया था जिंदा, पति को 4 साल कैद और जुर्माना
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ससुराल वालों की मारपीट से परेशान होकर तोपखाना की सलमा अपने मायके चली गई थी। 5 अगस्त 2017 को वह डिफेंस कालोनी स्थित अपने ससुराल आई तो पति व अन्य सदस्यों ने उसे घर के भीतर नहीं घुसने दिया। इसी बात से परेशान उसने स्वयं पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली थी। नागरिक अस्पताल से चंडीगढ़ पीजीआई रेफर सलमा ने वहां दम तोड़ दिया था। मृतका के भाई राहुल ने इस घटना के लिए उसके पति संदीप व तीन अन्य को जिम्मेदार बताया था। पंजोखरा थाने में दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा 306 में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने संदीप को चार साल की कैद व 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। केस में शामिल दहेज उत्पीड़न की धारा में भी दो साल की कैद व 2 हजार जुर्माना लगा है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। दो दिन पूर्व उसे दोषी करार दिया गया था। जमानत न होने के कारण वह तभी से जेल में बंद है।
जानकारी के अनुसार संदीप को जेल से अन्य बंदियों के साथ लाकर कोर्ट परिसर में बने बक्शीखाने में लाकर रखा गया। दोपहर बाद उसे एडीजे कोर्ट में पेेश किया गया। सजा पर फैसले से पूर्व बचाव व अभियोजन पक्ष ने सजा अवधि पर अपनी-अपनी दलीलें दीं। बचाव पक्ष ने कम से कम और अभियोजन पक्ष ने अधिक से अधिक सजा की मांग की। उसके बाद फैसला सार्वजनिक किया गया। दोषी को वापस जेल भेज दिया गया। केस में करीब 15 गवाहियां हुई। इनमें मायके वाले, डाक्टर, प्रत्यक्षदर्शी व अन्य शामिल हैं।
केस के अनुसार घटना से करीब 12 साल पूर्व सलमा व संदीप की शादी हुई थी। इससे कोई संतान नहीं हुई। इसी कारण दंपती व ससुराल में तानेबाजी व झगड़ा होने लगा। पंचायतें हुई, ससुराल वाले माफी मांगकर सलमा को वापस ले आए लेकिन विवाद नहीं थमा। परेशान होकर वह मायके आई। घटना के दिन उसे ससुराल में नहीं घुसने दिया। इसी कारण उसने स्वयं को आग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। मायके वालों ने ससुराल वालों के उत्पीड़न को आत्महत्या की वजह बताया था।
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जानकारी के अनुसार संदीप को जेल से अन्य बंदियों के साथ लाकर कोर्ट परिसर में बने बक्शीखाने में लाकर रखा गया। दोपहर बाद उसे एडीजे कोर्ट में पेेश किया गया। सजा पर फैसले से पूर्व बचाव व अभियोजन पक्ष ने सजा अवधि पर अपनी-अपनी दलीलें दीं। बचाव पक्ष ने कम से कम और अभियोजन पक्ष ने अधिक से अधिक सजा की मांग की। उसके बाद फैसला सार्वजनिक किया गया। दोषी को वापस जेल भेज दिया गया। केस में करीब 15 गवाहियां हुई। इनमें मायके वाले, डाक्टर, प्रत्यक्षदर्शी व अन्य शामिल हैं।
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केस के अनुसार घटना से करीब 12 साल पूर्व सलमा व संदीप की शादी हुई थी। इससे कोई संतान नहीं हुई। इसी कारण दंपती व ससुराल में तानेबाजी व झगड़ा होने लगा। पंचायतें हुई, ससुराल वाले माफी मांगकर सलमा को वापस ले आए लेकिन विवाद नहीं थमा। परेशान होकर वह मायके आई। घटना के दिन उसे ससुराल में नहीं घुसने दिया। इसी कारण उसने स्वयं को आग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। मायके वालों ने ससुराल वालों के उत्पीड़न को आत्महत्या की वजह बताया था।
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