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Ambala News: आधी रात को तोड़े दुुकानों के थड़े, बाजार में रोष
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अंबाला। सदर बाजार में निर्माणाधीन सड़क पर दुकानों के बाहर थड़ों को तोड़ दिए। यह कार्रवाई दिन में नहीं, बल्कि सोमवार आधी रात को की गई। इससे सदर बाजार के दुकानदारों में रोष है।
उनका कहना है कि नगर परिषद ने न तो कोई नोटिस दिया और न ही कोई सूचना। जबकि अगर कार्रवाई करनी थी तो दिन में करते। उनकी तोड़-फोड़ के कारण अगर दुकान में चोरी हो जाती या दीवार टूट जाती तो लाखों का सामान खराब हो जाता। ऐसे में इसकी भरपाई कौन करता।
नगर परिषद की ओर से की ये कार्रवाई दिनभर सोशल मीडिया की सुर्खियां बनी रहीं। साेशल मीडिया पर चल रहा है कि एक विशेष व्यक्ति को फायदा पहुंचाने के लिए ही ये तोड़फोड़ रात के समय की गई है, जिससे कि किसी को भनक न लगे। दुकानदारों का कहना है कि अगर इस प्रकार जोर-जबरदस्ती की कार्रवाई चलती रही तो वो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। पहले ही सड़क निर्माण में हो रही देरी और काम में बरती जा रही ढिलाई से उनका काम-धंधा चौपट हो चुका है। विकास के नाम पर उन्हें भूखों मारने की साजिश रची जा रही है।
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प्राप्त जानकारी अनुसार सोमवार को रात के समय तोड़े जा रहे थड़ों का विरोध कुछ दुकानदारों ने किया तो नगर परिषद के जेई के साथ उनकी बहस हो गई, जोकि हाथापाई तक पहुंच गई। हालांकि अभी इस मामले में किसी भी पक्ष की तरफ से कोई शिकायत नहीं दी है।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेत्री चित्रा सरवारा का कहना है कि आधी रात को चोरों का आतंक तो सुना था, परंतु रात एक बजे नगर परिषद की टीम का थड़े तोड़ने का मामला प्रकाश में आया है। ये पूरा दिन सोशल मीडिया पर छाया रहा। आधी रात को नगर परिषद के अधिकारियों को थड़े तोड़ने का निर्देश किसने दिया। यह जांच का विषय है। अगर थड़े तोड़ने ही थे तो दुकानदारों को पहले सूचना दी जाती या मुनादी करानी चाहिए थी। थड़े तोड़ने के दौरान अगर किसी दुकान में शटर टूट जाता या चोरी हो जाती तो उसका जिम्मेदार कौन था। कथित तौर पर ये खेल एक नेता के इशारे पर रचा है।
रात को कार्रवाई गलत : पंकज
दुकानदार पंकज कुमार ने कहा कि जबसे सड़क निर्माण शुरू हुआ है। धूल-मिट्टी के कारण बाजार में दुकानदार नहीं आ रहे। इससे काम-धंधा चौपट हो गया है। अब रात के समय थड़े तोड़ना गलत है।
बिना जानकारी तोड़े थड़े : रजत
दुकानदार रजत सिंह ने कहा कि सड़क तोड़कर नए सिरे से बनाने तो ठीक है, लेकिन इसका भी समय निर्धारित होना चाहिए। बिना योजना के किए जा रहे विकास कार्य दुकानदारों के गले की फांस बन गया है। अब बिना जानकारी के दुकानों के थड़े तोड़ दिए हैं। यह तो धक्काशाही है।
पहले देना चाहिए थे नोटिस : अश्वनी
दुकानदार अश्वनी मलिक ने कहा कि नगर परिषद को दुकानों के थड़े तोड़ने ही थे तो पहले नोटिस देते। एक दिन बीच में नप की टीम सर्वे करने आई और दो-चार दुकानों को ही नोटिस दिए, लेकिन रात के समय की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई करना गलत है। इसकी जांच होनी चाहिए।
वर्जन
बाजार का सुंदरीकरण किया जा रहा है। सड़क निर्माण के बाद दोनों तरफ डिवाइडर बनाए जाने हैं। दुकानों को अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस दिए थे जोकि उन्होंने नहीं हटाए। दिन के समय अगर कार्रवाई करते तो दुकानदारी प्रभावित होती। इसलिए रात को कार्रवाई की गई, जिससे लोगों के काम-धंधों का नुकसान न हो।
