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Ambala News: स्लाटर हाउस ठप, खुले में मांस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Mar 2023 12:58 AM IST
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Slaughter house stalled, meat in the open
तरुण अग्रवाल
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अंबाला सिटी। बूचड़खाना न होने के कारण खुलेआम फेंके जा रहे मृत पशुओं के अवशेष आम कचरे के साथ मिक्स हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जब प्रतिवर्ष नगर निगम की ओर से बजट में बूचड़खाने के रख रखाव के लिए लाखों रुपये का बजट प्रस्तावित किया जाता है। इस बार भी निगम ने एक करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है जो पिछले साल भी इतना ही था। इसके बावजूद हकीकत यह है कि नगर निगम क्षेत्र में कोई बूचड़खाना नहीं है।
दूसरी ओर, विभिन्न दुकानों पर पशुओं की कटाई का सिलसिला जारी है। इससे स्वयं दुकानदार भी परेशान हैं। वह स्वयं पिछले 13 साल से नगर निगम क्षेत्र में बूचड़खाने का निर्माण कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नगर निगम के प्रत्येक अधिकारी से लेकर मंत्री तक को पत्र लिखने के बाद भी उन्हें कोई जगह उपलब्ध नहीं हो पाई है। बूचड़खाना न होने के कारण पशुओं से होने वाली और उसके अतिरिक्त गंदगी के निपटान की भी निगम के पास कोई खास व्यवस्था नहीं है। यह न केवल शहरवासियों बल्कि सभी के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
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गौरतलब है कि 2011 तक नसीरपुर में बूचड़खाना बना हुआ था। जहां से दुकानदार कटा कटाया मांस ले आते थे। फिर उसे फ्रीज में रखकर बेच देते थे। इस दौरान दुकानदारों की ओर से कटाई के रुपये दिए जाते थे। इसके बाद से नगर निगम क्षेत्र में बूचड़खाना नहीं है। इस कारण दुकानदारों को मजबूरी में जीवित पशु को लाकर अपनी ही दुकानों पर उनकी कटाई का कार्य करना पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि वह नियमों के अनुसार कटा कटाया मीट लाना चाहते हैं क्योंकि उनके लिए भी मुर्गे व बकरे की कटाई करने का कार्य बहुत ही मुश्किल होता है। वह स्वयं इसके लिए पिछले कई सालों से चक्कर काट रहे हैं। दुकानदारों ने मांग की है कि अंबाला में जल्द ही बूचड़खाने का निर्माण किया जाए। इसके अलावा दुकानदारों की ओर से मीट व फिश मार्केट बनाने की मांग भी की जा रही है।
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चक्कर काट कर थके
बूचड़खाना न होने के कारण हम स्वयं परेशान हैं। पता नहीं कितने चक्कर हम नगर निगम में काट चुके हैं। मंत्रियों अधिकारियों को अपनी शिकायत भी दे चुके हैं। इस मामले में कोई भी हल होता दिखाई नहीं दे रहा है। प्रशासन को जल्द से जल्द बूचड़खाना और फिश मार्केट निर्माण को लेकर व्यवस्था करनी चाहिए।
-विक्रम जीत, दुकानदार।


अधिकारी नहीं सुनते बात
हम स्वयं चाहते हैं कि कटा-कटाया सामान लाएं और दुकान पर लाकर बेच दें। हम सभी ने स्पेशल फ्रीज अपनी दुकान पर रखा हुआ है। जहां पर हम कटा कटाया सामान लाना चाहते हैं और फिर बेचना चाहते हैं परंतु नगर निगम के अधिकारियों की लेट-लतीफी और बात न सुनने की आदत हमारे लिए परेशानी बन गई है।

- सतीश कुमार, दुकानदार।


दुकानदारों को मिले लाइसेंस
हम दुकानदारों को डर-डर के काम करना पड़ रहा है। नगर निगम ने स्वयं नियमों को लेकर व्यवस्था नहीं की है जबकि हम दुकानदारों के सर पर तलवार लटकी रहती है। अगर नगर निगम की ओर से व्यवस्था कर दी जाए और हम दुकानदारों को लाइसेंस दे दिया जाए तो हम दुकानदार काफी राहत की सांस लेंगे।
- राज कुमार, दुकानदार।

बूचड़खाने को लेकर चर्चा चल रही है। जल्द ही व्यवस्था बनाने को लेकर कार्य किया जाएगा।
- जितेंद्र सिंह, डीएमसी, नगर निगम।
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