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ग्रामीण रूटों की बसें न मिलने पर छात्रों ने हंगामा, बस स्टैंड के तीनों गेट पर धरना देकर जताया रोष
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अंबाला छावनी बस स्टैंड में बस में रोष प्रकट करते छात्रों को समझाते सब इंस्पेक्टर
- फोटो : Ambala
ग्रामीण रूट पर दोपहर के समय सरकारी बसें न मिलने से नाराज अलग-अलग शिक्षण संस्थानों के सैकड़ों छात्रों ने वीरवार को छावनी बस स्टैंड में जमकर हंगामा किया। इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी की। इस दौरान छात्रों ने बस स्टैंड के तीनों गेटों पर खड़े होकर बसों की आवाजाही रोक दी। देखते ही देखते बस स्टैंड के पास जाम की स्थिति बन गई। मामला बिगड़ते देखकर आनन-फानन में पड़ाव थाना प्रभारी व बस अड्डा इंचार्ज अजीत भी मौके पर पहुंचे और करीब पौने घंटे के बाद छात्रों को शुक्रवार से ही उनकी समस्या का समाधान करने का आश्वासन देकर मामला शांत करवाया।
छात्रों का कहना था कि वह सभी अलग-अलग संस्थानों से है और सरकारी बसों के पास बने हुए हैं। घर से शिक्षण संस्थानों में आते-जाते समय बसों की बड़ी दिक्कत रहती है। प्राइवेट बस चालक उन्हें बैठाते नहीं है और सरकारी बस चालक भी बसों को रोकना उचित नहीं समझते। इन छात्रों में ज्यादातर नारायणगढ़, मुलाना, साहा और शहजादपुर के छात्र थे। उनका कहना था कि वह कई बार इस मामले को उठा चुके हैं और अड्डा इंचार्ज सहित संबंधित अधिकारियों से मिल चुके हैं। बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती। ऐसे में वह रोजाना अपने शिक्षण संस्थानों में देरी से पहुंचते हैं और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इस दौरान चंडीगढ़ से दिल्ली और पंजाब को जाने वाली बसों में सवार यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
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छात्र बोले- मेलों के लिए बसें लेकिन छात्रों के लिए नहीं
नारायणगढ़ की सीमा, मनीषा, सोनिया, अंजलि आदि का कहना है कि अक्सर देखा जाता है कि मेलों के लिए रोडवेज विभाग की ओर से बसें चला दी जाती है लेकिन छात्रों की शिक्षा के लिए अतिरिक्त बसें चलाने में आनाकानी करते हैं। आधे घंटे के सफर को तय कर घर पहुंचने में दो से तीन घंटे लग जाते हैं। बस के इंतजार में ही खड़े रहता पड़ता है। छात्राओं का कहना था कि जब बसें ही नहीं होती तो रोडवेज बस ही क्यूं बनाए जा रहे हैं।
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बस स्टैंड पर छात्रों को समझा दिया गया है कि दोबारा से उन्हें कोई परेशानी नहीं आएगी। बाद में बस भी लगवा दी गई थी।
चंद्रभान सब इंस्पेक्टर, चौकी प्रभारी, लालकुर्ती
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छात्रों का कहना था कि वह सभी अलग-अलग संस्थानों से है और सरकारी बसों के पास बने हुए हैं। घर से शिक्षण संस्थानों में आते-जाते समय बसों की बड़ी दिक्कत रहती है। प्राइवेट बस चालक उन्हें बैठाते नहीं है और सरकारी बस चालक भी बसों को रोकना उचित नहीं समझते। इन छात्रों में ज्यादातर नारायणगढ़, मुलाना, साहा और शहजादपुर के छात्र थे। उनका कहना था कि वह कई बार इस मामले को उठा चुके हैं और अड्डा इंचार्ज सहित संबंधित अधिकारियों से मिल चुके हैं। बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती। ऐसे में वह रोजाना अपने शिक्षण संस्थानों में देरी से पहुंचते हैं और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इस दौरान चंडीगढ़ से दिल्ली और पंजाब को जाने वाली बसों में सवार यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
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छात्र बोले- मेलों के लिए बसें लेकिन छात्रों के लिए नहीं
नारायणगढ़ की सीमा, मनीषा, सोनिया, अंजलि आदि का कहना है कि अक्सर देखा जाता है कि मेलों के लिए रोडवेज विभाग की ओर से बसें चला दी जाती है लेकिन छात्रों की शिक्षा के लिए अतिरिक्त बसें चलाने में आनाकानी करते हैं। आधे घंटे के सफर को तय कर घर पहुंचने में दो से तीन घंटे लग जाते हैं। बस के इंतजार में ही खड़े रहता पड़ता है। छात्राओं का कहना था कि जब बसें ही नहीं होती तो रोडवेज बस ही क्यूं बनाए जा रहे हैं।
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बस स्टैंड पर छात्रों को समझा दिया गया है कि दोबारा से उन्हें कोई परेशानी नहीं आएगी। बाद में बस भी लगवा दी गई थी।
चंद्रभान सब इंस्पेक्टर, चौकी प्रभारी, लालकुर्ती