राजेश कुमार, सचिव, नप सदर।
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उनका कहना है कि नगर परिषद ने न तो कोई नोटिस दिया और न ही कोई सूचना। जबकि अगर कार्रवाई करनी थी तो दिन में करते। उनकी तोड़-फोड़ के कारण अगर दुकान में चोरी हो जाती या दीवार टूट जाती तो लाखों का सामान खराब हो जाता। ऐसे में इसकी भरपाई कौन करता।
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नगर परिषद की ओर से की ये कार्रवाई दिनभर सोशल मीडिया की सुर्खियां बनी रहीं। साेशल मीडिया पर चल रहा है कि एक विशेष व्यक्ति को फायदा पहुंचाने के लिए ही ये तोड़फोड़ रात के समय की गई है, जिससे कि किसी को भनक न लगे। दुकानदारों का कहना है कि अगर इस प्रकार जोर-जबरदस्ती की कार्रवाई चलती रही तो वो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। पहले ही सड़क निर्माण में हो रही देरी और काम में बरती जा रही ढिलाई से उनका काम-धंधा चौपट हो चुका है। विकास के नाम पर उन्हें भूखों मारने की साजिश रची जा रही है।
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प्राप्त जानकारी अनुसार सोमवार को रात के समय तोड़े जा रहे थड़ों का विरोध कुछ दुकानदारों ने किया तो नगर परिषद के जेई के साथ उनकी बहस हो गई, जोकि हाथापाई तक पहुंच गई। हालांकि अभी इस मामले में किसी भी पक्ष की तरफ से कोई शिकायत नहीं दी है।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेत्री चित्रा सरवारा का कहना है कि आधी रात को चोरों का आतंक तो सुना था, परंतु रात एक बजे नगर परिषद की टीम का थड़े तोड़ने का मामला प्रकाश में आया है। ये पूरा दिन सोशल मीडिया पर छाया रहा। आधी रात को नगर परिषद के अधिकारियों को थड़े तोड़ने का निर्देश किसने दिया। यह जांच का विषय है। अगर थड़े तोड़ने ही थे तो दुकानदारों को पहले सूचना दी जाती या मुनादी करानी चाहिए थी। थड़े तोड़ने के दौरान अगर किसी दुकान में शटर टूट जाता या चोरी हो जाती तो उसका जिम्मेदार कौन था। कथित तौर पर ये खेल एक नेता के इशारे पर रचा है।
रात को कार्रवाई गलत : पंकज
दुकानदार पंकज कुमार ने कहा कि जबसे सड़क निर्माण शुरू हुआ है। धूल-मिट्टी के कारण बाजार में दुकानदार नहीं आ रहे। इससे काम-धंधा चौपट हो गया है। अब रात के समय थड़े तोड़ना गलत है।
बिना जानकारी तोड़े थड़े : रजत
दुकानदार रजत सिंह ने कहा कि सड़क तोड़कर नए सिरे से बनाने तो ठीक है, लेकिन इसका भी समय निर्धारित होना चाहिए। बिना योजना के किए जा रहे विकास कार्य दुकानदारों के गले की फांस बन गया है। अब बिना जानकारी के दुकानों के थड़े तोड़ दिए हैं। यह तो धक्काशाही है।
पहले देना चाहिए थे नोटिस : अश्वनी
दुकानदार अश्वनी मलिक ने कहा कि नगर परिषद को दुकानों के थड़े तोड़ने ही थे तो पहले नोटिस देते। एक दिन बीच में नप की टीम सर्वे करने आई और दो-चार दुकानों को ही नोटिस दिए, लेकिन रात के समय की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई करना गलत है। इसकी जांच होनी चाहिए।
वर्जन
बाजार का सुंदरीकरण किया जा रहा है। सड़क निर्माण के बाद दोनों तरफ डिवाइडर बनाए जाने हैं। दुकानों को अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस दिए थे जोकि उन्होंने नहीं हटाए। दिन के समय अगर कार्रवाई करते तो दुकानदारी प्रभावित होती। इसलिए रात को कार्रवाई की गई, जिससे लोगों के काम-धंधों का नुकसान न हो।
राजेश कुमार, सचिव, नप सदर।