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फसल बचाने की जद्दोजहद, अब बारह घंटे गुल रहेगी बिजली

Sat, 16 Apr 2016 12:54 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, अंबाला
ब्यूरो /अमर उजाला, अंबाला Updated Sat, 16 Apr 2016 12:54 AM IST
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struggling save the crop, power cut will continue 12 hours
फसल बचाने की जद्दोजहद, अब बारह घंटे गुल रहेगी बिजली - फोटो : Amar ujala
किसानों का सोना यानी उनकी गेहूं की फसल पूरी तरह से पककर तैयार हो चुकी है। किसान इसे बेचकर अपने इस सीजन की कमाई करना चाहते हैं, लेकिन इन दिनों उनकी फसलों को बारिश व दूसरी प्राकृतिक आपदा से खतरा नहीं  है, बल्कि बिजली विभाग के लचर सिस्टम से खतरा है। यह खतरा उनके लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक साबित हो रहा है। जिसके चलते अंबाला के कई गांवों  में हाईटेंशन तारों की चिंगारियों से फसलें जलकर राख हो चुकी है। पिछले एक सप्ताह के भीतर अंबाला में ऐसे आगजनी के कुछ मामले सामने आ भी चुके हैं। जिसे लेकर किसान बहुत ज्यादा खौफजदा है और जल्द से जल्द अपनी पकी फसल को इस  खतरे से बचाकर उसे मंडी तक पहुंचाने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं। किसानों की माने तो वे सारा ठीकरा बिजली विभाग की खेतों से गुजर रही ढीली हाईटेंशन तारों को आगजनी से खाक हो रही फसलों का जिम्मेवार मानते हैं,  लेकिन बिजली विभाग के अफसर इस आगजनी के और भी कई कारण मानते हैं, उनका कहना  है कि ऐसी घटनाओं में किसान भी जिम्मेवार है।
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-यूं जलती रही फसलें, बहते रहे किसान के आंसू
-गांव मटेड़ी जटां के पास पांच एकड़ फसल जलकर राख
-गांव कौलां रोड पर किसान की दो एकड़ फसल जलकर राख
- गांव डुलियाना में सात किसानों की पंद्रह एकड़ गेहूं व उन्नीस एकड़ फाने जले
- मोहड़ा में  किसान की एक एकड़ फसल जली
- नई आबादी क्षेत्र में  एक एकड़ फसल जलकर राख
- गांव चौड़मस्तपुर में किसान की  साढ़े तीन एकड़ फसल जलकर राख
- गांव नडियाली में दो किसानों की चार एकड़ फसल जली
-गांव पंजलासा में किसान की आधा एकड़ फसल जली
-गांव रजौली में किसान की डेढ़ एकड़ फसल जली
- गांव घेलड़ी के किसान की दो एकड़ फसल जली
- कस्बा बराड़ा के गांव ढाबी के खेतों में सात किसानों की बीस एकड़ गेहूं जलकर राख
-गांव मोहड़ा में एक एकड़ फसल जलकर राख
किसान बोले, अब तो इस डर से मुक्ति दिलवाए सरकार
किसान  जगतार सिंह, तेजबीर सिंह, कमलबीर, बलकार सिंह, स्वर्ण सिंह, गुरविंद्र  सिंह, रणदीप सिंह, बलजिंद्र सिंह, जसपाल सिह, हरपाल सिंह, अवतार सिंह व  जसविंद्र सिंह ने कहा कि अब तो कम से सरकार इस डर से मुक्ति दिलवाए। गेहूं  के हर सीजन में फसल तैयार होती है, किसानों को सबसे बड़ी टेंशन बेमौसमी  बारिश और हाईटेंशन तारों से निकलने वाली चिंगारी से फसल बर्बाद होने का  खतरा बढ़ जाता है।
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किसानों ने बताया कि खेतों से गुजर रही ये  हाईटेंशन तारे इतनी ज्यादा ढीली होती है कि तेज हवाओं की वजह से आपस में  टकराकर चिंगारियां निकालती है, यहीं चिंगारी पकी हुई फसलों पर गिरती है और  उससे फसलें खाक हो जाती है।
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किसानों ने कहा कि बेमौसमी बारिश पर तो न  सरकार और न बिजली विभाग का जोर चल सकता है, लेकिन कम से कम ढीली हाईटेंशन  तारों की चिंगारियों से होने वाली तबाही से तो सरकार किसानों को बचा सकती  है। किसानों का कहना है कि दशकों गुजर गए हर साल किसान इस आगजनी से जूझता  है, लेकिन हैरानी की बात यह कि आज तक बिजली विभाग अपनी इस लचर व्यवस्था को  ही नहीं सुधार पाया। किसानों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे कम से कम इस खतरे से तो किसानों को निजात दिलवा दें।
