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उफान पर नदियां, दहशत में लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला
Updated Sun, 20 Jul 2014 12:29 AM IST
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पहाड़ों पर झमाझम बारिश ने अंबाला के लोगों की धड़कने बढ़ा दी हैं, क्योेंकि अंबाला की तीनों बड़ी बरसाती नदियाें मारकंडा, टांगरी और घग्गर उफान पर हैं। यदि पहाड़ों पर बारिश और ज्यादा होती है तो ये नदियां खतरे के निशान से ऊपर हो जाएंगी। इसी को लेकर शहर वासियों, मुलाना और कैंट वासियों में दहशत फैल गई है।
घग्गर से दहशत
घग्गर नदी अंबाला शहर से सटकर निकलती है। आगे शहर व नग्गल हलके के अधिकतर गांवों को टच करती है। नग्गल में एसवाईएल और नरवाना ब्रांच पर भी घग्गर के ओवलफ्लो होने पर पानी छोड़ दिया जाता है। यह पानी शहर के अधिकतर गांवों में तबाही मचाता है। उधर, शहर इस नदी की वजह से शहर 3 अगस्त, 2004 में बाढ़ का दंश झेल चुका है जिसके जख्म आज तक हरे हैं। जबकि सितंबर 2008 में भी घग्गर में बाढ़ आने की वजह से एसवाईएल ने अंबाला शहर के गांवों में खासी तबाही मचाई थी। अब फिर से पहाड़ों पर हुई अच्छी खासी बारिश की वजह से यह नदी पूरे उफान पर है।
टांगरी से खौफ
टांगरी नदी अंबाला कैंट इलाके से होती हुई आगे बढ़ रही है। कैंट के पूरे महेशनगर इलाके, आर्मी इलाके और शहर व मुलाना हलके के कुछ गांवों के लिए इस नदी का उफान हमेशा खतरनाक रहा है। 6 जुलाई, 2010 की बाढ़ का मंजर अंबाला के लोग अब तक भूले नहीं है। इसकी वजह बना था यही टांगरी नदी का उफान। कई जगह बांध टूटे और कैंट, शहर व मुलाना के कई गांव जलमग्न हो गए। इसके अलावा सन 1998 व 1999 में भी नदी के उफान से पूरे महेशनगर इलाके में ऐसी तबाही मचाई थी कि लोग आज तक नहीं भूले। इस वक्त भी पहाड़ों पर हो रही बारिश की वजह से यह नदी उफान पर है।
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मारकंडा ने बढ़ाई धड़कने
मारकंडा नदी का इलाका नारायणगढ़ से शुरू होता हुआ मुलाना व बराड़ा की हद से आगे शाहाबाद निकल जाता है। दर्जनों गांव इस नदी की जद में हैं। बारिश सामान्य हो तो ये नदी धान के सीजन में गांवों की जमीनों के लिए सिंचाई का बड़ा माध्यम बन जाती है लेकिन बारिश ज्यादा हो जाए तो ये किसानों के खेत तक अपने साथ बहा ले जाती है। इस वक्त भी नदी पहाड़ों की बारिश से पूरे उफान पर है। मारकंडा ने जून 2006 में ऐसी तबाही मचाई थी कि नारायणगढ़ और मुलाना के लोग आजतक यह मंजर नहीं भूले हैं। मारकंडा नदी पर नारायणगढ़ में बना पुल पूरी तरह ढह गया था। कई वाहन और उसमें सवार लोग बह गए थे। हजारों एकड़ फसलें तबाह हो गई थीं। इसी तरह वर्ष 2003 में भी इस नदी के उग्र रूप ने मुलाना में काफी तबाही मचाई थी। इस वक्त भी यह नदी पूरी तरह से उफान पर है।
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घग्गर से दहशत
घग्गर नदी अंबाला शहर से सटकर निकलती है। आगे शहर व नग्गल हलके के अधिकतर गांवों को टच करती है। नग्गल में एसवाईएल और नरवाना ब्रांच पर भी घग्गर के ओवलफ्लो होने पर पानी छोड़ दिया जाता है। यह पानी शहर के अधिकतर गांवों में तबाही मचाता है। उधर, शहर इस नदी की वजह से शहर 3 अगस्त, 2004 में बाढ़ का दंश झेल चुका है जिसके जख्म आज तक हरे हैं। जबकि सितंबर 2008 में भी घग्गर में बाढ़ आने की वजह से एसवाईएल ने अंबाला शहर के गांवों में खासी तबाही मचाई थी। अब फिर से पहाड़ों पर हुई अच्छी खासी बारिश की वजह से यह नदी पूरे उफान पर है।
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टांगरी से खौफ
टांगरी नदी अंबाला कैंट इलाके से होती हुई आगे बढ़ रही है। कैंट के पूरे महेशनगर इलाके, आर्मी इलाके और शहर व मुलाना हलके के कुछ गांवों के लिए इस नदी का उफान हमेशा खतरनाक रहा है। 6 जुलाई, 2010 की बाढ़ का मंजर अंबाला के लोग अब तक भूले नहीं है। इसकी वजह बना था यही टांगरी नदी का उफान। कई जगह बांध टूटे और कैंट, शहर व मुलाना के कई गांव जलमग्न हो गए। इसके अलावा सन 1998 व 1999 में भी नदी के उफान से पूरे महेशनगर इलाके में ऐसी तबाही मचाई थी कि लोग आज तक नहीं भूले। इस वक्त भी पहाड़ों पर हो रही बारिश की वजह से यह नदी उफान पर है।
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मारकंडा ने बढ़ाई धड़कने
मारकंडा नदी का इलाका नारायणगढ़ से शुरू होता हुआ मुलाना व बराड़ा की हद से आगे शाहाबाद निकल जाता है। दर्जनों गांव इस नदी की जद में हैं। बारिश सामान्य हो तो ये नदी धान के सीजन में गांवों की जमीनों के लिए सिंचाई का बड़ा माध्यम बन जाती है लेकिन बारिश ज्यादा हो जाए तो ये किसानों के खेत तक अपने साथ बहा ले जाती है। इस वक्त भी नदी पहाड़ों की बारिश से पूरे उफान पर है। मारकंडा ने जून 2006 में ऐसी तबाही मचाई थी कि नारायणगढ़ और मुलाना के लोग आजतक यह मंजर नहीं भूले हैं। मारकंडा नदी पर नारायणगढ़ में बना पुल पूरी तरह ढह गया था। कई वाहन और उसमें सवार लोग बह गए थे। हजारों एकड़ फसलें तबाह हो गई थीं। इसी तरह वर्ष 2003 में भी इस नदी के उग्र रूप ने मुलाना में काफी तबाही मचाई थी। इस वक्त भी यह नदी पूरी तरह से उफान पर है।