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Ambala News: साहब जाने दो, दिहाड़ी छूट जाएगी...
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ओपीएस विद्या मंदिर में बने मतगणना केंद्र के पास पुलिस ने बैरीगेट्स लगाकर सभी को रोक दिया गया। स
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। नगर निगम चुनाव की मतगणना के दौरान बुधवार को जहां एक ओर उम्मीदवारों की धड़कनें तेज थीं, वहीं दूसरी ओर मतगणना स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए पुलिस की ओर से की गई बैरिकेडिंग और सख्ती आम लोगों, स्कूली बच्चों और दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए परेशानी का सबब बन गई। सेक्टर-9 सहित आसपास के इलाकों में आवाजाही पूरी तरह बाधित रही।
इस दौरान काम पर जाने वाले मजदूरों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी। एक मजदूर ने पुलिसकर्मी के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा, साहब, काम पर जाना बहुत जरूरी है, अगर आज नहीं गया तो दिहाड़ी कट जाएगी... जाने दो। हालांकि, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस ने उसे आगे बढ़ने से रोक दिया और वापस भेज दिया। ऐसी ही स्थिति कई अन्य राहगीरों की भी रही।
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लंबा रास्ता तय करने को मजबूर हुए स्कूली बच्चे
दोपहर के समय जब स्कूलों की छुट्टी हुई, तो छोटे-छोटे बच्चों को भीषण गर्मी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मतगणना स्थल के पास से जाने वाले रास्तों को बंद किए जाने के कारण स्कूली बच्चों को कई किलोमीटर का लंबा चक्कर काटकर अपने घर जाना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने बच्चों को स्पष्ट कह दिया कि यहां से रास्ता बंद है, दूसरी तरफ से घूम कर जाओ। भारी बैग टांगे बच्चे घंटों गलियों में रास्ता तलाशते नजर आए।
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डीएसपी और स्थानीय निवासियों के बीच बहस
मतगणना स्थल के ठीक बाहर स्थित घरों में रहने वाले लोग जब अपने ही घर की दहलीज या चबूतरे पर बैठे, तो पुलिस प्रशासन के साथ उनका विवाद हो गया। सुरक्षा का जायजा लेने पहुंचे डीएसपी की स्थानीय निवासियों के साथ तीखी बहस हुई। पूरे दिन सेक्टर-9 और आसपास का इलाका छावनी में तब्दील रहा, जिससे स्थानीय लोगों की दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त रही।
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जीत के शोर में दब गई हार की खामोश पदचाप
जैसे-जैसे मतगणना केंद्र के भीतर ईवीएम के आंकड़े प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला कर रहे थे, बाहर का माहौल पल-पल बदलता रहा। शुरुआती राउंड में चेहरे पर आत्मविश्वास और मुस्कान लिए मतगणना केंद्र में दाखिल हुए कई प्रत्याशियों के तेवर परिणाम आते-आते ठंडे पड़ गए।
जैसे ही भाजपा प्रत्याशियों की निर्णायक बढ़त के रुझान स्पष्ट हुए, हार की कगार पर खड़े उम्मीदवारों के खेमे में सन्नाटा पसर गया। जो प्रत्याशी सुबह समर्थकों की भारी भीड़ के साथ जीत निश्चित होने का दावा कर रहे थे, वे अंतिम राउंड से पहले ही नजरें चुराकर मतगणना केंद्र से निकलते दिखाई दिए।
कई उम्मीदवार तो मीडिया के कैमरों और अपने ही समर्थकों के सवालों से बचने के लिए पिछले दरवाजों और गलियों का सहारा लेते नजर आए। मतगणना स्थल के बाहर जहां विजेताओं के समर्थक ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न में डूबे थे, वहीं हार का सामना कर रहे प्रत्याशियों की खामोश विदाई राजनीति के बेरहम सच को बयां कर रही थी।