फायर बिग्रेड की भी बनी रहती है आफत
अचानक खेतों में आग लगनी की घटनाओं को लेकर फायर बिग्रेड विभाग की भी आफत बनी  रहती है। अंबाला में फायर बिग्रेड के पास इतने संसाधन और गाड़ियां उपलब्ध नहीं है कि कई गांवों में एक साथ ऐसी घटनाएं होने पर वे मोर्चा संभाल सकें, लेकिन फिर भी ये विभाग ऐसे सीजन में अपनी बखूबी भूमिका निभाता है और विभाग  के कर्मचारी किसानों की ऐसे मामलों में मदद करने को इधर-उधर भागदौड़ करते रहते हैं। लेकिन यदि बिजली विभाग इस समस्या का कोई स्थायी समाधान ढूंढ लें, तो न केवल किसानों की फसलें बच जाएंगीं, बल्कि इस विभाग को भी ऐेसे मामलों  में थोड़ी  राहत मिलेगी।
अब महकमा लगाएगा दिनभर कट
किसानों को आगजनी की इस घटना से निजात दिलाना है, लेकिन बिजली विभाग ने  इसका दूसरा हल ढूंढा है। हालांकि महकमा इसे किसान हित में बता रहा है, लेकिन इससे गांवों के लोगों को भी आफत झेलनी पड़ेगी। बिजली अफसरों ने  निर्देश दिए हैं कि ग्रामीण फीडरों पर अब करीबन दस से बारह घंटे के कट लगाएं जाए, ताकि खेतों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन तारों से गुजर रही बिजली का  करंट कट के दौरान खत्म रहे और तारों के टकराने से निकलने वाली चिंगारियां भी पैदा न हो। अफसरों का कहना है जब तक फसलों की कटाई पूरी नहीं होती, तब  तक ये कट जारी रहेंगे। लेकिन ग्रामीण फीड बंद होने से गांवों में रहने वाले लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि पारा बहुत ज्यादा बढ़ रहा है और इस गर्मी में बिना बिजली के रहना लोगों  के लिए बड़ी आफत  है।
उधर, बिजली महकमा का है अपना तर्क
इसी मसले पर बिजली निगम अंबाला सर्कल के अफसरों का अपना तर्क है। महकमे के अधीक्षक अभियंता वीके खुराना मानते हैं कि ढीली हाईटेंशन तारों की वजह से आगजनी की कई घटनाएं हो जाती है, लेकिन उनका ये भी दावा है कि सभी आगजनी हाईटेंशन तारों की चिंगारियों से नहीं होती है। उनके अनुसार कई बार लापरवाही की वजह से भी ऐसी आगजनी की घटनाएं होती है।
अधीक्षक अभियंता का कहना है कि फसल कटाई करने वाले मजदूर कई बार बीड़ी का सेवन करते हैं और उसे पीकर यूं ही फेंक देते हैं और उससे आग लग जाती है। उनके अनुसार ऐसे मामले भी सामने आते हैं, जब किसान फसल काटकर वहीं लगे ट्रांसफार्मर के पास रख देते हैं या ट्रांसफार्मर के आसपास इलाके में फसल लगा देते हैं। जबकि उन्हें ये एडवाइजरी जारी की जाती है कि ट्रांसफार्मर का फ्यूज उड़ने से चिंगारियां हर हालत में निकलती है, इसलिए फसलों को उससे दूर ही रखें और कटाई के दौरान उसके आसपास के इलाकों को थोड़ा गीला करके रखें।

अधीक्षक अभियंता ने बताया कि कई बार आग कंबाइन मशीन से कटिंग के दौरान भी लगती है,  क्योंकि कई बार कंबाइन मशीन से भी चिंगारियां निकलती है। उनका कहना है कि  हाईटेंशन तारों की चिंगारियां फसलों को आग लगने की एक वजह है, लेकिन और भी  कई ऐसी लापरवाहियां हैं, जो इस आगजनी का कारण बनती है, इसलिए किसानों को इन दिनों खासा जागरूक होने की जरूरत होती है। अधीक्षक अभियंता के अनुसार बिजली कट का ये शेड़्यूल इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए लगाया गया है। इससे किसानों को ही राहत मिलेगी, कटाई के बाद पर्याप्त बिजली की व्यवस्था सुचारू कर दी जाएगी। दूसरा, हाईटेंशन तारों को कसने का काम विभाग करता रहता है।
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