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रानी का तालाब 400 साल पुराना है, ऐतिहासिकता पर होगी शोध
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Rani ka talab in ambala
- फोटो : Ambala
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रानी का तालाब कितना पुराना है। इसकी ऐतिहासिकता अब रिसर्च क दायरे में होगी। किवदंतियों में अभी रानी का तालाब 400 साल पुराना बताया जा रहा है। तालाब के साथ बने शिवमंदिर के अंदर-बाहर लगे होर्डिंग्स पर ये साफ लिखा है कि 400 साल पुराने इस तालाब में छछरौली (कलसिया) रियासत के राजा रणजीत सिंह की पत्नी रोज शाही स्नान करती थी। स्नान के बाद रानी यहां बने शिव मंदिर व ज्ञासी माता मंदिर में पूजा भी करती थी। हालांकि कलसिया रियासत पर अभी तक हुई रिसर्च में रानी के तालाब का कहीं जिक्र नहीं मिला है। इस तथ्य को खंगालने के लिए जल्द ही कलसिया रिसासत पर रिसर्च कर रहे प्रोफेसर वीरेंद्र ढिल्लों रानी के तालाब व इससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों का अवलोकन करेंगे।
250 साल पुरानी है कलसिया रियासत
जगाधरी स्थित महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्रोफेसर वीरेंद्र ढिल्लों कलसिया रियासत पर रिसर्च कर रहे हैं। उनके मुताबिक कलसिया रियासत 250 साल पुरानी हैं। जबकि रानी के तालाब को 400 साल पुराना बताया जा रहा है। रिसर्च के लिहाज रानी के तालाब व कलसिया रियासत के तथ्य ही मैच नहीं हो पा रहे हैं। प्रोफेसर ढिल्लों कहते हैं कि 1763 में स्थापित कलसिया रियासत छछरौली से लेकर जालंधर, चिराग (लाहौर) व बस्सी (अब डेराबस्सी) तक फैली थी।
मगर अंबाला खासतौर पर अंबाला कैंटोनमेंट कलसिया रियासत का हिस्सा नहीं रहा। कलसिया रियासत के राजा रणजीत सिंह की दो पत्नियां दयाकौर व बसंत कौर थी। बंसत कौर पटियाला के कमांडर इन चीफ की बेटी थी जिसका ज्यादातर समय बस्सी तहसील में ही बीता। जबकि रिसर्च में दूसरी रानी दयाकौर के कभी अंबाला कैंटोनमेंट में आने के तथ्य ही नहीं हैं। प्रोफेसर ढिल्लों कहते हैं कि रानी के तालाब का अगर कलसिया रियासत से कोई जुड़ाव है तो वे पुराने दस्तावेजों का अवलोकन करेंगे। ताकि यहां आने श्रद्धालुओं को तालाब व स्थापित शिव मंदिर व ज्ञासी माता मंदिर के बारे में सही जानकारी मिल सके।
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मलेरिया फैलने से शिफ्ट हुआ था बोर्ड
कैंटोनमेंट बोर्ड पहले करनाल में हुआ था। प्रोफेसर वीरेंद्र ढिल्लों बताते हैं कि 1841-42 में करनाल में मलेरिया फैल गया था। तब अंग्रेजी हुकुमत ने कैंटोनमेंट बोर्ड का करनाल से अंबाला में शिफ्ट किया था। इसके बाद से ही बोर्ड यहां स्थापित है। कैंटोनमेंट बोर्ड एरिया में ही रानी का तालाब है। यहां भव्य शिवमंदिर भी है। बाहर लगे होर्डिंग्स के मुताबिक 1999 से पहले शिवमंदिर व ज्ञासी माता मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी साधु संतों के पास थी। मगर इसके बाद सेना ने इसे अपने अधीन ले लिया। सेना के जवान ही मंदिर में पूजा अर्चना व सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
मंत्री ने दिए थे 20 लाख, सेना नहीं खर्चे