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अंबाला सिटी। नगर निगम चुनाव की मतगणना के दौरान बुधवार को जहां एक ओर उम्मीदवारों की धड़कनें तेज थीं, वहीं दूसरी ओर मतगणना स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए पुलिस की ओर से की गई बैरिकेडिंग और सख्ती आम लोगों, स्कूली बच्चों और दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए परेशानी का सबब बन गई। सेक्टर-9 सहित आसपास के इलाकों में आवाजाही पूरी तरह बाधित रही।
इस दौरान काम पर जाने वाले मजदूरों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी। एक मजदूर ने पुलिसकर्मी के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा, साहब, काम पर जाना बहुत जरूरी है, अगर आज नहीं गया तो दिहाड़ी कट जाएगी... जाने दो। हालांकि, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस ने उसे आगे बढ़ने से रोक दिया और वापस भेज दिया। ऐसी ही स्थिति कई अन्य राहगीरों की भी रही।
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लंबा रास्ता तय करने को मजबूर हुए स्कूली बच्चे
दोपहर के समय जब स्कूलों की छुट्टी हुई, तो छोटे-छोटे बच्चों को भीषण गर्मी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मतगणना स्थल के पास से जाने वाले रास्तों को बंद किए जाने के कारण स्कूली बच्चों को कई किलोमीटर का लंबा चक्कर काटकर अपने घर जाना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने बच्चों को स्पष्ट कह दिया कि यहां से रास्ता बंद है, दूसरी तरफ से घूम कर जाओ। भारी बैग टांगे बच्चे घंटों गलियों में रास्ता तलाशते नजर आए।
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डीएसपी और स्थानीय निवासियों के बीच बहस
मतगणना स्थल के ठीक बाहर स्थित घरों में रहने वाले लोग जब अपने ही घर की दहलीज या चबूतरे पर बैठे, तो पुलिस प्रशासन के साथ उनका विवाद हो गया। सुरक्षा का जायजा लेने पहुंचे डीएसपी की स्थानीय निवासियों के साथ तीखी बहस हुई। पूरे दिन सेक्टर-9 और आसपास का इलाका छावनी में तब्दील रहा, जिससे स्थानीय लोगों की दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त रही।
जीत के शोर में दब गई हार की खामोश पदचाप
जैसे-जैसे मतगणना केंद्र के भीतर ईवीएम के आंकड़े प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला कर रहे थे, बाहर का माहौल पल-पल बदलता रहा। शुरुआती राउंड में चेहरे पर आत्मविश्वास और मुस्कान लिए मतगणना केंद्र में दाखिल हुए कई प्रत्याशियों के तेवर परिणाम आते-आते ठंडे पड़ गए।
जैसे ही भाजपा प्रत्याशियों की निर्णायक बढ़त के रुझान स्पष्ट हुए, हार की कगार पर खड़े उम्मीदवारों के खेमे में सन्नाटा पसर गया। जो प्रत्याशी सुबह समर्थकों की भारी भीड़ के साथ जीत निश्चित होने का दावा कर रहे थे, वे अंतिम राउंड से पहले ही नजरें चुराकर मतगणना केंद्र से निकलते दिखाई दिए।
कई उम्मीदवार तो मीडिया के कैमरों और अपने ही समर्थकों के सवालों से बचने के लिए पिछले दरवाजों और गलियों का सहारा लेते नजर आए। मतगणना स्थल के बाहर जहां विजेताओं के समर्थक ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न में डूबे थे, वहीं हार का सामना कर रहे प्रत्याशियों की खामोश विदाई राजनीति के बेरहम सच को बयां कर रही थी।

ओपीएस विद्या मंदिर में बने मतगणना केंद्र के पास पुलिस ने बैरीगेट्स लगाकर सभी को रोक दिया गया। स

ओपीएस विद्या मंदिर में बने मतगणना केंद्र के पास पुलिस ने बैरीगेट्स लगाकर सभी को रोक दिया गया। स