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Ambala News: शिव पार्वती विवाह की झांकी ने किया भावविभोर
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मोती नगर स्थित श्री कबीर जन कल्याण सेवा आश्रम नगर खेड़ा में चल रही श्री शिवमहापुराण सप्ताह अमर कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। अंबाला सिटी के मोती नगर स्थित श्री कबीर जन कल्याण सेवा आश्रम नगर खेड़ा में आयोजित श्री शिव महापुराण सप्ताह अमर कथा कार्यक्रम के दूसरे दिन शिव महिमा का बखान किया गया। इससे पूर्व श्री शिव महापुराण एवं शिव पुराण प्रवक्ता आचार्य चैतन्य महाराज का पंडितों द्वारा मंत्रोच्चारण कर शिव भक्त बबमू, आशा, विक्की, शिवानी, पीयूष, आंचल, छवी, वीरू आदि की ओर से पुष्प मालाओं द्वारा भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर सेवकों ने बताया कि शुक्रवार को कथा पंडाल में शिव-पार्वती जी के मंगल विवाह का कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा
वहीं कथा के दौरान श्री शिव महापुराण का वर्णन करते हुए आचार्य चैतन्य महाराज ने कहा कि सदाशिव के संकल्प से ब्रह्मा, विष्णु, महेश उत्पन्न हुए, ब्रह्मा-विष्णु में शिवतत्व को नहीं जानने की वजह से ब्रम्हा-विष्णु में मैं बड़ा हूं, को लेकर विवाद हो गया। दोनों के विवाद को समाप्त करने के लिए सदाशिव एक बहुत बड़े ज्योति स्तंभ के रूप में प्रगट हो जाते हैं। ब्रह्मा -विष्णु उस ज्योति स्तंभ को देखकर आश्चर्य चकित हो जाते हैं। यह सब क्या है इसका पता करने के लिए ब्रह्मा जी हंस पर सवार होकर ऊपर जाते हैं और विष्णु गरूड़ पर सवार होकर नीचे जाते हैं। भगवान विष्णु हजार वर्षों के बाद यह सोचकर वापिस आ जाते हैं कि इसका अंत नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मा व विष्णु ने सर्वप्रथम शिवलिंग पूजा कर अभिषेक किया। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवलिंग प्रगट हुए थे। तब से इसी दिन को महाशिवरात्रि कहा जाता है। इसी प्रसंग के साथ कथा को विराम दिया गया। जिसका वर्णन सुंदर झांकियों के माध्यम से किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। अंबाला सिटी के मोती नगर स्थित श्री कबीर जन कल्याण सेवा आश्रम नगर खेड़ा में आयोजित श्री शिव महापुराण सप्ताह अमर कथा कार्यक्रम के दूसरे दिन शिव महिमा का बखान किया गया। इससे पूर्व श्री शिव महापुराण एवं शिव पुराण प्रवक्ता आचार्य चैतन्य महाराज का पंडितों द्वारा मंत्रोच्चारण कर शिव भक्त बबमू, आशा, विक्की, शिवानी, पीयूष, आंचल, छवी, वीरू आदि की ओर से पुष्प मालाओं द्वारा भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर सेवकों ने बताया कि शुक्रवार को कथा पंडाल में शिव-पार्वती जी के मंगल विवाह का कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा
वहीं कथा के दौरान श्री शिव महापुराण का वर्णन करते हुए आचार्य चैतन्य महाराज ने कहा कि सदाशिव के संकल्प से ब्रह्मा, विष्णु, महेश उत्पन्न हुए, ब्रह्मा-विष्णु में शिवतत्व को नहीं जानने की वजह से ब्रम्हा-विष्णु में मैं बड़ा हूं, को लेकर विवाद हो गया। दोनों के विवाद को समाप्त करने के लिए सदाशिव एक बहुत बड़े ज्योति स्तंभ के रूप में प्रगट हो जाते हैं। ब्रह्मा -विष्णु उस ज्योति स्तंभ को देखकर आश्चर्य चकित हो जाते हैं। यह सब क्या है इसका पता करने के लिए ब्रह्मा जी हंस पर सवार होकर ऊपर जाते हैं और विष्णु गरूड़ पर सवार होकर नीचे जाते हैं। भगवान विष्णु हजार वर्षों के बाद यह सोचकर वापिस आ जाते हैं कि इसका अंत नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मा व विष्णु ने सर्वप्रथम शिवलिंग पूजा कर अभिषेक किया। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवलिंग प्रगट हुए थे। तब से इसी दिन को महाशिवरात्रि कहा जाता है। इसी प्रसंग के साथ कथा को विराम दिया गया। जिसका वर्णन सुंदर झांकियों के माध्यम से किया जाएगा।
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