कैंटोनमेंट बोर्ड के वाइस प्रेजीडेंट अजय बवेजा ने बताया कि दो साल पहले स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज शिवरात्रि पर यहां मत्था टेकने आए थे। तब उन्होंने ऐतिहासिक रानी के तालाब की स्थिति सुधारने के लिए 20 लाख रूपये दिए थे। बवेजा ने बताया कि दो साल बाद भी सेना ने ये पैसा तालाब के जीर्णोद्वार पर खर्च नहीं किया। उन्होंने कहा कि सेना नहीं चाहती कि तालाब पर राज्य सरकार का कोई पैसा खर्च हो। इसी वजह से 20 लाख रूपये का फंड ऐसे ही लटका पड़ा है। अभी तालाब की स्थिति बेहद खराब है। देखरेख के अभाव में यह तालाब बरसाती जोहड़ बनकर रह गया है। तालाब में अक्सर बरसाती पानी जमा रहता है। जिसमें घास व झाडिय़ां उगी हुई हैं।
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250 साल पुरानी है कलसिया रियासत
जगाधरी स्थित महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्रोफेसर वीरेंद्र ढिल्लों कलसिया रियासत पर रिसर्च कर रहे हैं। उनके मुताबिक कलसिया रियासत 250 साल पुरानी हैं। जबकि रानी के तालाब को 400 साल पुराना बताया जा रहा है। रिसर्च के लिहाज रानी के तालाब व कलसिया रियासत के तथ्य ही मैच नहीं हो पा रहे हैं। प्रोफेसर ढिल्लों कहते हैं कि 1763 में स्थापित कलसिया रियासत छछरौली से लेकर जालंधर, चिराग (लाहौर) व बस्सी (अब डेराबस्सी) तक फैली थी।
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मगर अंबाला खासतौर पर अंबाला कैंटोनमेंट कलसिया रियासत का हिस्सा नहीं रहा। कलसिया रियासत के राजा रणजीत सिंह की दो पत्नियां दयाकौर व बसंत कौर थी। बंसत कौर पटियाला के कमांडर इन चीफ की बेटी थी जिसका ज्यादातर समय बस्सी तहसील में ही बीता। जबकि रिसर्च में दूसरी रानी दयाकौर के कभी अंबाला कैंटोनमेंट में आने के तथ्य ही नहीं हैं। प्रोफेसर ढिल्लों कहते हैं कि रानी के तालाब का अगर कलसिया रियासत से कोई जुड़ाव है तो वे पुराने दस्तावेजों का अवलोकन करेंगे। ताकि यहां आने श्रद्धालुओं को तालाब व स्थापित शिव मंदिर व ज्ञासी माता मंदिर के बारे में सही जानकारी मिल सके।
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मलेरिया फैलने से शिफ्ट हुआ था बोर्ड
कैंटोनमेंट बोर्ड पहले करनाल में हुआ था। प्रोफेसर वीरेंद्र ढिल्लों बताते हैं कि 1841-42 में करनाल में मलेरिया फैल गया था। तब अंग्रेजी हुकुमत ने कैंटोनमेंट बोर्ड का करनाल से अंबाला में शिफ्ट किया था। इसके बाद से ही बोर्ड यहां स्थापित है। कैंटोनमेंट बोर्ड एरिया में ही रानी का तालाब है। यहां भव्य शिवमंदिर भी है। बाहर लगे होर्डिंग्स के मुताबिक 1999 से पहले शिवमंदिर व ज्ञासी माता मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी साधु संतों के पास थी। मगर इसके बाद सेना ने इसे अपने अधीन ले लिया। सेना के जवान ही मंदिर में पूजा अर्चना व सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
मंत्री ने दिए थे 20 लाख, सेना नहीं खर्चे
कैंटोनमेंट बोर्ड के वाइस प्रेजीडेंट अजय बवेजा ने बताया कि दो साल पहले स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज शिवरात्रि पर यहां मत्था टेकने आए थे। तब उन्होंने ऐतिहासिक रानी के तालाब की स्थिति सुधारने के लिए 20 लाख रूपये दिए थे। बवेजा ने बताया कि दो साल बाद भी सेना ने ये पैसा तालाब के जीर्णोद्वार पर खर्च नहीं किया। उन्होंने कहा कि सेना नहीं चाहती कि तालाब पर राज्य सरकार का कोई पैसा खर्च हो। इसी वजह से 20 लाख रूपये का फंड ऐसे ही लटका पड़ा है। अभी तालाब की स्थिति बेहद खराब है। देखरेख के अभाव में यह तालाब बरसाती जोहड़ बनकर रह गया है। तालाब में अक्सर बरसाती पानी जमा रहता है। जिसमें घास व झाडिय़ां उगी हुई हैं।