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Ambala News: खेतों के लिए बारिश बन रही वरदान
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जलबेहड़ा में बारिश के बाद खेत की जुताई करते बुजुर्ग किसान। संवाद
जलबेड़ा। बारिश किसानों के लिए वरदान बन रही है, क्योंकि गेहूं और तूड़ी का काम पूरा हो चुका है। अब बारी है धान के लिए खेतों की जोताई की। इस बारिश से खेतों में नमी आ गई है। इस कारण अब ट्रैक्टरों के साथ खेतों की जुताई आसानी से हो सकेगी।
जलबेड़ा गांव में कुछ किसानों ने तो अपने खेतों की हैरों के साथ जुताई भी कर दी है। किसान जहां अपने खेतों को धान से पहले लेवल करने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करते थे, वहीं यह बारिश खेतों का लेवल करने वाले किसानों के लिए भी लाभदायक सिद्ध हो रही है। सूखे खेतों में डले हो जाते थे और इस कारण खेत की ना तो सही से जुताई हो पाती थी और ना ही सही से लेवल हो पाता था।
नमी से होता है फायदा
नमी के कारण खेतों की जुताई गहराई से हो रही है। इसका एक सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि इससे फसल अवशेष आसानी से जमीन में मिल जाते हैं, जो आगे चलकर खाद का काम करते हैं। इससे धरती की उर्वरा शक्ति तो बढ़ती ही है, साथ ही धरती की ऊपरी परत आग से होने वाले नुकसान से भी बचाती है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो धरती के लिए फसल अवशेष व बारिश वरदान है। बुजुर्ग किसान संत राम का कहना है कि बारिश के पानी से प्रत्येक फसल की पैदावार ट्यूबवेल व नाले के पानी की अपेक्षा ज्यादा रहती है।
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जलबेड़ा गांव में कुछ किसानों ने तो अपने खेतों की हैरों के साथ जुताई भी कर दी है। किसान जहां अपने खेतों को धान से पहले लेवल करने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करते थे, वहीं यह बारिश खेतों का लेवल करने वाले किसानों के लिए भी लाभदायक सिद्ध हो रही है। सूखे खेतों में डले हो जाते थे और इस कारण खेत की ना तो सही से जुताई हो पाती थी और ना ही सही से लेवल हो पाता था।
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नमी से होता है फायदा
नमी के कारण खेतों की जुताई गहराई से हो रही है। इसका एक सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि इससे फसल अवशेष आसानी से जमीन में मिल जाते हैं, जो आगे चलकर खाद का काम करते हैं। इससे धरती की उर्वरा शक्ति तो बढ़ती ही है, साथ ही धरती की ऊपरी परत आग से होने वाले नुकसान से भी बचाती है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो धरती के लिए फसल अवशेष व बारिश वरदान है। बुजुर्ग किसान संत राम का कहना है कि बारिश के पानी से प्रत्येक फसल की पैदावार ट्यूबवेल व नाले के पानी की अपेक्षा ज्यादा रहती है।
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