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बरसात ने दो चिताओं की आग को बुझाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। कोरोना महामारी में श्मशान घाटों में चिता की राख शांत होने से पहले ही परिजन फूल चुगने को मजबूर हैं तो कहीं संक्रमित शव को खुले आसमान तले जलाने की मजबूरी है। ऐसा ही हुआ वीरवार शाम 5 बजे दो दुखी परिवारों के साथ। शाम पांच बजे कोरोना संक्रमित शव के साथ दो परिवार के सदस्य रामबाग श्मशान घाट में पहुंच चुके थे। जैसे ही दोनों शवों को मुखाग्नि दी गई बरसात शुरू हो गई। बरसात ने शवों की चिताओं की अग्नि को शांत कर दिया। अंतिम संस्कार के लिए संस्था के सदस्यों को करीब चार घंटे कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
शवों को जैसे-तैसे वीरवार को चार घंटे बाद अंतिम संस्कार पूरा हुआ। इसके बाद संस्था के महामंत्री सुरेंद्र मल्होत्रा ने इसी सूचना निगम आयुक्त को दी। इसी समस्या को देखते हुए निगम आयुक्त शुक्रवार को पूरी टीम के साथ रामबाग स्थित श्मशान घाट पहुंचे। संस्था के सदस्यों से बात करते हुए समाधान पर चर्चा की। संस्था के सदस्यों ने आयुक्त से संक्रमितों के शवों के लिए शेड बनवाने की मांग की। इसे निगम आयुक्त ने मानते हुए तुरंत एक्सईएन रमन जागलान को शेड बनाने के निर्देश देते हुए कार्य दस दिन मेें पूूरा करने के लिए कह दिया।
बनाया जाएगा 150 फुट लंबा शेड
इस समस्या के समाधान और पार्थिव शरीरों को छाया देने के लिए अब रामबाग श्मशान घाट में करीब 150 फुट लंबा और 13 फुट चौड़ा शेड बनाया जाएगा। इस पर करीब 5 लाख रुपये खर्च का आंकलन किया गया है। इसी तरह निगम आयुक्त ने अंबाला छावनी स्थित रामबाग रोड श्मशान घाट का भी निरीक्षण किया और वहां भी संभावनाओं को तलाशा।
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कोरोना संक्रमितों के शवों की अंत्येष्टि खुले आसमान व कच्ची जमीन पर हो रही थी। जिसको देखते हुए निगम आयुक्त ने करीब डेढ़ सौ फुट लंबा, करीब 13 फुट चौड़ा शेड बनाने के लिए कहा है। जिसमेें करीब 4 से 5 लाख रुपये का खर्चा आएगा। यह शेड बनने से करीब 12 से 14 शवों का संस्कार किया जा सकता है। - तरुण कुमार, जेई, नगर निगम
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अंबाला सिटी। कोरोना महामारी में श्मशान घाटों में चिता की राख शांत होने से पहले ही परिजन फूल चुगने को मजबूर हैं तो कहीं संक्रमित शव को खुले आसमान तले जलाने की मजबूरी है। ऐसा ही हुआ वीरवार शाम 5 बजे दो दुखी परिवारों के साथ। शाम पांच बजे कोरोना संक्रमित शव के साथ दो परिवार के सदस्य रामबाग श्मशान घाट में पहुंच चुके थे। जैसे ही दोनों शवों को मुखाग्नि दी गई बरसात शुरू हो गई। बरसात ने शवों की चिताओं की अग्नि को शांत कर दिया। अंतिम संस्कार के लिए संस्था के सदस्यों को करीब चार घंटे कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
शवों को जैसे-तैसे वीरवार को चार घंटे बाद अंतिम संस्कार पूरा हुआ। इसके बाद संस्था के महामंत्री सुरेंद्र मल्होत्रा ने इसी सूचना निगम आयुक्त को दी। इसी समस्या को देखते हुए निगम आयुक्त शुक्रवार को पूरी टीम के साथ रामबाग स्थित श्मशान घाट पहुंचे। संस्था के सदस्यों से बात करते हुए समाधान पर चर्चा की। संस्था के सदस्यों ने आयुक्त से संक्रमितों के शवों के लिए शेड बनवाने की मांग की। इसे निगम आयुक्त ने मानते हुए तुरंत एक्सईएन रमन जागलान को शेड बनाने के निर्देश देते हुए कार्य दस दिन मेें पूूरा करने के लिए कह दिया।
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बनाया जाएगा 150 फुट लंबा शेड
इस समस्या के समाधान और पार्थिव शरीरों को छाया देने के लिए अब रामबाग श्मशान घाट में करीब 150 फुट लंबा और 13 फुट चौड़ा शेड बनाया जाएगा। इस पर करीब 5 लाख रुपये खर्च का आंकलन किया गया है। इसी तरह निगम आयुक्त ने अंबाला छावनी स्थित रामबाग रोड श्मशान घाट का भी निरीक्षण किया और वहां भी संभावनाओं को तलाशा।
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कोरोना संक्रमितों के शवों की अंत्येष्टि खुले आसमान व कच्ची जमीन पर हो रही थी। जिसको देखते हुए निगम आयुक्त ने करीब डेढ़ सौ फुट लंबा, करीब 13 फुट चौड़ा शेड बनाने के लिए कहा है। जिसमेें करीब 4 से 5 लाख रुपये का खर्चा आएगा। यह शेड बनने से करीब 12 से 14 शवों का संस्कार किया जा सकता है। - तरुण कुमार, जेई, नगर निगम