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125 फीट के सबसे ऊंचे रावण का बराड़ा में होगा दहन
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अंबाला। हर साल की तरह इस बार भी बराड़ा में सबसे ऊंचे 125 फीट के रावण का रिमोट के जरिये बुधवार को दहन होगा। दहन होगा। 10 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार इस पुतले को तीन दिन पहले ही खड़ा किया था। आयोजक राष्ट्र जागरण मंच के संस्थापक अमरिंदर सिंह ने बताया कि पुतले का वजन करीब चार टन है। श्री रामलीला क्लब के संस्थापक तेजिंदर चौहान ने 24 अगस्त से पुतले का निर्माण कार्य शुरू किया था।
तजिंद्र चौहान ने बताया कि पुतले की तलवार 30 फुट, 18 फुट की मूछें, छतर 15 फुट, मुकुट 30 फुट, चेहरा 15 फुट, धड़ 45 फुट, पैर से घुटने तक 15 फुट, जूते पांच फुट ऊंचे हैं। तलवार में 20 क्विंटल लोहा, बांस 500 पीस, रस्सी 50 किलो, कपड़ा 500 मीटर, मैट 500 मीटर, करीब एक लाख रुपये के इको फ्रेंडली पटाखे प्रयोग किए गए हैं। 20 वर्करों की मदद से करीब तीन महीने में बनने वाले इस पुतले को दिन-रात काम करके महज 38 दिनों में बनाया गया है।
तजिंदर चौहान को विश्व में रावण का सबसे ऊंचा 221 फुट पुतला बनाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने बताया कि बराड़ा में प्रशासन की बेरुखी के कारण करीब चार साल पहले रावण के पुतले का दहन पंचकूला व तीन साल पहले चंडीगढ़ में करना पड़ा। उन्होंने बताया कि दशहरा मैदान में अब आबादी बसने लगी है। इसके चलते जगह की कमी होने लगी है। इस बारे में प्रशासन से गुहार लगाई लेकिन न तो दशहरा मैदान में व्यवस्था बन पाई और न ही कहीं ओर जगह की व्यवस्था हो सकी। इसके कारण ही 2017 के बाद बराड़ा में रावण के पुतले का दहन नहीं हो सका। इसके बाद 2018 में पंचकूला व 2019 में चंडीगढ़ में रावण के पुतले का दहन हुआ।
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इस बार मोहाली में बनना था 221 फुट ऊंचा पुतला
तजिंद्र चौहान ने बताया कि इस साल मोहाली में 221 फुट ऊंचा पुतला दहन की योजना थी लेकिन आयोजन के लिए अनुमति नहीं मिल पाने के कारण योजना अमल में नहीं जा सकी। उन्होंने बताया कि उन्हें एक महीने पहले ही अनुमति दी जाती लेकिन वो नहीं मिली।
आठ जगह होगा दहन
बराड़ा के अलावा जिले में छावनी के गांधी मैदान, दशहरा मैदान, शहर के हुड्डा मैदान, सिटी रामबाग मैदान, सेक्टर-7 हाउसिंग बोर्ड, महाकाली मां दुखभंजनी माता मंदिर, नारायणगढ़ पुराना बस अड्डा के पास और कालाअम्ब में रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होगा।
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तजिंद्र चौहान ने बताया कि पुतले की तलवार 30 फुट, 18 फुट की मूछें, छतर 15 फुट, मुकुट 30 फुट, चेहरा 15 फुट, धड़ 45 फुट, पैर से घुटने तक 15 फुट, जूते पांच फुट ऊंचे हैं। तलवार में 20 क्विंटल लोहा, बांस 500 पीस, रस्सी 50 किलो, कपड़ा 500 मीटर, मैट 500 मीटर, करीब एक लाख रुपये के इको फ्रेंडली पटाखे प्रयोग किए गए हैं। 20 वर्करों की मदद से करीब तीन महीने में बनने वाले इस पुतले को दिन-रात काम करके महज 38 दिनों में बनाया गया है।
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तजिंदर चौहान को विश्व में रावण का सबसे ऊंचा 221 फुट पुतला बनाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने बताया कि बराड़ा में प्रशासन की बेरुखी के कारण करीब चार साल पहले रावण के पुतले का दहन पंचकूला व तीन साल पहले चंडीगढ़ में करना पड़ा। उन्होंने बताया कि दशहरा मैदान में अब आबादी बसने लगी है। इसके चलते जगह की कमी होने लगी है। इस बारे में प्रशासन से गुहार लगाई लेकिन न तो दशहरा मैदान में व्यवस्था बन पाई और न ही कहीं ओर जगह की व्यवस्था हो सकी। इसके कारण ही 2017 के बाद बराड़ा में रावण के पुतले का दहन नहीं हो सका। इसके बाद 2018 में पंचकूला व 2019 में चंडीगढ़ में रावण के पुतले का दहन हुआ।
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इस बार मोहाली में बनना था 221 फुट ऊंचा पुतला
तजिंद्र चौहान ने बताया कि इस साल मोहाली में 221 फुट ऊंचा पुतला दहन की योजना थी लेकिन आयोजन के लिए अनुमति नहीं मिल पाने के कारण योजना अमल में नहीं जा सकी। उन्होंने बताया कि उन्हें एक महीने पहले ही अनुमति दी जाती लेकिन वो नहीं मिली।
आठ जगह होगा दहन
बराड़ा के अलावा जिले में छावनी के गांधी मैदान, दशहरा मैदान, शहर के हुड्डा मैदान, सिटी रामबाग मैदान, सेक्टर-7 हाउसिंग बोर्ड, महाकाली मां दुखभंजनी माता मंदिर, नारायणगढ़ पुराना बस अड्डा के पास और कालाअम्ब में रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होगा।