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रमसा का बजट खत्म, लटका 7223 शिक्षकों का वेतन
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Sun, 14 Feb 2016 01:04 AM IST
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वर्ष 2013 में भर्ती किए गए हजारों पीजीटी (पोस्ट ग्रेजुएट टीचर) के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इन शिक्षकों को अक्तूबर से वेतन ही नहीं मिल रहा है। जिस वजह से इन शिक्षकों का गुजर-बसर मुश्किल बना हुआ है। इतना ही नहीं इन शिक्षकों के लिए त्योहारी सीजन तक फीका निकला, जबकि नया साल भी अभी तक इन शिक्षकों के लिए मायूसी भरा बना हुआ है, क्योंकि खाली जेब शिक्षकों का गुजारा मुश्किल बनता जा रहा है। इस बात को लेकर हजारों पीजीटी में जहां सरकार के खिलाफ काफी ज्यादा रोष व्याप्त हो गया है, वहीं इन शिक्षकों की चेतावनी है कि यदि उनके साथ ऐसा ही व्यवहार होता रहा तो, उन्हे मजबूरन कोर्ट की शरण लेनी पड़ेगी।
दुखी है शिक्षक, टरका रहे हैं अफसर
दरअसल, पूरे प्रदेश में 7223 पीजीटी का यही हाल है। इनमें से सैंकड़ों टीचर अंबाला के भी शामिल हैं। अंबाला के पोस्ट ग्रेजुएट टीचरों ने बताया कि उन लोगों को पूर्व सरकार में नियमानुसार भर्ती किया गया था, लेकिन इस सरकार में उन्हें बहुत ज्यादा परेशानियां झेलनी पड़ रही है। उनका कहना है कि सभी शिक्षक सरकारी स्कूलों में तैनात है और पूरी मेहनत के साथ अपनी ड्यूटी भी कर रहे हैं, लेकिन पिछले काफी समय से उनका वेतन नियमित नहीं आ रहा है। उन्हें राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परियोजना (रमसा)
के बजट से वेतन दिया जाता है, लेकिन अब बताया जा रहा है कि इस परियोजना में अब बजट ही खत्म हो गया है। इसी वजह से अक्तूबर-नवंबर से ही उनका वेतन लटका हुआ है। शिक्षकों ने बताया कि वे लोग शिक्षा विभाग के अफसरों के धक्के खाकर थक चुके हैं। उनकी दिवाली, दशहरा, ईद, क्रिसमस, गुरुपर्व और तो और नववर्ष और लोहड़ी सभी बिना बजट के फीके ही गए हैं, क्योंकि शिक्षकों की जेबें खाली थी। उनके अनुसार अब तो उनके घरों का गुजारा भी मुश्किल हो रहा है। शिक्षकों के अनुसार सरकार उनकी समस्या की ओर ध्यान दें, वरना उन्हें मजबूरन एकजुट होकर कोर्ट की शरण लेनी होगी। शिक्षकों ने कहा कि यदि परियोजना में बजट पर्याप्त नहीं है, तो सरकार उनके वेतन बजट का अन्य शिक्षकों की तरह इंतजाम करें, जिस बजट से दूसरे रेगुलर शिक्षकों को बजट मिलता है, उन्हें भी उसे बजट से वेतन जारी किया जाए।
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इस बारे में आला अफसरों को लिखा जाएगा। कोशिश है कि विभाग इन शिक्षकों के वेतन के लिए बजट का इंतजाम करें। विभाग के संज्ञान में इन शिक्षकों की समस्या है, जल्द ही विभाग इस ओर कार्रवाई करेगा।
-जिले सिंह अत्रेय, उप निदेशक, शिक्षा विभाग-
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दुखी है शिक्षक, टरका रहे हैं अफसर
दरअसल, पूरे प्रदेश में 7223 पीजीटी का यही हाल है। इनमें से सैंकड़ों टीचर अंबाला के भी शामिल हैं। अंबाला के पोस्ट ग्रेजुएट टीचरों ने बताया कि उन लोगों को पूर्व सरकार में नियमानुसार भर्ती किया गया था, लेकिन इस सरकार में उन्हें बहुत ज्यादा परेशानियां झेलनी पड़ रही है। उनका कहना है कि सभी शिक्षक सरकारी स्कूलों में तैनात है और पूरी मेहनत के साथ अपनी ड्यूटी भी कर रहे हैं, लेकिन पिछले काफी समय से उनका वेतन नियमित नहीं आ रहा है। उन्हें राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परियोजना (रमसा)
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के बजट से वेतन दिया जाता है, लेकिन अब बताया जा रहा है कि इस परियोजना में अब बजट ही खत्म हो गया है। इसी वजह से अक्तूबर-नवंबर से ही उनका वेतन लटका हुआ है। शिक्षकों ने बताया कि वे लोग शिक्षा विभाग के अफसरों के धक्के खाकर थक चुके हैं। उनकी दिवाली, दशहरा, ईद, क्रिसमस, गुरुपर्व और तो और नववर्ष और लोहड़ी सभी बिना बजट के फीके ही गए हैं, क्योंकि शिक्षकों की जेबें खाली थी। उनके अनुसार अब तो उनके घरों का गुजारा भी मुश्किल हो रहा है। शिक्षकों के अनुसार सरकार उनकी समस्या की ओर ध्यान दें, वरना उन्हें मजबूरन एकजुट होकर कोर्ट की शरण लेनी होगी। शिक्षकों ने कहा कि यदि परियोजना में बजट पर्याप्त नहीं है, तो सरकार उनके वेतन बजट का अन्य शिक्षकों की तरह इंतजाम करें, जिस बजट से दूसरे रेगुलर शिक्षकों को बजट मिलता है, उन्हें भी उसे बजट से वेतन जारी किया जाए।
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इस बारे में आला अफसरों को लिखा जाएगा। कोशिश है कि विभाग इन शिक्षकों के वेतन के लिए बजट का इंतजाम करें। विभाग के संज्ञान में इन शिक्षकों की समस्या है, जल्द ही विभाग इस ओर कार्रवाई करेगा।
-जिले सिंह अत्रेय, उप निदेशक, शिक्षा विभाग-