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Ambala News: स्कूल का भवन जर्जर, खतरे में नौनिहालों का जीवन
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धर्म सिंह
अंबाला। उप तहसील अंबाला-1 के रवालों गांव में अध्यापक खस्ताहाल भवन में प्राइमरी के बच्चों को पढाने को मजबूर हैं। गांव की पंचायत व अन्य मौजिज लोग पिछले डेढ़ साल से स्कूल भवन के नवनिर्माण को लेकर शिक्षा विभाग के कार्यालयों के धक्के खा रहे हैं।
पंचायत सदस्य गुरचरन सिंह ने बताया कि गांव के लोगों को लेकर स्थानीय विधायक, डीईईओ व पीडब्ल्यूडी विभाग के आलाधिकारियों को मिल चुके हैं। छोटे-छोटे बच्चों के भविष्य व सुरक्षा को लेकर कोई भी अधिकारी गंभीर नहीं है। अब मजबूरन ग्रामिणों ने मन मनाया है कि वे अब शिक्षा विभाग के डॉयरेक्टर, शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेंगे। यदि फिर भी समस्या को कोई समाधान नहीं हुआ तो मजबूरन धरना-प्रदर्शन करेंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी अंबाला प्रशासन की होगी।
लक्ष्मन ने बताया कि बच्चों के भविष्य को लेकर सरकार का यह कार्य बहुत ही निंदनीय है। यदि सरकारी स्कूल खोले हैं तो उनके रख-रखाव को लेकर भी सरकार को सक्रिय रहना चाहिए।
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संजय ने बताया कि स्कूल में उनके तीन बच्चे पढते हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनके बच्चे भविष्य में बडे़ पदों पर तैनात होंगे। अब उन्हें पता लगा की उनका जीवन ही सुरक्षित नहीं है।
सिंदर कौर ने बताया कि वह बच्चों को स्कूल में इसलिए पढ़ने के लिए भेजते हैं, ताकि वह भविष्य में कुछ बन सकें तथा अपने गुरु, माता-पिता व देश का नाम रोशन कर सकें।
राधा ने बताया कि उसके दो बच्चे हैं। जो पहली व चौथी कक्षाओं में पढते हैं। जर्जर भवन के चलते वह स्कूल में दो बार चक्कर लगाती हैं की कहीं अनहोनी न हो जाए।
गुरचरन सिंह पंच ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में उन्हें हर जगह से आश्वासन मिल रहे हैं। अभी तक प्रशासन व संबंधित विभाग द्वारा कोई हलचल शुरू नहीं करवाई गई है।
पीडब्ल्यूडी विभाग ने जांच के बाद पत्र जारी कर दिया है कि उक्त बिल्डिंग कंडम है। इसलिए पहले जर्जर भवन को तोड़ा जाएगा साथ ही कमरों के निर्माण का कार्य भी चलेगा। तब तक बच्चों को अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। बच्चों की संख्या भी कम है। इसलिए विषय को गहराई से विचारते हुए संज्ञान लिया जाएगा।
-दर्शन कुमार, जेई, शिक्षा सदन अंबाला
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अंबाला। उप तहसील अंबाला-1 के रवालों गांव में अध्यापक खस्ताहाल भवन में प्राइमरी के बच्चों को पढाने को मजबूर हैं। गांव की पंचायत व अन्य मौजिज लोग पिछले डेढ़ साल से स्कूल भवन के नवनिर्माण को लेकर शिक्षा विभाग के कार्यालयों के धक्के खा रहे हैं।
पंचायत सदस्य गुरचरन सिंह ने बताया कि गांव के लोगों को लेकर स्थानीय विधायक, डीईईओ व पीडब्ल्यूडी विभाग के आलाधिकारियों को मिल चुके हैं। छोटे-छोटे बच्चों के भविष्य व सुरक्षा को लेकर कोई भी अधिकारी गंभीर नहीं है। अब मजबूरन ग्रामिणों ने मन मनाया है कि वे अब शिक्षा विभाग के डॉयरेक्टर, शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेंगे। यदि फिर भी समस्या को कोई समाधान नहीं हुआ तो मजबूरन धरना-प्रदर्शन करेंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी अंबाला प्रशासन की होगी।
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लक्ष्मन ने बताया कि बच्चों के भविष्य को लेकर सरकार का यह कार्य बहुत ही निंदनीय है। यदि सरकारी स्कूल खोले हैं तो उनके रख-रखाव को लेकर भी सरकार को सक्रिय रहना चाहिए।
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संजय ने बताया कि स्कूल में उनके तीन बच्चे पढते हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनके बच्चे भविष्य में बडे़ पदों पर तैनात होंगे। अब उन्हें पता लगा की उनका जीवन ही सुरक्षित नहीं है।
सिंदर कौर ने बताया कि वह बच्चों को स्कूल में इसलिए पढ़ने के लिए भेजते हैं, ताकि वह भविष्य में कुछ बन सकें तथा अपने गुरु, माता-पिता व देश का नाम रोशन कर सकें।
राधा ने बताया कि उसके दो बच्चे हैं। जो पहली व चौथी कक्षाओं में पढते हैं। जर्जर भवन के चलते वह स्कूल में दो बार चक्कर लगाती हैं की कहीं अनहोनी न हो जाए।
गुरचरन सिंह पंच ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में उन्हें हर जगह से आश्वासन मिल रहे हैं। अभी तक प्रशासन व संबंधित विभाग द्वारा कोई हलचल शुरू नहीं करवाई गई है।
पीडब्ल्यूडी विभाग ने जांच के बाद पत्र जारी कर दिया है कि उक्त बिल्डिंग कंडम है। इसलिए पहले जर्जर भवन को तोड़ा जाएगा साथ ही कमरों के निर्माण का कार्य भी चलेगा। तब तक बच्चों को अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। बच्चों की संख्या भी कम है। इसलिए विषय को गहराई से विचारते हुए संज्ञान लिया जाएगा।
-दर्शन कुमार, जेई, शिक्षा सदन अंबाला